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संगीत पर आपत्ति

पिछले वर्ष यू ट्यूब ने मेट्रोपॉलिटन पुलिस के आग्रह पर 30 संगीत वीडियो हटा दिए। पुलिस का दावा है कि ये संगीत वीडियो हिंसा का गुणगान करके उसे बढ़ावा दे रहे थे। सभी ट्रैक या गीत ड्रिल के समर्थकों द्वारा बनाए गए थे। लंदन की खिचड़ी बोली वाले गंभीर रैप या गीत थे, जिन्हें दोषी माना गया। जबकि ब्रिटेन में हिंसा इसलिए बढ़ रही है, क्योंकि पुलिस का बजट घटता जा रहा है और युवा सेवा गायब होती जा रही है, लेकिन अधिकारी गीतों को जिम्मेदार मान रहे हैं। शारीरिक हमलों को रोकने में नाकामी के लिए कला को दोषी ठहराने का तर्क उतना ही कमजोर है, जितनी कमजोर संगीत पट्टी होती है। रैपर क्रेप्ट और कोनन कहते हैं, ड्रिल कलाकारों को उसी नागरिक आदेश के माध्यम से चुप कराया जा रहा है, जिसका इस्तेमाल आतंकवादियों को निशाना बनाने के लिए किया जाता है। दो रैपर को जनवरी के महीने में ही एक ऐसा ही गीत गाने के जुर्म में कारावास की निलंबित सजा सुनाई गई थी। ड्रिल संगीत विशेष रूप से अश्वेत युवाओं का संगीत है, जिसमें वे अपने और अपने साथियों की जिंदगी बयान करते हैं। उनकी अभिव्यक्ति की आजादी क्यों बाधित की जा रही है? वर्ष 1968 में स्ट्रीट फाइटिंग मैन को प्रतिबंधित नहीं किया गया था, जिसने लंदन के लोगों को दंगाई परसियंस का अनुकरण करने के लिए उकसाया था। वर्ष 2012 में डबलिन में स्वीडिश हाउस माफिया के कार्यक्रम में नौ लोग छुरीबाजी के शिकार हुए, पर उस संगीत बैंड को प्रतिबंधित नहीं किया गया। उन मामलों में श्रोता-दर्शक श्वेत थे। कथित भड़काऊ कला की बात करें, तो नस्लीय भेदभाव का दुखद इतिहास रहा है। ड्रिल को संगीत से रोका जा रहा है। वास्तव में, गीतों में खतरा खोजने की बजाय अल्पसंख्यकों के साथ बेहतर संबंध बनाने की जरूरत है। पुलिस के लिए सामाजिक समस्याओं से जूझने से बहुत आसान है ड्रिल को निशाना बनाना। ड्रिल पर प्रतिबंध लगाना शायद ब्रिटेन को अगले सितारों से वंचित कर देगा। अपराध रोकने के लिए शहरी निराशा के संगीत की आवाज बंद करने से कहीं अधिक हमें प्रयास करने पड़ेंगे।

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  • Web Title:hindustan foreign media column june 29