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ट्रंप के लिए कानून का मतलब

शायद अब कुछ लोगों को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इरादे समझ में आएं और अपने ही न्याय विभाग खासकर अटॉर्नी जनरल जेफ सेशन्स के खिलाफ उनका अभियान भी वे देख सकें। यह तो बहुत पहले ही साफ हो गया था कि ट्रंप की नजर में संघीय कानून का मतलब तभी तक है, जब तक यह उनके या उनकी पार्टी के हितों से नहीं टकराता है। ट्रंप के ताजा ट्वीट ने तो उनकी मंशा का खुला इजहार ही कर दिया, जब वह जेफ पर सीधे हमलावर हो गए। यह पद की गरिमा नीचे गिराने का नया पैमाना है और शासन के प्रति उनके बेशर्म रुख का खुला बयान भी। ट्रंप ने यह भी नहीं देखा कि दोनों सांसदों पर कितने गंभीर आरोप हैं और वह उनके पक्ष में खड़े हो गए। उन्हें सिर्फ दोनों की लोकप्रियता दिखी, कि अगर जेफ ने मुंह बंद रखा होता, तो दोनों नवंबर का चुनाव आसानी से जीत जाते। दोनों सांसदों पर आर्थिक मामलों में गंभीर हेराफेरी के साथ तमाम अन्य आरोप हैं। हालांकि इन दोनों ने खुद को निर्दोष बताया है। ये दोनों मामले राष्ट्रपति की व्यक्तिगत प्रतिच्छाया लगते हैं। कॉलिंस ट्रंप की उम्मीदवारी का समर्थन करने वाले पहले कांग्रेसी सदस्य थे और हंटर दूसरे। एक ऐसा राष्ट्रपति, जिसके लिए ‘अंधभक्ति’ ही सब कुछ हो, उसके लिए ऐसे दो समर्पित ‘भक्तों’ को खो देने की चिंता स्वाभाविक ही है। उनकी यह बेचैनी समझी जा सकती है। 

ट्रंप की नजर से देखें, तो सेशन्स ने कानून की रक्षा में अपना सब कुछ एक बार फिर दांव पर लगा दिया है। ट्रंप तो बार-बार अपनी हरकतों से जाहिर करते रहे हैं कि सेशन्स के बारे में पहले से जानते, तो वह उन्हें कभी भी इस पद पर न आने देते। दरअसल, ट्रंप की दिक्कत जेफ सेशन्स या न्याय विभाग नहीं है। उन्हें कानून से ही समस्या है- कम से कम इस बात से तो जरूर ही है कि यह उन पर या उनके भक्तों पर न लागू हो। रिपब्लिकन, खासकर रिपब्लिकन सांसद उनके इस दर्द में मौन सहयात्री हैं। ट्रंप और उनके भक्त शायद भूल जाते हैं कि अटॉर्नी जनरल उनके नहीं, अमेरिका के ‘वकील’ हैं। 

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  • Web Title:America New York Times article in Hindustan on 06 september