DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

पाकिस्तान में जंगल 

पाकिस्तान में जंगल उजड़ रहे हैं। पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है। इसके लिए विशेषज्ञ अक्सर पुरानी सभ्यता के पतन और गिरावट को जिम्मेदार ठहराते हैं। अगर विशेषज्ञों की यही राय है, तो पाकिस्तान को अपने अस्तित्व पर मंडराते खतरे से डरना चाहिए। अपने ताजा फैसलों में से एक में लाहौर उच्च न्यायालय (एलएचसी) ने यह दर्ज किया है कि पाकिस्तान में जंगलों की कटाई जिस गति से हो रही है, वह दुनिया में सबसे अधिक है। उच्च न्यायालय द्वारा निकाला गया यह नतीजा हम सभी के लिए चिंताजनक है। अध्ययनों से पता चलता है, पिछले कुछ वर्षों में जलवायु में तेजी से बदलाव आ रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, तापमान में गंभीर उतार-चढ़ाव, गरम हवाएं और मौसम का शुष्क होना भी जंगलों की कटाई के जाहिर नतीजे हैं। इस बात से कोई इनकार नहीं कि जंगलों से हमें अनेक मूर्त और अमूर्त लाभ हैं। इस सच्चाई को जानने के बावजूद लोग जंगलों को अपना नहीं समझते हैं। सरकार भी जंगलों के प्रति स्वामित्व की भावना पैदा करने में नाकाम रही है। यूएनडीपी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2015 में पाकिस्तान में वनक्षेत्र घटकर 1.9 प्रतिशत रह गया है। आदर्श स्थिति में कुल भूमि का 25 प्रतिशत हिस्सा वनक्षेत्र होना चाहिए। 

पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) की सरकार जलवायु परिवर्तन के बारे में यह सोच तो रखती है कि यह पाकिस्तान के सामने कठिन चुनौती है, लेकिन इस दिशा में सरकार की कोशिशें नाकाफी साबित हो रही हैं। इसका मतलब है, जंगलों की सुरक्षा के मौजूदा तंत्र को विकसित करने की जरूरत है। सख्त वन संरक्षण और वृक्षारोपण नीति तैयार करने के अलावा सरकार को बजट में वनीकरण के लिए पर्याप्त संसाधन देने की जरूरत है। अभियानों के माध्यम से लोगों को जागरूक करना चाहिए। सरकार को कुदरत के इन उपहारों की रक्षा के लिए जंगलों के आसपास रहने वाले लोगों को प्रोत्साहित करना चाहिए। उनके सहयोग से वनों को कटने से बचाया जा सकता है। सरकार को वनक्षेत्र में कमी की कुदरती वजहों से निपटने के लिए भी कदम उठाने चाहिए। 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:hindustan international media column on 9th September