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26 फरवरी, 2020|11:55|IST

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एक नए वायरस का खतरा और हम

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पिछले तीन हफ्तों में एक नए वायरस कोरोना के संक्रमण ने विश्व स्वास्थ्य संगठन सहित कई देशों के लिए आपातकालीन स्थिति पैदा कर दी है। चीन से शुरू हुआ यह संक्रमण अब अमेरिका जैसे कई देशों में अपने पांव पसार चुका है। हमें भी सतर्क होने की जरूरत है, क्योंकि भारतीय लगातार चीन की यात्रा करते रहते हैं। देश के करीब 1,200 मेडिकल छात्र अभी चीन में पढ़ाई कर रहे हैं, जिनमें से ज्यादातर वुहान प्रांत में ही हैं। ऐसे में, अगर वे वहां से लौटते हैं, तो इस वायरस के भारत आने की आशंका बहुत बढ़ जाएगी। 
अच्छी बात यह है कि केंद्र सरकार इसके प्रसार को रोकने के लिए सक्रिय हो गई है। मगर भारत में ऐसी ड्रॉपलेट बीमारियों (एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलने वाला संक्रमण) के इलाज-प्रबंधन की स्थिति का अंदाजा हम प्रतिवर्ष संक्रामक रोगों से होने वाली मौत के आंकड़ों से लगा सकते हैं। हर साल अपने यहां ऐसे रोगों से बच्चों के मरने की खबर आती ही रहती है। शहरों में तो स्वास्थ्य ढांचा कुछ हद तक ठीक भी है, लेकिन गांवों में स्थिति बहुत खराब है। वहां न तो हमारे पास विशेषज्ञ डॉक्टर हैं और न पर्याप्त दवाइयां। ऐसे में, नए तरह के वायरल संक्रमण के इलाज के लिए नजदीकी शहरों में जाना ही एकमात्र विकल्प होता है, जिसमें मरीज के समय व धन, दोनों की हानि होती है। 
अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं और इलाज देने के मामले में भारत ब्रिक्स देशों में सबसे अधिक दयनीय स्थिति में है। मेडिकल जर्नल लैंसेट  के 137 देशों पर किए गए एक सर्वे के मुताबिक, भारत में खराब इलाज के कारण हर साल मरने वालों की संख्या लगभग 27 लाख है। चार वर्ष पहले यह आंकड़ा 16 लाख था। इस सूची में भारत अपने पड़ोसी देशों- चीन, बांग्लादेश, श्रीलंका और भूटान से भी पीछे है। जाहिर है, विभिन्न प्रयासों के बावजूद देश में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर नहीं हो सकी हैं, लिहाजा कोरोना वायरस जैसा संक्रमण यदि यहां फैलता है, तो स्थिति भयावह हो सकती है।
हम आकस्मिक फैलने वाली बीमारियों को पर्याप्त शोध और दवाइयों की तुरंत उपलब्धता न होने के कारण यदि स्वास्थ्य कार्यक्रमों से अलग रख दें, तब भी देश पर बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं और उनके निदान का बोझ बहुत अधिक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि दुनिया भर में संक्रामक रोग पहले से कहीं अधिक तेजी से फैल रहे हैं और उनका इलाज ज्यादा मुश्किल हो रहा है। अपनी वार्षिक रिपोर्ट में उसने कहा है कि 1970 के दशक से हर साल नए-नए रोगों का पता चल रहा है, जिनमें कोरोना वायरस के कारण नई वायरल बीमारियों की संख्या में हुई अभूतपूर्व वृद्धि भी शामिल है। अभी तक छह प्रकार के कोरोना विषाणु की जानकारी हमारे पास थी, मगर अब वुहान में नए विषाणु का पता चलने के बाद इनकी संख्या सात हो गई है।
दुखद यह है कि संक्रामक बीमारियों को नियंत्रित करने के प्रयास सीमित हो रहे हैं, क्योंकि वे हर बार दवाइयों के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर ताकतवर हो जाती हैं। चीन में तो वुहान और आठ अन्य नगरों को देश-दुनिया से अलग काटकर कोरोना वायरस का विस्तार रोकने की कोशिश की जा रही है। ऐसे प्रयास शायद ही ज्यादा कारगर होते हैं, क्योंकि विश्व स्वास्थ्य संगठन की मानें, तो संक्रामक रोगों के प्रसार की एक बड़ी वजह पिछले 50 वर्षों में अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात में हुई वृद्धि है। संगठन ने पिछले पांच वर्षों में ही 1,100 से ज्यादा विभिन्न बीमारियों के फैलने की पुष्टि की है। उसने अपने सभी 193 सदस्य देशों को बीमारियों के प्रसार के बारे में जानकारी देने और टीके विकसित करने में मदद करने के लिए विषाणुओं के नमूनों के आदान-प्रदान में एक-दूसरे देश का सहयोग करने का अनुरोध भी किया है।
खतरनाक महामारियों को फैलने से रोकने या नियंत्रित करने के लिए अपने देश की स्वास्थ्य सेवाओं में काफी सुधार की जरूरत है। स्वाभाविक या दुर्घटनावश फैलने वाले संक्रामक रोगों की रोकथाम, उनकी पहचान और उनके प्रसार को रोकने के लिए अभी तक हमारे पास कोई कारगर रणनीति नहीं है। हाल के वर्षों में ही उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, बिहार के मुजफ्फरपुर और राजस्थान के कोटा के नजदीकी इलाकों में संचारी रोगों ने न जाने कितने मासूमों की जान ले ली। स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन अपनी पूरी ताकत लगाकर भी इन मौतों को नहीं रोक पाए। 
संचारी रोगों का टीकों के जरिए समय-पूर्व मुकाबला करना और उन्हें नियंत्रण में रखना मानव द्वारा रोगों के इलाज में मिली महत्वपूर्ण प्रगति है। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, अब भी विश्व में हर साल लाखों बच्चे संक्रामक रोगों का शिकार हो रहे हैं, जिनमें से 20 लाख को टीकाकरण के जरिए बचाया जा सकता था। भारत में टीकाकरण अभियान बेशक चलाया जा रहा है, लेकिन इसमें अभी और तेजी लाने की जरूरत है। देश में स्वास्थ्य सेवा संबंधी कई सुविधाओं की अनुपलब्धता को देखते हुए रोगों की जानकारी और जागरूकता अभियान भी संचारी रोगों की रोकथाम में मददगार हो सकते हैं। घरेलू उपाय और खान-पान संबंधी सावधानियां इसमें कारगर मानी जाती हैं। वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि हल्के पौष्टिक व संतुलित आहार और कसरत से वायरल रोग के लक्षण व संक्रमण कम किए जा सकते हैं। समझना यह भी होगा कि संक्रामक रोगों के प्रतिरोध में व्यक्तिगत स्वच्छता की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसा इसलिए, क्योंकि नाक, आंख, मुंह आदि से होने वाले स्राव से ही यह एक से दूसरे व्यक्ति तक पहुंचता है। थोड़ी सावधानी, उचित आहार और स्वच्छता किसी भी विकराल महामारी को कम करने में सहायक मानी जाती हैं। 
भारत में अब तक कोरोना वायरस का कोई मामला भले ही सामने नहीं आया है, लेकिन पड़ोसी देश में इस समय आपात स्थिति है, तो अपने यहां भी इसके खतरे को कम नहीं समझा जा सकता। सावधानी और जानकारी से ही इसका बचाव संभव है।
(ये लेखिका के अपने विचार हैं) 

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  • Web Title:Opinion Hindustan column on 25 january