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आपदा के समय राज्यों को पूरी सहायता मिले

सभापति महोदय, अब तक वाद-विवाद में बाढ़ पर बहुत ध्यान दिया गया है। नि:संदेह यह एक अच्छी बात है, परंतु बाढ़ पर चर्चा करते समय सूखे को भुला दिया गया है और इसलिए मैं देश के विभिन्न भागों में सूखे की...

आपदा के समय राज्यों को पूरी सहायता मिले
Pankaj Tomarमधु दंडवते, तत्कालीन सांसद व वरिष्ठ नेताFri, 21 Jun 2024 09:28 PM
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सभापति महोदय, अब तक वाद-विवाद में बाढ़ पर बहुत ध्यान दिया गया है। नि:संदेह यह एक अच्छी बात है, परंतु बाढ़ पर चर्चा करते समय सूखे को भुला दिया गया है और इसलिए मैं देश के विभिन्न भागों में सूखे की स्थिति की ओर कुछ अधिक ध्यान दिलाना चाहूंगा।
मैं पश्चिम तटीय कोंकण क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता हूं, जहां पिछले 100 वर्षों से अकाल या सूखा नहीं पड़ा। बाढ़ आई थी, पर इस बार हमने देखा कि असामान्य रूप से सूखे तथा अकाल की स्थिति पैदा हो गई थी...।
देश में सूखा तथा बाढ़ लगभग एक चिरकालिक समस्या बन गई है और इसलिए इनकी रोकथाम तथा बचाव के तरीकों पर हमें कुछ और चर्चा करने की जरूरत है, जिससे हम अल्पकालीन तथा दीर्घकालीन दृष्टिकोण अपना सकें। ...यद्यपि बाढ़ एवं सूखा मुख्य रूप से राज्यों का विषय है, क्योंकि ये रोजमर्रा की समस्या बन गए हैं, मैं माननीय मंत्री महोदय से निवेदन करता हूं कि वे समरूप मार्गनिर्देश तैयार करें तथा राज्यों को भेजें, ताकि इनके प्रति एक समान दृष्टिकोण अपनाया जा सके तथा उस स्थिति में केंद्र सरकार राज्य सरकारों के साथ मिलकर साधन एकत्र कर सके।
जहां तक वित्तीय साधनों का संबंध है, यदि आप विभिन्न राज्य सरकारों के पास सूखे तथा बाढ़ की समस्याओं से निपटने के लिए उपलब्ध धनराशि को देखेंगे, तो आप पाएंगे कि राज्यों के लिए संसाधन जुटाना उनकी क्षमता से बाहर है। इसलिए केंद्रीय सहायता सुलभ होनी चाहिए...। वर्तमान स्थिति क्या है? मानदंड तथा पुराने प्रतिमान केवल कल्पना शक्ति पर ही आधारित हैं; अधिकारियों को यह पता लगाने की कोशिश करनी चाहिए कि क्या किसी क्षेत्र विशेष में सूखे की स्थिति है? अधिकारियों को पता लगाने की कोशिश करनी चाहिए कि वास्तविक स्थिति क्या है और वे कल्पना शक्ति के सहारे ही यह पता लगाने की कोशिश करते हैं कि वर्तमान स्थिति क्या है और फिर वे कहते हैं कि इस बार फसल रुपये में 50 पैसे या 60 पैसे या 40 पैसे है। इसका गलत प्रभाव पड़ता है। वास्तव में, मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि भारत में कई क्षेत्रों में इस पुराने मानदंड कि एक क्षेत्र विशेष में सूखे की स्थिति क्या है, के बजाय यह बेहतर होगा कि आप उस क्षेत्र विशेष में हुई औसत वर्षा को लें और यदि वर्षा काफी कम हुई हो, तो गांव के अधिकारी द्वारा दी जाने वाली रिपोर्ट की चिंता किए बिना हमें आगे कार्रवाई करनी चाहिए। इस संबंध में आने वाली कठिनाइयों के बारे में मैं जानता हूं, हमारे वित्त मंत्री महोदय कृषि मंत्री महोदय को बताएंगे कि बैंक वालों के कारण परेशानियां पैदा होंगी। ...मैं सोचता हूं कि वित्त मंत्री महोदय तथा कृषि मंत्री महोदय के बीच एक वार्ता होनी चाहिए तथा पुराने मानदंडों को बिल्कुल बदल दिया जाना चाहिए। ...
कुछ  बड़े प्रयासों की आवश्यकता है। उनमें से एक कुएं की खुदाई करना है। इस बारे में एक बड़ा दिलचस्प अनुभव है तथा यह अनुभव राजस्थान में हुआ है। ...सामान्यतया पानी 150 या 200 फुट नीचे होता है। आप पाएंगे कि सूखे की स्थिति में अगर आप 700 फुट तक भी खुदाई करेंगे, तो ट्यूबवेल में कोई पानी नहीं आएगा और सारी राशि तथा समस्त व्यय व्यर्थ चला जाएगा।... 
सभी राज्यों को पर्याप्त केंद्रीय सहायता दी जानी चाहिए। यहां मेरा एक ठोस सुझाव है कि सूखे की स्थिति में कुछ ऐसे भी क्षेत्र हैं, जो बहुत पिछड़े हुए हैं। उदाहरण के लिए, उड़ीसा, बिहार अथवा महाराष्ट्र के क्षेत्र। ...जब कभी संबंधित राज्यों को केंद्रीय सहायता दी जाती है, तो यह पता चलता है कि सामान्यतया न केवल पिछड़े इलाकों की अवहेलना की जाती है, अपितु सूखे की स्थिति में तो उन्हें सहायता से पूरी तरह वंचित रखा जाता है। ...एक निश्चित राशि इन उपेक्षित पिछड़े क्षेत्रों के लिए निर्धारित करने की कोशिश करनी चाहिए, ताकि इन पिछड़े इलाकों की सूखे के दौरान भी उपेक्षा न हो।
    (लोकसभा में दिए गए उद्बोधन से)