तिरछी नज़र

Sudheesh Pachauri

वह हिंदी लेखक क्या, जो इसके लिए लड़े

हिंदी एक बार फिर ठुकी। एक बार फिर हिंदी के लिए कोई बड़ा लेखक नहीं बोला। क्यों? क्योंकि हिंदी में जितने लेखक हैं, उनमें से अधिकांश हिंदी के ‘फेक’ लेखक हैं। असली हिंदी लेखक नहीं हैं। अगर असली लेखक...

Sat, 21 May 2022 10:43 PM
sudhish pachauri

हमेशा देर कर देता हूं मैं 

एक बार फिर मैं रह गया। एक बार फिर मौका चूक गया। अब मैं न कभी ‘महान’ बन सकूंगा और न ‘शहीद’ कहला सकूंगा। सोचता था, एक दिन मैं भी इतिहास में छलांग लगाऊंगा और वह करूंगा, जो सभी महानों ने किया.....

Sat, 14 May 2022 08:41 PM
sudhish pachauri

इम्तिहान के भूत और हनुमान चालीसा

जब से हनुमान चालीसा के ‘पाठ’ ने हलचल मचाई है, तभी से सोच रहा हूं कि अपना भी एक ‘लेखक चालीसा’ लिख डालूं और तुलसी बाबा की लाइन में शामिल हो जाऊं!.....................................

Sat, 07 May 2022 08:15 PM
sudhish pachauri

उत्तर आधुनिक भक्तिकाल की आजादी

एक बडे़ लेखक की किताब आई है। जब से आई है, तभी से परेशान हूं कि अब फिर कुछ लिखना पडे़गा, यानी उनकी ‘भूरि-भूरि’ करनी पडे़गी। लेकिन इस बार मेरा मन अटक गया है- आखिर कब तक करता रहूं मैं उनकी पूजा-अर्चना?..

Sat, 30 Apr 2022 08:59 PM
sudhish pachauri

प्रीपेड लेखन की दुकान

कैसा रचनात्मक समय है कि लेखक की जरूरत ही नहीं है। लेखक किराए पर, ऑर्डर पर उपलब्ध हैं, ‘ऑनलाइन’ उपलब्ध हैं। आपको सिर्फ ऑर्डर देना है- कवि बनें या कहानीकार बनें या समीक्षक बनें, जो चाहें सो बनें.......

Sat, 23 Apr 2022 09:03 PM
sudhish pachauri

मो सम कौन कुटिल खल कामी

इन दिनों पता ही नहीं चलता कि कौन किसके ‘ब्रूयात्’ को कब ‘अप्रिय’ मान बैठे और दुश्मनी पाल ले, और मौका मिलते ही ठिकाने लगा दे! इसी कारण कुछ भी लिखने से डरता हूं। क्या लिखूं? क्या न लिखूं?

Sat, 16 Apr 2022 09:36 PM
Sudheesh Pachauri

मेरा नाम चल रहा है ‘उसके लिए’

यह दूसरी बार था, जब उन्होंने खुद बताया कि उनका नाम चल रहा है और जरा खुलकर बताया कि हां, मेरा नाम चल रहा है। पहली बार जब बताया था, तब उससे पहले अखबार में उनके नाम के चलने की खबर आ चुकी थी, और उस खबर का

Sat, 09 Apr 2022 10:14 PM
Sudheesh Pachauri

मेरा नाम चल रहा है ‘उसके लिए’

जब उन्होंने खुद बताया कि उनका नाम चल रहा है और जरा खुलकर बताया कि हां, मेरा नाम चल रहा है। पहली बार जब बताया था, तब उससे पहले अखबार में उनके नाम के चलने की खबर आ चुकी थी, और उस खबर का असर ऐसा था कि उस

Sat, 09 Apr 2022 10:08 PM
Sudheesh Pachauri

मैं तुझे कुबूल तू मुझे कुबूल

हिंदी का हरेक लेखक अपना मूल्यांकन कराने के लिए तड़पता रहता है कि कोई आए और उसकी प्रतिभा को समझे, उसका  मूल्यांकन करे, मूल्यांकन यानी ‘सही मूल्यांकन’, यानी वैसा मूल्यांकन जैसा वह चाहता है।

Sat, 02 Apr 2022 09:34 PM
sudhish pachauri

तुम्हीं से मुहब्बत तुम्हीं से लड़ाई

हिंदी भी बड़ी ‘मिथकीय’ भाषा है। यहां सब अपने-अपने ‘मिथकों’ में रहते हैं। लेखक प्रकाशक के मिथक में रहता है, प्रकाशक लेखक के मिथक में रहता है। पहले दोनों में ‘बनती’

Sat, 26 Mar 2022 11:16 PM
Sudheesh Pachauri

वीर बालकों का यह युग

नया लेखक वीर प्रवृत्ति का है। वह पहले किसी को ठोकता है, फिर बोलता है, मैं उसे ठोक रहा हूं और तुम चुप हो? क्यों? क्योंकि तुम कायर हो, सत्ता के गुलाम हो, ताकतवर से डरते हो, पर मैं नहीं डरता। मैं आज के...

