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राजधानी में ऐसा जल संकट फिर नहीं होगा

उत्तर भारत के ज्यादातर इलाकों में बढ़ती गरमी के साथ जल संकट गहराने लगा है। मुंबई, बेंगलुरु और दिल्ली में भी जलापूर्ति चर्चा का विषय है। आखिर कैसे हो स्थायी समाधान? दिल्ली में समाधान के लिए लोकसभा.. .

राजधानी में ऐसा जल संकट फिर नहीं होगा
Monika Minalडी पी करमरकर, तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रीFri, 24 May 2024 11:01 PM
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अध्यक्ष महोदय, मैंने यह निवेदन किया था कि यह मामला पक्ष लेने का नहीं है। इसका सब पक्षों से संबंध है और सारी दिल्ली की जनता के लिए यह महत्व की बात है। मैंने अपने विभिन्न माननीय सहयोगियों की बातें सुनी हैं। तीन बातें मेरी समझ में आई हैं और मैंने तीन प्रश्न अपने से पूछे हैं। आज और कल जो पानी की कमी हुई है, उसमें क्या कोई भूल हुई है? क्या कोई ऐसा उपाय है, जिससे अधिकारी संकट को टाल सकते थे? क्या कोई ऐसी सावधानी है, जो नहीं बरती गई है?
पीलिया संबंधी समिति के प्रतिवेदन की ओर ध्यान आकृष्ट कराया गया। हम समिति की सिफारिशों का बहुत ही सम्मान करते हैं। पीलिया संकट के समय मामले की पूरी छानबीन की गई थी। हमने समिति की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया था। केवल दो सिफारिशें स्वीकृत नहीं की गई थीं ...। दो सिफारिशों का संबंध उत्तर प्रदेश राज्य और हिंडन से पानी लेने के संबंध में था। इस संबंध में भारत सरकार और निगम में बातचीत हो सकती है। संबद्ध राज्य पंजाब और उत्तर प्रदेश है।
...क्या हम कोई जलाशय की व्यवस्था नहीं कर सकते? ...दिल्ली की स्थिति इस संबंध में विचित्र है। बम्बई में यह संभव है और वहां पानी का संग्रह किया जा सकता है। यहां पानी का सबसे प्रमुख साधन यमुना है। यहां हिमालय से पानी को खींचकर तो एकत्रित नहीं किया जा सकता। न यह बात क्रियात्मक ही है। विशषेज्ञों ने इस सुझाव को असंभव बताया है। चाहे हम इसे पसंद करें, चाहे न करें, हमें मुख्यत: दिल्ली की आवश्यकताओं के लिए यमुना पर ही आश्रित रहना होगा। पानी संग्रह करने की कठिनाइयों को सदन अच्छी प्रकार जानता है। इसलिए यह सुझाव व्यावहारिक नहीं है। वर्तमान जलाशय के स्थान को बढ़ाने के प्रयत्न किए जा रहे हैं। ...एक बात हम भूल जाते हैं और वह यह कि इस काम को करने वाले कर्मचारी कई बार हालात के सामने असमर्थ हो जाते हैं। उनके बस की बात नहीं रहती। पीलिया के पश्चात देश भर में कई प्रकार की महामारियां आईं, परंतु दिल्ली सबसे बची रही। माननीय सदस्य इस बात का परीक्षण कर सकते हैं कि इस सबका श्रेय उनको है, जो रात-दिन पानी के शुद्ध संभरण की देख-रेख करते हैं। यह मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं कि पानी की शुद्धता किसी भी नगर से कम नहीं है।
...कल यह बात नहीं थी कि पानी बिल्कुल कट ही गया हो। प्रथम तल वालों को पानी नहीं उपलब्ध हो रहा था। हमें यह कभी भी आशा नहीं थी कि जल संभरण पूर्ण रूप से रुक जाएगा...। अगले वर्ष ही हम आपको यह बताने में समर्थ होंगे कि नदी नियंत्रित की जा चुकी है या नहीं। ...आशा है, 1956 की ग्रीष्म ऋतु में नदी के प्रवाह बदलने की आशंका नहीं रहेगी। ...दिल्ली में 22 लाख व्यक्तियों में से केवल 18 लाख व्यक्तियों को शुद्ध जल प्राप्त होता है। चार लाख व्यक्ति अशुद्ध जल ही पीते हैं। दिल्ली में प्रति व्यक्ति पानी की खपत देश भर में सबसे अधिक है, अर्थात 35 गैलन प्रति दिन है।
हम दिल्ली के जल संभरण को 6.2 करोड़ से बढ़ाकर 9 करोड़ गैलन करना चाहते हैं, क्योंकि अभी हम चार लाख व्यक्तियों को शुद्ध जल नहीं दे पाते हैं। इस संबंध में एक कठिनाई और भी है। दिल्ली की जनसंख्या में पिछले चार-पांच वर्षों से 60,000 से 80,000 तक वृद्धि प्रतिवर्ष हो रही है।...
वस्तुत: हम जल संभरण (आपूर्ति) की समस्या के संबंध में अत्यधिक चिंतित हैं, क्योंकि भले ही दिल्ली की सारी समस्याएं हल हो जाएं, पर जब तक जल संभरण की यह समस्या हल नहीं होगी, तब तक यह हमारी असफलता ही समझी जाएगी। मैं स्वयं इस बात की सावधानी से देखभाल करूंगा। दिल्ली निगम स्वयं एक उत्तरदायी संस्था है। ... निगम बड़ी कुशलतापूर्वक कार्य कर रहा है और आशा है, भविष्य में यह आशंका ही पैदा नहीं होगी।    
    (लोकसभा में दिए गए उद्बोधन से)