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23 जनवरी, 2021|5:01|IST

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आइए आगे बढ़ें

यह कहना कि साल 2020 हम सबके लिए सामूहिक तौर पर बेहद चुनौती भरा रहा, कमबयानी होगी। 2020 की बिल्कुल शुरुआत से कोविड-19 महामारी रोज-ब-रोज ऐसी शक्ल लेता गया कि हम उसे नजरअंदाज नहीं कर सकते थे। लोगों ने खुद को अपने घर में कैद कर लिया, और जल्द ही साफ हो गया कि यह एक ऐसा साल साबित होने जा रहा है, जैसा किसी के ख्याल में भी न होगा। यहां तक कि साल खत्म होने पर भी हम उन्हीं अहम हिदायतों के बीच खुद को पा रहे हैं- मसलन, हाथ सही से धोएं, घर के भीतर रहें, मास्क पहनें और दैहिक दूरी का पालन करें, ताकि वायरस और ज्यादा न फैलने पाए। हममें से कोई यह नहीं जानता था कि 2020 एक ऐसा साल साबित होगा, जब हमें घर से ही काम करना पडे़गा, कक्षाएं ऑनलाइन लेनी पड़ेंगी, और उन लोगों से भी एहतियातन दूरी बरतनी पड़ेगी, जिन्हें हम काफी प्यार करते हैं। बांग्लादेश में कोई अलग माहौल नहीं था। हमने हर रोज संक्रमण बढ़ते देखा, हालात को काबू में करने के लिए सरकार को लॉकडाउन लगाना पड़ा, लेकिन इसकी कीमत देश के लाखों लोगों को चुकानी पड़ी, उनसे उनकी आजीविका छिन गई।
सामान्य स्थितियों में यह बांग्लादेशियों के लिए जश्न का साल होता- 17 मार्च, 2020 को राष्ट्रपिता बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की 100वीं जयंती थी। लेकिन लोगों की सेहत व सुरक्षा को देखते हुए जलसों को काफी छोटे पैमाने पर आयोजित करना पड़ा। तमाम कोशिशों के बावजूद हममें से कई अपने प्रियजनों को बचा न सके और हमारे दिल में एक खालीपन हमेशा के लिए रह गया। लेकिन पीछे मुड़कर 2020 को देखना और उसमें भी सिर्फ दुखों व तकलीफों को देखना भी अपने आप में एक त्रासदी ही होगी। हममें से काफी सारे लोगों के लिए बीता साल एक ऐसा वर्ष रहा, जब हमने नई तकनीक सीखी और मानव संपर्क की अहमियत को शिद्दत से समझा। यह एक ऐसा साल रहा, जब हम अपने परिवार से नए सिरे से जुडे़, हमने खुद को अधिक जाना और नया कौशल सीखा। 2021 हमें एक  मौका दे रहा है कि हम चीजों को दुरुस्त करें। तो आइए आगे बढ़ें।
 

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  • Web Title:hindustan foreign media column 02 january 2021