Sat, 19 Mar 2022 09:32 PM
Sudheesh Pachauri

मेरे रोने का हो गया इंतजाम

हाय! एक बार फिर मेरे कीमती हस्ताक्षर काम न आए। कितना सोच-विचार करने के बाद, कितने चिंतन-मनन के बाद मित्रों के हस्ताक्षर अभियान में शामिल हुआ था और किस उछाह के साथ मैंने हस्ताक्षर किए थे! सोचता था,...

Sat, 12 Mar 2022 08:44 PM
Sudheesh Pachauri

साहित्य का बंसी बजैया रास रचैया 

एक लेखक ऑटो से जा रहा है, दूसरा अपनी नैनो को दौड़ा रहा है, तीसरा मेट्रो से पहुंच रहा है, चौथा बस में लटककर जा रहा है, और ये सभी दिल्ली की दक्खिनी दिशा में जाते दिखते हैं। लेखकों का ऐसा उल्लास देख मेरा...

Sat, 05 Mar 2022 09:01 PM
Sudheesh Pachauri

हमारा प्यारा साहित्यिक साम्राज्यवाद

किसे साम्राज्यवादी कहूं, किसकी निंदा करूं? किसे मुर्दाबाद कहूं, किसे जिंदाबाद, समझ नहीं आ रहा है। कवि हूं, कहानीकार हूं, आलोचक हूं, यानी ‘थ्री इन वन’ हूं- जब राजनीति ‘अंधेरे...

Sat, 26 Feb 2022 09:39 PM
Sudheesh Pachauri

उठने में गिरने का आनंद

मित्रो, न यह शिवशंभु का चिट्ठा है, न परसाई जी का कोई व्यंग्य कि पढ़ूं और आनंद लूं, और न मैं किसी चंडू खाने में हूं कि हर बात पर हंसने लगूं, लेकिन मेरी हंसी है कि रुकती ही नहीं। विचारों की ऐसी तेज...

Sat, 19 Feb 2022 09:47 PM
Sudheesh Pachauri

सुबरन को खोजत फिरत कवि, व्यभिचारी, चोर

जब-जब अपने वाट्सएप पर ‘कविता समय’ टाइप निमंत्रण देखता हूं, तो झटका सा लगता है। कहीं कविता का ‘समय’ तो नहीं आ गया? कहीं उसकी चला-चली की बेला तो नहीं आ गई? हो सकता है, दवाएं असर...

Sat, 12 Feb 2022 08:53 PM
Sudheesh Pachauri

हिंदी साहित्य का इंडिया गेट

मान न मान, मैं तेरा मेहमान। अभी मान, मुझे महान। न मानेगा महान, तो तेरा हुक्का-पानी बंद। तेरी ऐसी की तैसी। तेरे से हलो-हाय बंद। तेरे से बातचीत बंद। तेरा अकाउंट ब्लॉक्ड। या तो मुझे महान बना, नहीं तो...

Sat, 05 Feb 2022 08:55 PM
sudhish pachauri

कोई कुछ दे, तो सादर स्वीकारें

मुझे कोई देता, तो क्या लौटाता? क्या ऐसी बचकानी खबर बनाता? और, क्या इतनी देर तक चर्चा करवाता? हरगिज नहीं! मैं कभी न लौटाता। कारण कि एक तो आजकल ‘दाता’ नहीं बचे, और ‘पाता’ भी इस...

Sat, 29 Jan 2022 09:22 PM
Sudheesh Pachauri

अखिल भारतीय साहित्यकार मोर्चा

सब लड़ रहे हैं, तो लेखक क्यों न लड़े! जब से लड़की हूं, लड़ सकती हूं जैसी नारीवादी काव्य पंक्ति राजनीति में आई है, तभी से सोच रहा हूं कि जब एक काव्यात्मक पंक्ति राजनीति को बदलने का दावा कर सकती है, तब...

Sat, 22 Jan 2022 08:54 PM
Sudheesh Pachauri

साहित्य का स्टॉक एक्सचेंज

अच्छे साहित्यकार अपने हानि-लाभ का हिसाब रखते हैं। क्या लिखने से क्या कुछ मिलेगा? क्या लिखने से कौन खुश होगा? कौन सी लाइन लेने से मेरा इष्ट मुझे मिल जाएगा? कई तो कैलकूलेट करके चलते हैं कि भविष्य का...

Sat, 15 Jan 2022 09:27 PM