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अपना हित देखे श्रीलंका

यूक्रेन आज जर्जर स्थिति में है। यह हमें साल 2009 के अपने गृहयुद्ध के अंतिम चरण की याद दिलाता है। रूस एक बड़ी शक्ति है। उसने यह दावा करते हुए यूक्रेन पर हमला बोला है कि उसे वहां रूसीभाषी लोगों की रक्षा...

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डेली मिरर, श्रीलंका Fri, 04 Mar 2022 09:54 PM

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यूक्रेन आज जर्जर स्थिति में है। यह हमें साल 2009 के अपने गृहयुद्ध के अंतिम चरण की याद दिलाता है। रूस एक बड़ी शक्ति है। उसने यह दावा करते हुए यूक्रेन पर हमला बोला है कि उसे वहां रूसीभाषी लोगों की रक्षा करनी है। स्थिति यह है कि तमाम तरह के प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन रुकने को तैयार नहीं हैं और शांति-वार्ता की किसी भी मांग को कोई तवज्जो नहीं दे रहे। पर्यटन के नजरिये से देखें, तो इस जटिल संघर्ष मेें श्रीलंका भी शामिल हो गया है। इस वक्त रूस व यूक्रेन, दोनों के कई पर्यटक श्रीलंका में मौजूद हैं और स्थानीय पुलिस को सतर्क कर दिया गया है कि वह सुनिश्चित करे कि उनके बीच कोई संघर्ष न हो। श्रीलंका में यूक्रेन के कुछ लोगों का विरोध-प्रदर्शन सोशल मीडिया में वायरल हो गया है। इन लोगों को श्रीलंकाई नागरिकों और राजपक्षे सरकार की भी सहानुभूति मिली है। होटलों ने उन्हें निर्धारित प्रवास से आगे भी रहने देने की योजना बनाई है, तो वहीं श्रीलंका सरकार (जीओएसएल) द्वारा उन्हें वीजा विस्तार दिए जाने की संभावना है। वैश्विक स्तर पर यूक्रेन को एक पीड़ित देश के तौर पर देखा जा रहा है, और उसके प्रति सहानुभूति उमड़ रही है। लेकिन जीओएसएल का कहना है कि रूस से साथ करीबी रिश्ते के बावजूद वह किसी एक का पक्ष लेने की स्थिति में नहीं है। रूस कई वजहों से श्रीलंका के लिए बेहद अहम है। सबसे बड़ा कारण तो यही है कि जब मानवाधिकारों, जवाबदेही और सुलह-सफाई के रिकॉर्ड को आधार बनाकर श्रीलंका को दंडित करने का प्रस्ताव पेश किया गया था, तब यूरोपीय देशों ने उस प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया था, जबकि रूस हमारे पीछे खड़ा था। गौरतलब है, यूक्रेन ने भी उस प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया था। 
बहरहाल, रूस-यूक्रेन मसला काफी संवेदनशील है। क्रीमिया पर रूसी कब्जे के वक्त से ही दोनों देशों में शीत युद्ध चल रहा था और देर-सबेर यह स्थिति आनी ही थी। श्रीलंका को इस वक्त कारोबारी दुनिया में अपने हितों के मुताबिक कदम उठाने की जरूरत है। उसे किसी ‘क्रॉसफायर’ में फंसने से बचना चाहिए।