तिरछी नज़र खबरें

sudhish pachouri

जो आजाद, वही साहित्य में आबाद

वह कुछ देर ‘इधर’ के हो लेते हैं, तो कुछ देर ‘उधर’ के हो लेते हैं। वह कुछ इधर से ले लेते हैं, तो कुछ उधर से भी ले लेते हैं और इसी तरह साहित्य में अपनी जगह और जरूरत बनाए रखते हैं। लेकिन, ऐसा यूं ही...

Sat, 06 Jul 2024 10:27 PM
sudhish pachouri

जहां रस ही नहीं, वहां रसिक कहां

अब न कोई सुनता है और न सुनना चाहता है, सब कहना-बोलना चाहते हैं। आज बोलने वाले अधिक हैं और श्रोता कम। कवि हो या वक्ता, सबकी परेशानी यही है कि अब न कोई किसी की कविता सुनता है, न किसी वक्ता को सुनने...

Sat, 29 Jun 2024 09:03 PM
sudhish pachouri

डॉक्टर से डाक्साब तक हिंदी साहित्य

एक सेमिनार हो रहा है। उसके मुख्य वक्ताओं के नामों के आगे ‘डॉ’ लगा है, अध्यक्ष के आगे ‘डॉ’ लगा है, मुख्य अतिथि के आगे ‘डॉ’ लगा है। बहस में भाग लेने वाले पांच के पांच ‘डॉ’ हैं। ये आठों ‘डॉ’ तीन-चार...

Sat, 22 Jun 2024 08:45 PM
sudhish pauchouri

हर कवि को एक खलनायक चाहिए

चार जून को मेरा जनतंत्र बच गया, संविधान बच गया, समाज बच गया, मेरा लेखक बच गया, लेखन बच गया और आजादी भी बच गई। मैं बच गया। तू बच गया। मेरी-तेरी कलम बच गई। मेरा-तेरा लिखना बच गया। मेरा विचार बच गया...

Sat, 08 Jun 2024 08:55 PM
sudhish pachouri

इन लेखकों को किस नाम से पुकारूं

सोशल मीडिया पर दिन-रात कुछ न कुछ लिखने वाले आज के लेखकों को मैं किस नाम से पुकारूं? उनको क्या नाम दूं कि सबका नाम बन जाए? आप भी मानेंगे कि यह मेरी ही नहीं, बल्कि आज की आलोचना मात्र की समस्या है और ...

Sat, 25 May 2024 10:06 PM
sudhish pachouri

हिंदी साहित्य के गैंगस्टर और गैंगरीन

जून की 4 तारीख आ रही है और मेरे प्राण सूली पर अटके हैं। मुझे अपने से अधिक मित्र लेखकों की चिंता खाए जा रही है। एक से एक प्रतिभाशाली हैं। जितने प्रतिभाशाली हैं, उससे भी अधिक सौभाग्यशाली हैं। पर्याप्त..

Sat, 18 May 2024 09:49 PM
sudhish pachouri

दुपट्टे के लिए लालायित लेखक

इन दिनों मैं बेहद हताश, निराश और उदास हूं। सभी सियासी दल सबको पूछ रहे हैं। ऐसों-ऐसों को पूछ रहे हैं, जिनको कोई नहीं पूछता। सबके घोषणापत्र गारंटी दे रहे हैं कि अगर हमें जिताया, तो ‘इंडिया’ को...

Sat, 11 May 2024 08:43 PM
sudhish pachouri

अपने-अपने कठघरे के कैदी

दिल्ली में एक राष्ट्रीय सेमिनार चल रहा है : सुबह के भाषण-भूषण हो चुके हैं, लंच टाइम हुआ है। एक से एक नामी साहित्यकार, बुद्धिजीवी, एक्टिविस्ट लाइन से अपनी-अपनी प्लेट में अपने-अपने भोजन का हिस्सा...

Sat, 04 May 2024 09:12 PM
sudhish pachouri

साक्षात्कार एक आइडिया 

यहां दर्द भी एक आइडिया है और दवा भी आइडिया है, यानी सब कुछ माया है। इसलिए ‘हेट’ भी एक आइडिया है और ‘लव’ भी एक आइडिया है। गाली भी आइडिया है, ताली भी आइडिया है। इन दिनों आइडिया से आइडिया भिड़ रहा है...

Sun, 28 Apr 2024 12:57 AM
sudhish pachouri

एक साहित्यिक दिल की तलाश

समाजवाद आ रहा है। फटाफट आ रहा है। बुलेट टे्रन की स्पीड से आ रहा है और गारंटी की गारंटी के साथ आ रहा है। हिंदी साहित्य का सदियों पुराना सपना पूरा होने जा रहा है। कबीर का सपना, तुलसी-सूर का सपना...

