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बच्चों से बदसुलूकी

आव्रजन जैसे बड़े विषय पर सीमा सुरक्षा बलों से मतभेद की भरपूर गुंजाइश है, लेकिन जब बात आव्रजन शिविरों में बच्चों के हालात की आती है, तो बहस की कोई गुंजाइश नहीं बचती। छोटे बच्चे, शिशु, नवजात केवल इस बात की सजा पा रहे हैं, क्योंकि वे किसी तरह से संयुक्त राज्य अमेरिका की धरती पर आ गए हैं। इन बच्चों को हफ्तों तक गंदगी में रहने के लिए मजबूर करना संघीय अधिकारियों की बेशर्मी है। क्लिंट, टेक्सास में ऐसे शिविर हैं, जहां बच्चे भूखे रहते हैं और स्वच्छता से भी वंचित हैं। उनके लिए बिस्तर नहीं हैं, उनकी देखरेख करने वालों का अभाव है। वे तरह-तरह के संक्रामक रोगों के शिकार हो रहे हैं।

मध्य अमेरिका में हिंसा के कारण बड़ी संख्या में आव्रजक अमेरिका में शरण ले रहे हैं और कई-कई दिनों तक उन शिविरों में रहने को मजबूर हैं, जिनमें बहुत कम जगह है। खुद सरकार की होमलैंड सिक्युरिटी के अनुसार, भारी तापमान, कम जगह और गंदे शरीरों के साथ लोग इन शिविरों में रहने को मजबूर हैं। यह राष्ट्रीय अपमान से कम नहीं है और इस पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कैसा व्यवहार किया है? पहले जिम्मेदार अधिकारियों का मानना था कि निगरानीकर्ता और मीडिया मामले को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है। हालांकि सच यही है कि सीमा पर तैनात अधिकारियों ने अपने बड़े अधिकारियों को पहले ही खबर दे दी थी कि शिविरों में स्थितियां बिगड़ रही हैं, लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ। जब शिविरों में बरती जा रही अमानवीयता के चित्र और समाचार छपने लगे, तभी इंस्पेक्टर जनरल जागे। तमाम अधिकारी सक्रिय हुए और अब 2,000 के करीब बच्चों के लिए वैकल्पिक आवास का इंतजाम किया जा रहा है।

आव्रजकों के संदर्भ में ट्रंप द्वारा बरती जा रही कुछ कड़ी नीतियों ने भी हालात को बिगाड़ा है। एक दशक तक किसी भी आव्रजक बच्चे की मौत नहीं हुई थी, लेकिन दिसंबर से अभी तक संघीय देख-रेख में सात बच्चों की मौत हो चुकी है। मध्य अमेरिका के आव्रजकों के प्रति अपने प्रशासन की निर्ममता की वजह से ट्रंप इतिहास में अपने लिए जगह हासिल कर चुके हैं। 

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  • Web Title:Hindustan Foreign Media Column on 13th July