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नाम बदलने के बहाने

संघवाद की अवधारणा नेपाल में थोड़ी नई है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि संघवाद के सिद्धांत हमारे लिए नए हों। भारत, अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया सहित अनेक देशों में संघवाद चल रहा है। संघवाद का विचार यह है कि राज्य की शक्ति को उप-राष्ट्रीय सरकारों में बांट दिया जाए और ये छोटी-छोटी सरकारें अपने-अपने क्षेत्र की स्थानीय समस्याओं और लोगों की जरूरतों के अनुरूप विकास की गतिविधियां चलाएं। सितंबर 2015 में लागू हुए नए संविधान ने त्रिस्तरीय सरकार में न्याय, सत्ता और जिम्मेदारी को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया था। संविधान के तहत इन स्थानीय सरकारों को जो निर्णय लेने के अधिकार कानूनन दिए गए हैं, उन्हें लेने के लिए संघीय सरकार से मंजूरी लेने की कोई जरूरत नहीं है।

स्थानीय निकाय स्वतंत्र संस्थाएं हैं, लेकिन संघीय सरकार उनसे ताकत छीनने के प्रयास में है। प्रधानमंत्री ने हाल ही में ऐसे ही संकेत दिए हैं। इस केंद्र-वादी मानसिकता को नकारने की जरूरत है। एक हालिया उदाहरण है, केंद्र द्वारा स्थानीय सरकारों को अपने नाम या मुख्यालय बदलने से रोकना। कानून निर्माताओं की मांग है, केंद्र सरकार अब स्थानीय सरकारों को ही नाम बदलने का अधिकार दे। स्थानीय निकाय स्तर पर 2017 में चुनाव होने के बाद से केंद्र सरकार स्थानीय निकाय के क्षेत्रों में ही 102 नाम और मुख्यालय बदल चुकी है। 62 मुख्यालय बदले गए हैं, इनमें 18 के नाम बदले गए हैं, और 22 के नाम व मुख्यालय, दोनों ही बदल दिए गए हैं।

केंद्रीय या संघीय सरकार को ऐसा क्यों करना चाहिए? यह काम तो स्थानीय स्तर पर ही कौंसिल की बैठक बुलाकर दो-तिहाई बहुमत से किया जा सकता है। केंद्र सरकार वास्तव में स्थानीय निकायों की शक्ति को भी अपने पास रखने की कोशिश में है। यदि कोई स्थानीय निकाय कानूनन नाम या मुख्यालय बदलने का निर्णय लेता है, तो केंद्र सरकार को कतई आपत्ति नहीं करनी चाहिए। जरूरी है, केंद्र सरकार उप-राष्ट्रीय सरकारों की मदद करे, ताकि वे संघवाद की भावना के तहत ही ठीक से काम कर पाएं।

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  • Web Title:Hindustan Foreign Media Column August 10