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16 फरवरी, 2020|6:07|IST

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प्रचार बनाम प्रचार की लड़ाई थी यह

delhi elections

दिल्ली के चुनाव और परिणाम अपेक्षित होते हुए भी अप्रत्याशित रहे। ‘प्रोपेगेंडा बनाम प्रोपेगेंडा' की इस लड़ाई में जीत किसी की भी हुई हो, शासन, विकास और प्रशासनिक कुशलता के असल और जनोन्मुखी चुनावी मुद्दे गौण ही रहे। क्या यह कहना गलत होगा कि चुनावी मुद्दों के तौर पर जितना निंदनीय नफरत आधारित प्रचार है, उतना ही बेईमानी झूठ और प्रपंच आधारित भ्रामक प्रचार? दोनों ही लोकतंत्र को कमजोर करते हैं और जनादेश को कृत्रिम रूप से प्रभावित करते हैं। इतिहास गवाह है कि उक्त मुद्दों पर आधारित जनादेश जनहित और विकास के कार्यों को आगे ले जाने में असफल रहा है। ऐसे जनादेश से चुनी गई सरकारें आम तौर पर शासन चलाने की बजाय अपने सियासी एजेंडे को सुदृढ़ करने में लगी रहती हैं।

असल में, अरविंद केजरीवाल द्वारा सोची-समझी नीति के तहत निरंतर नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री और स्वयं को दिल्ली का मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट करने का खेल सफल हुआ। आरोप-प्रत्यारोप से दिल्ली की राजनीति में प्रवेश करनेवाले केजरीवाल ने फिर से पूर्ण बहुमत तो पा लिया, लेकिन यह बात दीगर है कि इन आरोपों से जिन राजनीतिक परंपराओं और मर्यादाओं का बलिदान हुआ, वे शायद ही पुनर्जीवित हो पाएंगी।

जितने आरोप लगाए गए, उनका कोई लेखा-जोखा नहीं रहा। न तो कभी जनता ने इनका हिसाब मांगा और न ही केजरीवाल ने कभी स्पष्ट करना उचित समझा। केजरीवाल की राजनीति की पैरोकारी करनेवाले दिल्ली की जनता के प्रत्यक्ष लाभ की तो बात कर रहे हैं, पर इन नीतियों से जो दीर्घकालिक नुकसान कुछ समय बाद सामने आएगा, उसकी बात कोई नहीं कर रहा, और यही नुकसान शायद केजरीवाल की अगले पांच वर्षों की चुनौती भी होगी और कसौटी भी।

आने वाले दिनों में कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती होगी अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों का मनोबल बनाए रखना। पिछले पांच वर्षों तक कोई सांसद व विधायक नहीं रहने के बाद भी कांग्रेस की 280 ब्लॉक कमेटी और 14 जिला समितियां सक्रिय हैं। भाजपा और आप के विपरीत कांग्रेस की राजनीति कभी भी चुनाव जीतने के लिए ‘कुछ भी करेंगे' वाली नहीं रही। ऐसी स्थिति में कांग्रेस को आक्रामकता से पुनर्वासित करना होगा। इस बात पर भी गौर करना होगा कि 2014 से आगे अनेक चुनावों में कांग्रेस का घटता-बढ़ता मत प्रतिशत इस बात को कतई इंगित नहीं करता कि इसकी वापसी नहीं हो सकती।

(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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  • Web Title:It was a fight against publicity versus publicity says