DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

पार्टी जिसने राजनीति बदल दी

स्मृति इरानी  केंद्रीय सूचना व प्रसारण मंत्री, भारत सरकार

भारतीय जनता पार्टी अपनी स्थापना के 38 वर्ष पूरे कर रही है। इस विशाल और विराट यात्रा में इसने लोकतंत्र को पुष्ट ही नहीं किया, देश में राजनीतिक, सामाजिक व सांस्कृतिक चेतना का मानस भी समृद्ध किया। इसने ‘सबसे पहले राष्ट्र’ के विचार, भारत माता की संप्रभुता, अक्षुण्ण लोकतंत्र और अंतिम व्यक्ति तक की खुशहाली का मूल विचार कभी डिगने नहीं दिया। यही कारण है कि कई उतार-चढ़ाव के बाद भी सिद्धांत व विचारधारा के प्रति दृढ़ आग्रह का यह कारवां निरंतर आगे बढ़ रहा है। 

भाजपा ने सही मायनों में इस अवधारणा को स्थापित किया कि राजनीतिक दल का मूल उद्देश्य स्वस्थ लोकतंत्र का निर्माण और आम व्यक्ति के जीवन-स्तर का उत्थान करना है, जबकि अन्य दलों ने इसका अर्थ सिर्फ सरकार बनाने-बिगाड़ने, राज करने व निजी हित साधने तक सीमित कर दिया था। भाजपा ने देश को विकल्प की राजनीति देने के साथ ही वंचित, शोषित और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को अंत्योदय के सिद्धांत के साथ अपने चिंतन में प्रमुखता दी। 

बीसवीं सदी के अंत में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में एक विराट गठबंधन सरकार के निर्माण ने देश को नई विचारधारा, नई दिशा और समान उद्देश्यों की सहमति के साथ पिरोने का काम किया था। उनका कार्यकाल राजनीतिक दलों, नदियों, सड़कों, वायु मार्गों, विदेशी संबंधों को जोड़ने वाला तो था ही, व्यक्ति को सरकारी योजनाओं से सही मायनों में जोड़ने और सरकार के आम व्यक्ति से जुड़ने का युग भी था। देश ने आजादी के बाद पहली बार जनता की सरकार का संदेश और स्पंदन महसूस किया था। 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने पूर्ण बहुमत और अपने वैचारिक साथियों के गठबंधन के साथ विराट जीत दर्ज की और सरकार बनाने के साथ ही सभी संकल्पों, उद्देश्यों और चिंतन को मूर्त रूप देना प्रारंभ किया। जनसंघ के रूप में शुरू हुई भाजपा आज 11 करोड़ से अधिक सदस्यों के साथ विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है, जिसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व क्षमता व राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की संगठन क्षमता को संयुक्त रूप से है। 

नरेंद्र मोदी सरकार की लोक-कल्याण नीतियों, खासकर जन-धन योजना, जन-सुरक्षा योजना, फसल बीमा योजना, मुद्रा योजना, स्वास्थ्य बीमा, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, स्वच्छता अभियान (शौचालय निर्माण), पंडित दीनदयाल ग्राम विद्युतीकरण योजना सहित ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान को विकास की दौड़ में पीछे छूट गए समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया गया, ताकि देश का गरीब से गरीब व्यक्ति भी इन योजनाओं से लाभान्वित हो सके । आजादी के 70 साल बाद तक कोई सरकार किसानों को उसकी लागत मूल्य का डेढ़ गुना समर्थन मूल्य देने का निर्णय लेने का साहस नहीं दिखा पाई, पर यह प्रधानमंत्री मोदी की सोच थी कि इस बार के बजट में किसानों को उपज के लागत मूल्य का डेढ़़ गुना समर्थन मूल्य देने का फैसला हुआ।

