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खुद उपजाएं अपना अनाज

दुबई नगर पालिका ने साल 2015 में जिस ‘ग्रो योर फूड’ (अपना खाद्यान्न खुद उपजाएं) अभियान की शुरुआत की थी, उसमें काफी लोग शामिल होते जा रहे हैं। यह अभियान इस मकसद के साथ शुरू किया गया था कि लोग खाद्यान्न उपजाने के लिए उत्साहित होंगे, क्योंकि अमीरात अपनी खाद्यान्न जरूरतों का 90 फीसदी से अधिक आयात करता है। इस मुहिम को पर्याप्त समर्थन मिलना उल्लेखनीय है। इसके तहत स्थानीय नागरिकों, शिक्षण संस्थानों, सरकारी व गैर-सरकारी कंपनियों और ‘पीपुल ऑफ डिटरमिनेशन’ सेंटर्स के बीच प्रतियोगिता भी चलाई जाती है। प्रतिभागियों की संख्या अब 150 से बढ़कर 1,600 हो गई है। निजी स्कूलों की संख्या भी 20 से बढ़कर 55 और सरकारी स्कूलों की दो से बढ़कर 10 हो गई है। इसमें विजेताओं के चयन का आधार रचनात्मक तरीके से जगह का इस्तेमाल, उत्पादन के स्वस्थ तरीके, जल का बेहतर उपयोग, किस्म-किस्म की पैदावार, टीम वर्क, योजना व सफाई जैसे मानदंड होते हैं। यह सुखद है कि प्रतिभागियों ने उत्साह के साथ अपने बगीचे को संवारा है। मगर सबसे खास बात यह है कि इसके तहत एक बड़े मसले पर गौर किया गया है। असल में, हमारे आस-पास जिस तरह ग्लोबल वार्मिंग का खतरा गहराता जा रहा है, उसमें पर्यावरणविदों का कहना है कि जल्दी ही इसकी मार खाद्यान्न उत्पादन पर पड़ने वाली है। ऐसे में, वे लोग पृथ्वी बचाने का बड़ा संदेश दे रहे हैं, जो इस अभियान से आत्मनिर्भर हो गए हैं। उन्होंने न सिर्फ कचरा प्रबंधन पर ध्यान दिया है, बल्कि खेती के उनके तरीके भी पर्यावरण-हितैषी हैं। एक बात और। दुनिया भर में ‘ऑर्गेनिक फूड’ की तरफ रुझान बढ़ता जा रहा है, क्योंकि यह माना जाता है कि खेतों में कीटनाशकों का इस्तेमाल लोगों का स्वास्थ्य बिगाड़ रहा है। चूंकि बड़े पैमाने पर ‘ऑर्गेनिक फूड’ का उत्पादन एक महंगी प्रक्रिया है, लिहाजा घरेलू खेती हमारी ख्वाहिश पूरी कर सकती है। साथ-साथ यह हमारे पर्यावरण को भी बेहतर बनाती है। ‘होम फार्मिंग’ तनाव कम करने और स्वयं को शांत-स्थिर रखने में भी सहायक मानी जाती है, जिसकी जरूरत आज के दौर में खूब है।   

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  • Web Title:Gulf news United Arab Emirates article in Hindustan Hindi News paper 21st Aug