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13 अगस्त, 2020|12:07|IST

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दोष खोजना छोड़ो

जहां अत्यधिक संक्रमण के शिकार स्पेन और इटली जैसे देशों में कोरोना के प्रकोप की रफ्तार घटने लगी है, वहीं अमेरिका अभी इस मोड़ पर नहीं पहुंचा है। अमेरिका में मंगलवार को संक्रमित लोगों की संख्या दस लाख से भी अधिक हो गई, दुनिया के एक तिहाई मरीज अकेले अमेरिका में हो गए। वहां 60 हजार से ज्यादा लोग मर चुके हैं, यह संख्या भी दुनिया की करीब एक चौथाई है। 
लगभग सभी पहलुओं से दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में अमेरिका को इस तरह के सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल का जवाब देने में सक्षम होना चाहिए। वह भी तब, जब स्थिति बिगड़ने के दो महीने पहले ही चेतावनी दी गई थी और सभी बचाव उपायों के बारे में बताया गया था। इन उपायों को अन्य देशों ने सफलतापूर्वक आजमाया। फिर भी दुख की बात है, पर अमेरिका ने अभी भी वायरस के खिलाफ खुद को पर्याप्त सुरक्षित नहीं किया है। अमेरिकी प्रशासन वायरस को फैलने से रोकने को लेकर चाहे जितनी भी बड़ी-बड़ी बातें करे, लेकिन उसे इस कड़वी सच्चाई को निगलना ही होगा कि उसने घरेलू स्थिति को काबू में रखने का सुनहरा अवसर गंवा दिया, जिसके चलते ऐसी स्थिति बनी। जबकि अमेरिका की तुलना में बेहतर काम करने वाले अधिकांश देश अब अपने द्वारा उठाए गए कदमों के फायदे देखने लगे हैं। वे अपनी अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए अधिक पहल करके हालात बदलने की कोशिश कर रहे हैं और यह तय कर रहे हैं कि वायरस ने अगर पलटवार किया, तो वे बेहतर तरीके से जवाब दे सकें। दूसरी ओर, अमेरिकी प्रशासन ने जीवन को बचाने में अपनी सफलता के बारे में डींगें मारने और जान-माल के नुकसान के लिए दूसरों को दोष देने का प्रयास किया। जब विश्व समुदाय का अधिकांश हिस्सा एकजुटता और समन्वय के लिए प्रयासरत है, तब अमेरिकी सरकार झगड़ा करने, दूसरों को बदनाम करने और खुद को पीड़ित बताने में व्यस्त है। जब तक विशेषज्ञों की सलाह पर गौर नहीं किया जाएगा, जब तक अमेरिकी सरकार दोषारोपण के लिए किसी को खोजती रहेगी, तब तक कोरोना को नियंत्रित करने के उसके प्रयास सही रास्ते पर नहीं जाएंगे।

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  • Web Title:hindustan foreign media column 2 may 2020