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साबित करना होगा

अनुच्छेद 370 व 35-ए को हटाने और प्रदेश को दो भागों में बांटने के निर्णय का असर केवल जम्मू-कश्मीर राज्य में ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में होगा। कई जगह तनाव की चर्चा हो रही है, लेकिन समय की मांग है कि संपूर्ण संयम बरता जाए और अमन-चैन को बरकरार रखा जाए। अभी स्थितियां अगर बिगड़ती हैं, तो इससे भारत की छवि पर असर पड़ेगा, लेकिन यह भी तय है कि अगर स्थितियां बिगड़ीं, तो इससे जम्मू-कश्मीर के लोगों को ही नुकसान होगा। भारतीय जनता पार्टी साल 2014 में जब सत्ता में नहीं आई थी, तब भी उसका एक मुख्य लक्ष्य था, जम्मू-कश्मीर को प्राप्त विशेष दर्जे को समाप्त करना। यह निर्णय लेने में समय लगा और जब भाजपा विगत मई महीने में ज्यादा मजबूत बहुमत के साथ सत्ता में लौटी, तो उसने दृढ़ता दिखाते हुए अपना निर्णय ले लिया। हालांकि यह प्रश्न भी पूछा जा रहा है कि जम्मू-कश्मीर के लोगों से परामर्श क्यों नहीं किया गया? वैसे भारत सरकार का यह कदम कितना सही है, इस पर भारत में ही विधि संबंधी प्रश्न उठाए जा रहे हैं।

इस बडे़ निर्णय के साथ ही भाजपा अपने मकसद में सफल होने की लंबी प्रक्रिया में लग गई है, लेकिन वह राजनीतिक, सामाजिक, कानूनी, सांविधानिक और द्विपक्षीय निहितार्थों को नजरंदाज नहीं कर सकती। इस मामले के विभिन्न पक्षों को समझना और उनसे जूझना, संतुलन बनाना भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण होगा। भाजपा अगर सचमुच यह विश्वास करती है कि अनुच्छेद 370 को हटाना सभी भारतीयों की एकता को बढ़ाएगा और अगर यह भी मानती है कि वह भारत के लोगों की आकांक्षाओं के अनुरूप ही ऐसा कर रही है, तो उसे यह साबित करने के लिए खूब प्रयास करने पड़ेंगे। भारत सरकार को जम्मू-कश्मीर में स्थाई शांति और संपन्नता लाकर वहां के लोगों के विश्वास को बढ़ाना होगा। वहां के लोगों की असीम उम्मीदों पर खरा उतरना होगा। विश्वास की बहाली जरूरी है। एक बेहतर कल के लिए यह भी सुनिश्चित करना होगा कि दशकों से चली आ रही हिंसा की रक्त-रंजित दुखद गाथा अब बीती हुई बात है। 

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  • Web Title:Hindustan Foreign Media 12th August