Hindustan Foreign media on April 3 - नेपाल में आपदा DA Image

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नेपाल में आपदा

नेपाल प्राकृतिक आपदाओं से अपरिचित नहीं है, लेकिन रविवार शाम बारा और परसा जिले के गांवों में आया तूफान अभूतपूर्व था, जिसकी वजह से कम से कम 29 लोगों की जान गई और 600 से ज्यादा लोग घायल हो गए। मौसम विभाग ने भारी बारिश का अनुमान लगाया था, लेकिन तूफान की तीव्रता का अनुमान नहीं था। चेतावनी के बावजूद लोगों के सामने मजबूरी थी, वे घर में नहीं, तो कहां छिपते? सरकार इस प्राकृतिक आपदा के बाद तत्काल हरकत में आई। प्रधानमंत्री ने अपने गृहनगर झापा में अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों को निरस्त कर दिया। उन्होंने कहा, सरकार प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।

नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस जैसी रक्षा-सुरक्षा एजेंसियों को प्रभावित इलाकों में मदद के लिए तैनात कर दिया गया है, ताकि जनजीवन को सामान्य बनाया जा सके। चूंकि अस्पतालों में घायलों की भीड़ बढ़ गई है, इसलिए वहां दवाइयों, चिकित्सा यंत्रों, बिस्तरों और डॉक्टरों की कमी होने की रिपोर्ट सामने आई है। अत: ऐसी आपदा के समय सरकार को यह जरूर देखना चाहिए कि प्रभावित इलाकों में किसी तरह का अभाव न हो। यह आपदा एक राष्ट्रीय समस्या है और केंद्र व प्रांतीय सरकार को प्रभावित इलाकों में लोगों के घावों पर मरहम लगाने की सभी गतिविधियों में समन्वय के साथ काम करना चाहिए।

प्रांतीय सरकार ने निर्णय लिया है, अपने किसी परिजन को गंवाने वाले परिवारों को तीन-तीन लाख रुपये मुआवजा दिया जाएगा और घायलों के इलाज का खर्च सरकार उठाएगी। परिस्थितियों की गंभीरता देखते हुए यह सबके हित में है कि राहत कार्यों को युद्ध स्तर पर चलाया जाए और इसमें किसी तरह की राजनीति न हो। विदेश स्थित नेपालियों और नेपाली संगठनों ने इस आपदा से निपटने के लिए धन जुटाने का अभियान शुरू कर दिया है। चूंकि यह तबाही भूकंप में आने वाली तबाही के समान है, इसलिए देर-सबेर सरकार को पुनर्निर्माण और पुनर्वास कार्यक्रम चलाने पड़ेंगे, ताकि गरीब के सिर पर छत नसीब हो जाए और जीवन पटरी पर लौट आए।

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