DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

चीन का रवैया

कल्पना कीजिए, 50 लाख से एक करोड़ ब्रिटिश नागरिक किसी नए कानून का विरोध करने सड़क पर उतर आएं। कल्पना कीजिए, सहनशील और राजनीतिक रूप से रूढ़िवादी लोग भी सड़कों पर निकल आएं, इनमें वकील और चर्च मंडली भी शामिल हों। इसके बाद कल्पना कीजिए, सरकार यह कहे कि लोग मामले को समझ नहीं पाए और बदलाव तो कुछ ही दिनों में होकर रहेगा। यही कुछ हांगकांग ने देखा है। लाखों हांककांग निवासी, वहां की आबादी का हर सातवां नागरिक प्रत्यर्पण कानून में बदलाव के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल हुआ।

ब्रिटेन ने 1997 में हांगकांग को जब चीन के हाथों में सौंपा था, तब ब्रिटेन व चीन में सहमति बनी थी कि आने वाले 50 वर्ष तक हांगकांग की जीवन शैली यथावत रखी जाएगी, लेकिन अब चीन ने जो किया है, वह उस प्रतिबद्धता का सबसे ताजा व बड़ा उल्लंघन है। कानून की एक दीवार को हटाया जा रहा है। इस बदलाव के बाद हांगकांग निवासी और हांगकांग यात्रा पर आए लोग चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की सनक के दायरे में आ जाएंगे। कम्युनिस्ट पार्टी ही मुख्य चीनी जमीन पर अदालतों को नियंत्रित करती है और अपनी सुविधा के अनुसार मुकदमे बनाने में माहिर है। हांगकांग के मुख्य कार्यकारी कैरी लेम के अनुसार, धारणा यह है कि प्रत्यर्पण संबंधी बदलाव होने पर आरोपी को मुख्य चीनी जमीन पर ले जाकर मुकदमा चलाया जाएगा। इस कानून का इस्तेमाल आलोचकों के खिलाफ व्यापक रूप से होगा।

आगामी दिनों में हांगकांग में विरोध प्रदर्शन बढ़ेंगे। हांगकांग और विदेश में विपरीत मत के प्रति चीन ने अवमानना का प्रदर्शन किया है। चीन ने कहा है कि चीनी-ब्रिटिश संयुक्त घोषणापत्र का अब कोई व्यावहारिक महत्व नहीं है। कुछ लोग सोचेंगे कि अब विरोध की सार्थकता नहीं है, पर अंतिम नतीजों से परे हांगकांग में हो रहे विरोध ने अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया है और उसे समर्थन मिलना चाहिए। चीन का रवैया विश्व के नेताओं, खासकर ब्रिटेन को पर्याप्त कारण मुहैया कराता है कि वे चीन को हांगकांग की स्वायत्तता का सम्मान करने के लिए पूरे दमखम के साथ कहें।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Hindustan Foreign Media Column on 13th June