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ट्रंप की अव्यावहारिक बात

लगभग 25 वर्ष पुराने उत्तर-अमेरिकी मुक्त व्यापार समझौते (नाफ्टा) पर पुनर्विचार करना होगा। समय के साथ इतना कुछ बदला है कि अब इसे भी नई प्रौद्योगिकी के अनुरूप ढालने, बौद्धिक संपदा अधिकारों को अद्यतन करने के साथ ही अमेरिकी उद्योगों व श्रमिकों को अनुचित प्रतिस्पद्र्धा से बचाए रखने के लिए नया रूप देने की जरूरत है। लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तो नाफ्टा को कुछ इस तरह बदलने का प्रस्ताव रखा है, जो इसे और बदतर बनाकर अमेरिकी श्रमिक हितों को नुकसान पहुंचाएगा। यह अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए कीमतें बढ़ाने वाला और पड़ोसियों को नाराज करने वाला साबित होगा। ट्रंप के अनुसार, कनाडा मित्रवत पड़ोसी नहीं, बल्कि हमारे इस्पात, ऑटोमोबाइल और डेयरी उद्योगों के लिए घातक बना हुआ है। उनकी नजर में मेक्सिको भी कई तरह से नुकसान पहुंचा रहा है। हालांकि इस सबसे बचने के लिए वे जो विकल्प देते हैं, वे समाधान तो नहीं ही देने वाले, जटिलताएं जरूर बढ़ा देंगे। पिछले हफ्ते मेक्सिको के साथ नाफ्टा समझौते को लेकर उन्होंने अपने अजीबो-गरीब इरादों की घोषणा की। दरअसल, इसके पीछे मेक्सिको की ऑटो इंडस्ट्री और कनाडा के डेयरी उद्योग को लेकर ट्रंप के अपने कुछ पूर्वाग्रह हैं। उनकी कुछ अपेक्षाएं हैं, जो न मेक्सिको के गले उतरने वाली, न कनाडा के। उनका नजरिया दोनों को अपने हितों को नुकसान पहुंचाने वाला लगता है। सच है कि उनके कदमों से पड़ोस ही नहीं, अमेरिका के घरेलू बाजार भी प्रभावित हुए हैं। इधर से एक एक्शन हुआ, तो उधर से दोहरी प्रतिक्रिया मिली है। इस व्यापार युद्ध का सबसे ज्यादा नुकसान अमेरिकी किसानों ने झेला है और इन हालात में उनके लिए आगे भी बहुत उम्मीद नहीं दिखती। हालांकि द्विपक्षीय व्यापार समझौते में कृषि पर यथास्थिति बनाए रखने की बात है, लेकिन मेक्सिको ने इस बीच खेती के कई अन्य स्रोत विकसित कर लिए हैं। फिलहाल बदले हुए हालात में यही कहा जा सकता है कि राष्ट्रपति के ताजा प्रयास सिर्फ अमेरिकी श्रमिकों के खिलाफ साबित होंगे, उनका भला नहीं करने वाले।

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  • Web Title:America New York Times article in Hindustan on 04 september