Sat, 20 Apr 2024 09:40 PM
sudhish pachouri

आखिर किसके चरण पखारूं

किस्सा कुछ पुराना है। मेरे प्रकाशक मित्र ने एक दिन पूछा, सर आपकी नई किताब का समर्पण पेज खाली जा रहा है। किसी को समर्पित करना हो, तो बताएं? मैंने कहा, इस बार मैं किसी को भी समर्पित नहीं करने वाला...

Sat, 13 Apr 2024 08:41 PM
sudhish pachouri

विचारधारा या व्यभिचारधारा 

सुबह लोकतंत्र बचाने वाला दोपहर में तानाशाही बचा रहा था, शाम होते-होते वह भ्रष्टाचार को शिष्टाचार बनाता दिखा, रात होते-होते वाशिंग मशीन में चला गया और सुबह टिकट लेकर मुस्कराता हुआ बाहर दिखा...

Sat, 06 Apr 2024 09:38 PM
sudhish pachouri

कविता एक बड़ा सिरदर्द

एक कवि ‘मां’ को लेकर कविता में बिलख रहा है, दूसरा उसकी ‘भूरि-भूरि’ किए जा रहा है कि पढ़कर उसको अपनी मां भी याद आ गई। (तभी किसी ने टोका, जिस मां के लिए बिलख रहा है, उसका तेरी बीवी ने क्या हाल बनाया...

Sat, 30 Mar 2024 10:35 PM
sudhish pachouri

हिंदी साहित्य के सामाजिक खूंटे

साहित्य समाज को ढूंढ़ रहा है। समाज साहित्य को ढूंढ़ रहा है। लेकिन दोनों में से कोई किसी को नहीं मिल रहा। यूं साहित्य के पास सब कुछ है, छोटी कुरसी है, बड़ी कुरसी है, माला-दुशाला, पुष्पगुच्छ...

Sat, 23 Mar 2024 10:16 PM
sudhish pachouri

बस दस मिनट प्रति लेखक

जिधर देखो, उधर बस लेखक ही लेखक, लेखिका ही लेखिका, यत्र-तत्र-सर्वत्र! साहित्य अकादेमी परिसर के चप्पे-चप्पे पर लेखक। किसिम-किसिम के, हर भाषा के लेखक। नए लेखक-पुराने लेखक। ग्यारह सौ से अधिक लेखक...

Sat, 16 Mar 2024 10:49 PM
sudhish pachouri

एक कवि की आकुल कामना

काश! मैं एक ‘विश्व कविता’ कर लेता, तो यह जीवन सार्थक हो जाता। साहित्य को कुछ दे जाता, कुछ ले जाता, हिंदी कविता भी वैश्विक कविता बन जाती। विश्व के नामी कवियों संग हिंदी कविता बैठती, उठती, खाती पीती...

Sat, 09 Mar 2024 10:36 PM
sudhish pachouri

सबसे अधिक सताया हुआ लेखक 

एक सताए हुए लेखक ने कहा कि वह बहुत सताया हुआ लेखक है। दूसरा बोला, तुम क्या सताए हुए हो, सबसे ज्यादा सताया गया लेखक तो मैं हूं। तीसरा बोला- ये साले क्या सताए हुए हैं, मैं तो जन्म से ही सताया हुआ हूं...

Sat, 02 Mar 2024 11:06 PM
sudhish pachouri

हिंदी साहित्य में गैंग्स ऑफ फांसेपुर

मेले की सबसे खुफिया खबर अपने एक मित्रवत खुफिया एजेंट ने दी। फोन पर कहा- ‘सर जी, आप तो यहां थे नहीं... इस बार के मेले की सबसे बड़ी खबर साहित्य में ‘गैंग्स’ के अवतार की है।’ मैंने कहा, क्या बकवास करते...

Sat, 24 Feb 2024 10:44 PM
sudhish pachouri

मेला या लेखकों का मीना बाजार

अक्सर पढे़ बिना ही पुस्तक की विरुदावलियां गा दी जाती हैं। काजू की बरफी या असली घी के लड्डू विद चाय-कॉफी विमोचन में प्रेरक काम करते हैं। कुछ लेखक तो मोचन-विमोचन के लिए पूरे दिन मेले में पडे़ रहते...

Sat, 17 Feb 2024 09:37 PM
sudhish pachouri

हर लेखक में अब एक हिटलर 

सोशल मीडिया ने मनुष्य मात्र को लेखक, फोटोकार, वीडियोकार, ऑनलाइन कॉन्फ्रेंसकार, जूमकार, यूट्यूबर, संयोजक, प्रायोजक बना दिया है।  कोई कथावाचक हुआ जा रहा है, तो कोई स्टैंडअप कॉमेडियन। कोई ‘थिंक टैंक’...

Sat, 10 Feb 2024 09:40 PM