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ब्रेग्जिट पर बंटा विपक्ष

ब्रेग्जिट के विषय पर ब्रिटेन में विपक्षी लेबर पार्टी की आंतरिक जद्दोजहद अपने शबाब पर पहुंच रही है। अक्तूबर 31 को बगैर-सौदे के ब्रेग्जिट प्रस्ताव रद्द होने की संभावना ज्यादा है। यूरोपीय संघ में रहने के पक्षधर लेबर पार्टी के नेताओं के पास अपने नेता जेरेमी कोर्बिन को आश्वस्त करने के लिए काफी कम समय बचा है। औपचारिक रूप से यूरोपीय संघ समर्थक रुख अपनाया जाएगा या दूसरा जनमत संग्रह कराने पर सहमति बनेगी, कहना मुश्किल है। शैडो चांसलर जॉन मैकडोनेल ने स्पष्ट कर दिया है कि वह यूरोपीय संघ में रहने के पक्षधर हैं और चाहते हैं कि शरद काल में इसी मुद्दे पर आम चुनाव करा लिए जाएं।

मैकडोनेल चूंकि कोर्बिन के सबसे पुराने मित्र व सहकर्मी हैं, इसलिए उनके बोलने का महत्व है। उनके प्रभाव को वामपंथी सलाहकारों के खिलाफ माना जा रहा है। उन्हें लगता है, इन सलाहकारों ने कोर्बिन को बंधक बना रखा है। संसद के पास कुछ ही सप्ताह बचे हैं, फिर वह लंबी छुट्टी पर चली जाएगी, तब तक लेबर पार्टी के नेताओं को समस्या सुलझा लेनी चाहिए। देश को नए प्रधानमंत्री के साथ आगे बढ़ना होगा। नए प्रधानमंत्री ब्रेग्जिट जैसे बड़े मुद्दे पर विपक्ष की बेतरतीबी का लाभ उठाएंगे। उदारवादी डेमोक्रेट्स को नई प्रेरणा मिलेगी। उनके पास भी एक नया नेता होगा और वे भी यूनाइटेड किंगडम के यूरोप में रहने पर जनमत संग्रह के लिए बिना शर्म बाध्य होंगे।

वास्तव में लेबर पार्टी ने फिर एक बार दिखाया है कि वह अपने आंतरिक अलगाववाद की समस्या से जूझने में नाकाम रही है। नौबत यहां तक पहुंच गई है कि लेबर पार्टी के ही सांसद संसदीय विशेषाधिकार के तहत इस मुद्दे पर पार्टी का पर्दाफाश करने की धमकी देने लगे हैं। बहुत पहले ही कुछ सांसदों ने बता दिया था कि कोर्बिन ऐसे बड़े कार्य के लिए उपयुक्त नहीं हैं, लेकिन वे इसके बावजूद उन्हें हटा नहीं पाए। जब कोर्बिन ने वर्ष 2017 के चुनावों में अपेक्षा से बेहतर प्रदर्शन किया, तो उनके विरोधी भी लाभ देखते हुए उनके पक्ष में आ खड़े हुए। खैर, लेबर पार्टी का समय स्पष्ट रूप से खत्म होता जा रहा है।

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  • Web Title:Hindustan Foreign Media Column on 9th July