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प्रधानमंत्री का संबोधन

ऐसा लगता है कि विपक्षी दलों की लामबंदी और महंगाई की मार झेल रहे लोगों में बढ़ती हताशा के भाव को सरकार ने गंभीरता से लिया है। सोमवार शाम राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में वजीर-ए-आजम इमरान खान ने कई सारे...

प्रधानमंत्री का संबोधन
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द न्यूज, पाकिस्तान Tue, 01 Mar 2022 09:38 PM

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ऐसा लगता है कि विपक्षी दलों की लामबंदी और महंगाई की मार झेल रहे लोगों में बढ़ती हताशा के भाव को सरकार ने गंभीरता से लिया है। सोमवार शाम राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में वजीर-ए-आजम इमरान खान ने कई सारे लोक-लुभावन उपायों की घोषणा की। उनकी तकरीर की सबसे अच्छी बात थी, पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत में 10 रुपये और बिजली दरों में प्रति इकाई पांच रुपये की कटौती। यूक्रेन पर रूसी हमले के मद्देनजर दुनिया के आगे खड़ी हुई चुनौतियों का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति की एक सुंदर तस्वीर भी पेश की। बिजली दर में कमी का न सिर्फ घरेलू उपभोक्ताओं पर, बल्कि उद्योगों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। फिर वजीर-ए-आजम ने अवाम को यह भी भरोसा दिया है कि अगले बजट तक पेट्रोल और बिजली की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की जाएगी। यह सचमुच दिल और जेब, दोनों के लिए सुकूनदेह बात है। हालांकि, अभी इस बारे में कोई तफसील नहीं मिली है कि इस सिलसिले में आईएमएफ के साथ क्या बातचीत की गई है और क्या आने वाले दिनों में संगठन की मांगों को पूरा करने के लिए भारी शुल्क वसूला जाएगा? फिलहाल तो यही लगता है कि लोगों के गुस्से और उसकी वजह से विपक्ष की लामबंदी को शांत करने के लिए ये कदम उठाए गए हैं। वजीर-ए-आजम के इस दावे पर कि उनकी हुकूमत ने लाजवाब प्रदर्शन किया है, बहस की जा सकती है, लेकिन इस वक्त तो लोगों को वाकई राहत की दरकार है। कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री का भाषण विपक्ष को रोकने या अगले साल होने वाले आम चुनाव के लिए खुद को तैयार करने की कोशिश ही लगता है। हुकूमत के खिलाफ आम अवाम का गुस्सा बढ़ता जा रहा है, और लोगों को अपना बजट संतुलित करने व घर चलाने तक में दुश्वारियां पेश आ रही हैं। प्रधानमंत्री और उनकी सरकार ने भले अपने प्रति अविश्वास का जवाब बहादुरी से दिया है, लेकिन विपक्ष को भी यह संतोष है कि पिछले तीन वर्षों के मुकाबले उसने सरकार को अब तेजी से कदम उठाने के लिए मजबूर कर दिया है।