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आप ऐसे न रोक पाएंगे काले धन की घुसपैठ

सभापति महोदय, लोकतंत्र का मोटा-मोटा मतलब वोट के राज से है। वोट प्रणाली जितनी दुरुस्त होगी, लोकतंत्र उतना मजबूत होगा। इसमें कोई विवाद की गुंजाइश नहीं है। लोकतंत्र और वोट प्रणाली को दुरुस्त करने के...

आप ऐसे न रोक पाएंगे काले धन की घुसपैठ
Monika Minalरघुवंश प्रसाद सिंह, वरिष्ठ नेता व सांसद Fri, 16 Feb 2024 09:23 PM
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सभापति महोदय, लोकतंत्र का मोटा-मोटा मतलब वोट के राज से है। वोट प्रणाली जितनी दुरुस्त होगी, लोकतंत्र उतना मजबूत होगा। इसमें कोई विवाद की गुंजाइश नहीं है। लोकतंत्र और वोट प्रणाली को दुरुस्त करने के लिए विभिन्न आयोग, कमेटियां बनीं और विभिन्न विद्वान लोगों के मत भी आए। इसके लिए दिनेश गोस्वामी कमेटी और इंद्रजीत गुप्ता कमेटी का गठन हुआ, पर उन रिपोर्टों को माननीय मंत्री जी ने ताक पर रख दिया। अब माननीय मंत्री जी यहां एक विधेयक लेकर आए हैं। हालांकि, इन्होंने दावा किया है कि इंद्रजीत गुप्ता कमेटी की एक-दो सिफारिशों को इस विधेयक में सम्मिलित किया है, पर ऐसी कोई बात नहीं है। आपने इस विधेयक में दावा किया है कि इलेक्टोरल रोल्स और वोटर लिस्ट देंगे। हम जब से चुनाव लड़ रहे हैं, तब से देख रहे हैं कि मान्यता प्राप्त पार्टियों को ही वोटर लिस्ट मिल रही है। ...माननीय मंत्री ने इस विधेयक के बैकग्राउंड को छिपा लिया है। बैकग्राउंड यह है कि सत्तारूढ़ दल में दो पार्टियों के अध्यक्षों ने पैसे लिए। दुनिया जान गई कि रिश्वतखोरी हुई। इस रिश्वतखोरी को डोनेशन में परिणत करने के लिए ये उपाय किए गए। असली बात यही है। मैंयहां एक भेद खोल रहा हूं। आप इस बारे में हमें बताइए। लालकृष्ण आडवाणी जो हवाला कांड में आरोपी थे, कोर्ट से दोषमुक्त हुए। इस काम के लिए कैबिनेट की एक कमेटी भी बनी थी। उस कमेटी ने कहा कि यह बड़ा झंझट है, पहले घूस ले ली और बाद में कह दिया कि पार्टी के काम के लिए पैसा लिया गया। 
...हम सभी लोग कहते हैं कि मसल पावर और मनी पावर से देश को बचाओ, लोकतंत्र को बचाओ और लोकतंत्र को मजबूत करो। ...लोकतंत्र को मजबूत करने की चिंता सबको है। सन 1954-55 में एक जांच कमेटी बनी, जिसके लिए पंडित जवाहर लाल नेहरू ने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के एक अर्थशास्त्री आई एन कांडर को यहां बुलवाया था। उन्होंने कहा था कि 400-500 करोड़ रुपये की ब्लैक मनी है, जो आज बढ़कर आठ लाख करोड़ रुपये तक हो गई है। यदि यह विधेयक आ गया, तो वह आठ लाख करोड़ रुपये से बढ़कर हजारों-हजार करोड़ रुपये हो जाएगी। यह क्यों बढ़ेगी? यह कहा गया कि पार्टी चंदा लेगी, कोई दूसरी पार्टियों को चंदा क्यों देगा, वह सत्तारूढ़ पार्टी को ही चंदा देगा, क्योंकि वे उससे लाभ उठाएंगे। ...सरकार कहती है कि हम पारदर्शिता ला रहे हैं। दान वह होता है, जो गरीब, साधु या मंदिर में दिया जाता है, ताकि पुण्य मिले। क्या मल्टी-नेशनल्स, ब्लैक मार्केटियर्स पुण्य के लिए पार्टी को दान देंगे? उससे क्या उनके धर्म में बढ़ोतरी होगी? वे सत्तारूढ़ पार्टी से लाभ उठाने के लिए ही चंदा देंगे। 
अध्यक्ष महोदय, हम संक्षेप में महाभारत का एक प्रसंग बताना चाहते हैं। महाभारत की लड़ाई में जब भीष्म पितामह बाण शय्या पर पड़े थे, तो सब लोग उनसे उपदेश सुनने के लिए जाते थे। भीष्म पितामह ने ज्ञान का उपदेश देना शुरू किया, तभी द्रौपदी हंस पड़ी। पितामह ने पूछा, बेटी तुम क्यों हंसती हो? द्रौपदी ने कहा कि जब चीर हरण हो रहा था, उस समय आपकी आवाज नहीं निकली, आज आप ज्ञान बांट रहे हैं और हम लोगों को उच्च दर्शन का ज्ञान पढ़ा रहे हैं। भीष्म पितामह ने कहा, चूंकि उस समय मैंने दुर्योधन का अनाज खाया था, उसके दरबार में था, मेरा खून गंदा हो गया था, इसलिए मेरा ज्ञान भ्रष्ट हो गया था। आज बाण शय्या पर पड़ने के बाद वह गंदा खून निकल गया है और स्वच्छ खून शरीर में प्रवाहित हो रहा है, इसलिए मैं उपदेश दे रहा हूं, लोगों को समझा रहा हूं। जब भीष्म पितामह जैसे महापुरुष का खून दुर्योधन के अनाज खाने से गंदा हो गया, ज्ञान भ्रष्ट हो गया था और वह भरी सभा में सही बात नहीं कर सके, उसी प्रकार जब मल्टी-नेशनल्स, ब्लैक मार्केटियर्स से पैसा चंदे के रूप में राजनीतिक पार्टियां लेंगी, तो उनका भी वही हाल होगा।...
मेरा ऐसा मानना है कि यह कानून एक धोखाधड़ी है और लोगों की आंखों में धूल झोंकने के समान है। चुनाव आयोग का निर्देश है कि चुनाव में 15 लाख रुपये का खर्चा होना चाहिए, इससे ज्यादा खर्चा अवैध है, लेकिन कोई बताए कि 15 लाख रुपये में कौन चुनाव लड़ रहा है? ...रुपया कहां से आता है?... इसलिए मैं चुनौती देता हूं कि इसकी जांच हो जाए, छानबीन हो जाए कि असलियत क्या है।... यह सब धोखा है। ...इसलिए हम इस विधेयक का विरोध करते हैं।
    (लोकसभा में दिए गए उद्बोधन से )  

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