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मानवता के हक में

यूक्रेन का एक वीडियो खूब वायरल हुआ है, जिसमें एक ट्रेन में विभिन्न देशों से वहां पढ़ने आए छात्रों को वॉलंटीयरों द्वारा भोजन देते हुए दिखाया गया है। ये छात्र पोलिश सीमा तक पहुंचने की कोशिश कर रहे थे।...

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 द क्रिश्चियन साइंस मॉनिटर, अमेरिका Thu, 03 Mar 2022 11:32 PM

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यूक्रेन का एक वीडियो खूब वायरल हुआ है, जिसमें एक ट्रेन में विभिन्न देशों से वहां पढ़ने आए छात्रों को वॉलंटीयरों द्वारा भोजन देते हुए दिखाया गया है। ये छात्र पोलिश सीमा तक पहुंचने की कोशिश कर रहे थे। 24 फरवरी को यूक्रेन पर रूसी हमले के वक्त 155 देशों के करीब 76 हजार छात्र वहां फंसे हुए थे। करीब 10 लाख यूक्रेनी नागरिकों की तरह ये भी यूक्रेन से भाग आए हैं, क्योंकि यह फौजों के टकराव या एक आजाद देश के संरक्षण से कहीं आगे का युद्ध हो चला है। 
गैर-यूक्रेनी शरणार्थियों के प्रति उदारता का यह कार्य हमें याद दिलाता है कि इतने सारे देश इस युद्ध का क्यों विरोध कर रहे हैं? दरअसल, व्यक्तिगत अधिकार जैसे कुछ मूल्य दुनिया भर में मान्य हैं और हरेक जगह वे सिद्धांतों को व्यावहारिक रूप देते हैं। ये मूल्य किसी विशिष्ट संस्कृति या ‘सभ्यता’ से बंधे हुए नहीं हैं। दूसरी तरफ, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन कहते हैं कि ‘रूस न सिर्फ एक देश है, बल्कि एक विशिष्ट सभ्यता है।’जैसे-जैसे यह युद्ध गहराता जा रहा है, यूरोपीय संघ यूक्रेन के बेगुनाह नागरिकों की हर मुमकिन मदद में जुट गया है, जो भागकर पोलैंड, हंगरी, स्लोवाकिया, मोल्डोवा और रोमानिया जैसे पड़ोसी मुल्कों में आ रहे हैं। जैसे, मिस्र के 175 छात्र भागकर रोमानिया पहुंचे थे। उन्हें वहां से हवाई मार्ग से काहिरा पहुंचाया गया। इसी तरह, मोल्डोविया ने करीब 1,000 चीनी छात्रों को निकलने में मदद की, पोलैंड की पुलिस ने करीब 150 जांबियाई छात्रों को वारसा हवाई अड्डे तक पहुंचने में मदद की। अमेरिका में टेक्सास स्थित एक गैर-लाभकारी संगठन ‘सेवा इंटरनेशनल’ ने यूक्रेन में फंसे दुनिया भर के छात्रों को वहां से निकलने के लिए एक हेल्पलाइन की शुरुआत की है। यूरोपीय आयोग की मुखिया वॉन डेर लेयेन के मुताबिक, जो लोग अब भी यूक्रेन में रुककर रूसी सेना का मुकाबला कर रहे हैं, ‘वे वैश्विक मूल्यों के लिए भी लड़ रहे हैं और उन मूल्यों के लिए मरने तक को तैयार हैं।’ ऐसे में, पोलैंड जाने वाली ट्रेनों के हताश छात्रों की तरह संकट में फंसे अजनबियों को भोजन कराने से ज्यादा सार्वभौमिक कार्य कुछ भी नहीं है।