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एक हत्यारे की मौत

दुनिया के बड़े जनसंहारक हत्यारों में से एक नुओन चेई को अपनी काया से छुटकारा मिल गया। हालांकि जहां उसकी निर्ममता के शिकार लाखों लोग असमय मौत के चंगुल में आ गए थे, वहीं नुओन की मौत खूब बड़ी उम्र 93 वर्ष में हुई। कंबोडिया में खमेर रूज शासन के दौरान कहर बरपाने वालों में एक नुओन उम्र कैद की सजा भुगत रहा था। खमेर रूज शासन में नुओन को ‘ब्रदर नंबर टू’ के रूप में जाना जाता था, जबकि पोल पोट को ‘ब्रदर नंबर वन’ कहा जाता था। मार्क्सवादी लेनिनवादी पोल पोट का शासन कंबोडिया में 1975 से 1979 तक रहा था, तब करीब 3,00,000 कंबोडियाई नागरिक मार डाले गए। पागलपन व निर्ममता के उस दौर में नुओन की हठधर्मिता और क्रूरता उसकी पहचान थी।  उस दौर में बहुत घातक नीतियों को तेजी से लागू किया गया, इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ी।

राज्य या शासन द्वारा दंडित हुए लोगों के अलावा करीब 15 लाख लोग उन वर्षों में भूख, अत्यधिक कार्य और गलत इलाज से मारे गए। कंबोडिया की करीब एक चौथाई आबादी काल के गाल में समा गई। नुओन चेई बीसवीं सदी के ज्यादातर वामपंथी नेताओं की तरह ही विशेषाधिकार प्राप्त संभ्रांत परिवार में जन्मा था। 1950 के दशक में वामपंथी हलकों में सक्रिय हुआ। अपने रिश्तेदार पोल पोट के साथ गठबंधन किया। पोल पोट ने 1975 में कंबोडिया की सत्ता पर जब कब्जा किया, तब नुओन उसका सेकंड मैन और मुख्य विचारक बनकर उभरा।

खैर, खमेर रूज शासन के पतन के बाद नुओन अन्य वरिष्ठ नेताओं की तरह ही थाईलैंड भाग गया था। दशकों बाद 2007 में उसकी गिरफ्तारी हुई, संयुक्त राष्ट्र समर्थित न्यायाधिकरण में मुकदमा चला। वर्ष 2018 में ही उसे दोषी ठहराया जा सका। ध्यान देने की बात है, नुओन ने अपने अपराध पर कभी भी गंभीरता से अफसोस नहीं जताया। बार-बार यही कहा कि मेरी अपनी विचारधारा थी और मैं नहीं चाहता कि लोग खमेर शासन के नेताओं को अपराधी मानें। वह गलत वैचारिक उत्कंठा का एक उदाहरण था। उसमें दूसरों के दुख के प्रति अवहेलना का भाव था। कई लोग उसे कभी नहीं भुला पाएंगे। 

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  • Web Title:Hindustan Foreign Media 13th August