स्थापना के बाद मुंबई में आयोजित पार्टी के पहले राष्ट्रीय अधिवेशन में संस्थापक अध्यक्ष अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था- ‘भारत को मंडित करने वाले महासागर के किनारे खड़े होकर मैं यह भविष्यवाणी करने का साहस करता हूं कि अंधेरा छंटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा।’ उनका देखा हुआ स्वप्न यूं मूर्त रूप लेगा, इसकी कल्पना कभी किसी राजनीतिक पंडित ने शायद ही की हो। पर यह कल्पना साकार हो चुकी है। 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद हुए लगभग सभी चुनावों में भाजपा को ऐतिहासिक जनादेश मिला। कच्छ से कामरूप तक और कश्मीर से कन्याकुमारी तक भाजपा का परचम लहरा रहा है। आज 21 राज्यों में भाजपा व सहयोगी दलों की सरकारें हैं। शासन-सत्ता के दृष्टिकोण से इंदिरा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस का शासन अगर 19 राज्यों में था, तो यह रिकॉर्ड भी भाजपा के वर्तमान नेतृत्व ने पार्टी के नाम अंकित कर दिया है।

2014 के आम चुनाव में पार्टी ने अकेले दम पर 282 लोकसभा सीटों पर विजय हासिल की। 31 प्रतिशत से अधिक मत पार्टी ने प्राप्त किए। राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन की बात करें, तो एनडीए के रूप में 38 प्रतिशत से अधिक जनता का समर्थन आम चुनाव में भाजपा को मिला और लोकसभा में गठबंधन के प्रतिनिधियों की संख्या 340 तक पहुंच गई। आज देश के हर प्रांत, हर जिले, तहसील, विकास खंड, ग्राम और बूथ स्तर तक भाजपा अपना आधार मजबूत बना चुकी है। पार्टी की इन महान उपलब्धियों के बीच हमें जहां कार्यकर्ताओं और जनता के बीच जागरूक रहकर सरकार की उपलब्धियों के लिए सतत संपर्क और संवाद बनाए रखने की आवश्यकता है, तो उस मूलभूत विचार प्रवाह को भी निरतंर प्रज्जवलित रखना है, जिसके कारण यह महान यात्रा संभव हो सकी है।

कई सरकारें 50 सालों में एक-दो कार्य ऐसे करती हैं, जो इतिहास बनते हैं, मगर मोदी सरकार ने तीन सालों में ही 50 ऐसे काम किए हैं, जो ऐतिहासिक हैं। 1951 से लेकर अब तक हमारे सभी जन-आंदोलन राष्ट्र की एकता, अखंडता व संस्कृति की रक्षा के लिए ही समर्पित रहे हैं, चाहे वह गौ-हत्या पर प्रतिबंध का आंदोलन हो, गोवा मुक्ति संग्राम, कच्छ का सत्याग्रह, हैदराबाद का आंदोलन, कश्मीर से कन्याकुमारी तक की यात्रा, राम जन्मभूमि का आंदोलन हो या फिर भ्रष्टाचार के खिलाफ चेतना यात्रा। भाजपा की तीन पीढ़ियों ने इस विचारधारा की रक्षा के लिए बलिदान दिए हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का मानना है कि जब पार्टी सत्ता में हो, तो हमें सत्ता को साधन बनाते हुए हर गरीब के घर में दीया जलाने का प्रयास करना चाहिए, जबकि संगठन का काम सरकार व जनता की भलाई के बीच कड़ी बनना है। भाजपा ने हमेशा देश को सर्वोपरि रखा है, भारत को विश्वगुरु बनाने का सपना देखा है और ‘सबका साथ-सबका विकास’ का लक्ष्य तय किया है। सर्जिकल स्ट्राइक, नोटबंदी, जीएसटी व काले-धन पर प्रहार का अभियान ‘गेम चेंजर’ साबित हुए। प्रधानमंत्री बार-बार कहते आए हैं कि लोगों को अच्छे लगने वाले फैसलों की बजाय लोगों के लिए अच्छे फैसले लिए जाने चाहिए। सरकार ऐसे ही फैसले ले रही है।

(ये लेखिका के अपने विचार हैं)

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Opinion Hindustan column on 6 april