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1 जनवरी, 2021|1:01|IST

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टीके का संबल 

खुशखबरी और निराशा के बीच का फर्क इससे ज्यादा गाढ़ा नहीं हो सकता। किफायती और काफी प्रभावशाली ऑक्सफोर्ड/एस्ट्राजेनेका वैक्सीन को ब्रिटेन की मंजूरी उम्मीद के सुनहरे पलों के समान है। आज से पहले कभी इसकी इतनी जरूरत नहीं थी। लंदन, बर्मिंघम और एसेक्स के अस्पतालों के आगे घंटों-घंटों खड़ी एंबुलेंस की कतारें स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ते दबाव का अंदाजा देती हैं। ऐसे में, टीके की मंजूरी की घोषणा एक बड़ी घटना है। लगातार दूसरे दिन संक्रमण के नए मामले 50 हजार से अधिक दर्ज किए गए हैं। 981 लोगों की जान गई है। क्रिसमस की छुट्टियों में बरती गई लापरवाही का असर तो अभी और देखने को मिलेगा। अस्पतालों में दाखिल होने वाले मरीजों की तादाद कोरोना की पहली लहर की सर्वोच्च संख्या को भी पार कर चुकी है, और जो स्थिति दिख रही है, वह बदतर हो सकती है। ऑक्सफोर्ड/एस्ट्राजेनेका वैक्सीन की अनुमति ने टीकाकरण के विस्तार को मुमकिन बना दिया है, इसलिए पहली कतार के स्वास्थ्यकर्मियों को सुरक्षित करने के लिए उन्हें फौरन टीके लगाए जाएं। यह एक लंबे लॉकडाउन व संक्रमण के नए मामलों में और तेजी से बचने का बड़ा मौका है। ग्रेटर मैनचेस्टर, नॉर्थ-ईस्ट, मिडलैंड्स और दक्षिण-पश्चिम वाले क्षेत्रों तक टियर 4 (कठोर पाबंदियों वाला क्षेत्र) का विस्तार एक शुरुआत है। टियर 4 के तहत अब इंग्लैंड की तीन-चौथाई आबादी आ गई है, बाकी सब टियर 3 के तहत हैं। ऐसा लगता है, सरकार देशव्यापी लॉकडाउन का वक्त देख रही है कि इसे कब लागू किया जाए। विशेषज्ञों के एक समूह ने इसकी अपील की है।...
बहरहाल, सरकार जितनी देर करेगी, वायरस को काबू में लाना उतना मुश्किल होगा। बेहतर यही है कि तेजी से कदम उठाए जाएं और फिर संभव हो, तो उपायों में ढील दी जाए। एक लॉकडाउन अधिक स्पष्टता लेकर आएगा, क्योंकि काफी सारे लोग रह-रहकर बदलते टियरों, नियमों और सलाहों से ऊब गए हैं। आवश्यकता है कि निर्णायक, समयोचित उपाय अपनाए जाएं और लोगों को साफ-साफ बताया जाए कि ये उपाय क्यों जरूरी हैं।
 

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  • Web Title:hindustan foreign media column 1 january 2021