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सुरक्षित हो विदेशी नौकरी 

नेपाल ने अब तक ऐसे नौ देशों के साथ द्विपक्षीय समझौते या सहमति-पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं, जहां श्रमिकों की बहुत मांग है। इनमें से ज्यादातर खाड़ी के देश हैं। इजरायल और जॉर्डन के समझौते को छोड़कर...

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 द हिमालयन टाइम्स, नेपाल Wed, 02 Mar 2022 11:56 PM

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नेपाल ने अब तक ऐसे नौ देशों के साथ द्विपक्षीय समझौते या सहमति-पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं, जहां श्रमिकों की बहुत मांग है। इनमें से ज्यादातर खाड़ी के देश हैं। इजरायल और जॉर्डन के समझौते को छोड़कर बाकी सात देशों के साथ सिर्फ सहमति-पत्र पर दस्तखत हुआ था। सहमति-पत्र यह सुनिश्चित करने में नाकाम रहा कि जिस भी देश में नेपाली नागरिक श्रमिक बनकर जाएंगे, उनके साथ मजदूरी व अन्य सुविधाओं के मामले में मेजबान देश के नागरिक सरीखा व्यवहार होगा। खाड़ी के देशों के साथ हुए ‘एमओयू’ प्रवासी कामगारों की समस्याओं का समाधान करने में अक्सर विफल हो जाते हैं। इसलिए, यह जरूरी है कि सरकार विदेशी धरती पर रोजगार के लिए द्विपक्षीय समझौते का एक मानक ढांचा तैयार करे, ताकि नेपाली श्रमिकों के काम को सुरक्षित, सम्मानजनक और व्यवस्थित बनाया जा सके। जिन द्विपक्षीय समझौतों पर नेपाल ने दस्तखत किए हैं, उनमें जॉर्डन के साथ हुआ समझौता अच्छी शर्तों के लिहाज से अनुकरणीय है। लेकिन इसके जैसे प्रावधान अन्य समझौतों में शामिल नहीं किए गए। ‘पीपुल्स फोरम फॉर ह्यूमन राइट्स’ द्वारा आयोजित बैठक में श्रम विशेषज्ञों ने साफ कहा कि विदेशी रोजगार को लेकर द्विपक्षीय समझौते के मानक ढांचे के अभाव में मेजबान देशों के साथ हुए एमओयू से कई अहम तत्व गायब हैं। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नियोक्ता प्रवासी मजदूरों के यात्रा खर्च व अन्य लागत का भी भुगतान करें। यदि सरकार विदेश में रोजगार का एक मानक प्रारूप तैयार करती है, तो श्रमिकों की जरूरत वाले देशों के साथ द्विपक्षीय समझौते तक पहुंचना भी आसान होगा। विदेश जाकर काम करने वाले 64 प्रतिशत नेपाली श्रमिकों का कहना है कि पासपोर्ट या यात्रा संबंधी दूसरे दस्तावेज उनके पास नहीं रहते, यानी कोई और उनको रखता है। इससे जाहिर होता है कि वे मेजबान देश में अपने श्रम अधिकारों के बारे में बिल्कुल नहीं जानते। इसलिए सरकार द्वारा अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप एक मानक प्रारूप तैयार किया ही जाना चाहिए।