hindustan opinion column on 30th august - जरूरत स्थाई हल निकालने की है DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

जरूरत स्थाई हल निकालने की है

जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने यह कहकर लोगों को चौंका दिया कि वह अगले तीन महीने के भीतर 50 हजार लोगों को रोजगार उपलब्ध कराएंगे। चौंकने का कारण यह है कि कुछ ही दिनों पहले तक यह माना जा रहा था कि राज्य में बेरोजगारों की बहुत बड़ी संख्या है और सरकार के पास उसके छोटे भाग को भरने के लिए भी खाली स्थान नहीं हैं। समस्या गंभीर इसलिए है कि इस राज्य में बडे़ उद्योग हैं ही नहीं, जो रोजगार का प्रमुख साधन बन सकते थे। अब अचानक राज्यपाल को इतनी बड़ी संख्या में रिक्त स्थान मिल गए हैं। स्पष्ट है, विभिन्न विभागों में बरसों से जगहें खाली पड़ी रही होंगी और किसी का ध्यान उनकी ओर नहीं गया होगा, क्योंकि जब प्रशासन में काम पर लगे कर्मचारी ही पूरा काम नहीं करते थे, तो खाली स्थानों की चिंता कौन करता? किसी कार्यालय में खाली पदों के बारे में चिंता तब होती है, जब काम इतना हो कि काम करने वालों की इसकी जरूरत महसूस हो। जब आतंकवाद के दौर के बाद चुनी हुई सरकारें आईं, तब भी राज्य-प्रशासन को सुधारने का कोई गंभीर प्रयास नहीं किया गया। जो नेता आज अनुच्छेद 370 को हटाने पर अचंभित हैं और लोकतंत्र के खतरे में होने के नारे लगा रहे हैं, वही बारी-बारी से सत्ता पर अधिकार जमाते रहे हैं। इनमें सबसे पहले तो फारुख अब्दुल्ला ही हैं। फारुख हों या उनके बेटे उमर, मुफ्ती मोहम्मद सईद हों या उनकी बेटी महबूबा या फिर गुलाम नबी आजाद हों, कश्मीर का सच यही है कि किसी ने अपने प्रशासन को दुरुस्त करने की तरफ ध्यान नहीं दिया। आधे अमले से जैसे-तैसे समय गुजारते रहे, तो बेरोजगारों  की फिक्र कौन करता?

राज्यपाल मलिक की घोषणा एक तरह से सुखद समाचार है, लेकिन इसके बारे में कुछ ठहरकर समझना होगा कि ये 50 हजार नौकरियां किन-किन पदों की हैं। ये अगर दूसरे और पहले दर्जे के अधिकारियों, इंजीनियरों, डॉक्टरों, अकाउंटेंटों या इंस्पेक्टरों की भी हों, तो सचमुच आश्चर्य होगा। इन पदों पर भर्ती करवाने वाले कश्मीर के पुराने तौर-तरीकों में लाखों में खेलते, इनको खाली रखना तो निहायत बेवकूफी होती। इन खाली पदों में से ज्यादातर पद चौथे और उससे अधिक पांचवें दर्जे के पदों के होंगे। यह तो स्वाभाविक होगा। एक मायने में यह ठीक भी है। आखिर कई हजार गरीब लोगों का काम भी बन जाएगा। तीसरे और चौथे दर्जे के कर्मचारी दबे-कुचले वर्ग के ही होते हैं। वही लोग, जिनको दीन-धरम के नाम पर आसानी से मरने-मारने पर लामबंद किया जा सकता है। ये उन्हीं घरों के लड़के होंगे, जिनकी रोजी-रोटी के साथ अतिवादियों को खिलवाड़ करने का शौक रहा है। हरेक हड़ताल या कफ्र्यू में जिनकी दुकान बंद हो जाती है, जिनकी दैनिक दिहाड़ी मारी जाती है, जिनके तांगे या टैक्सी घर पर ही रहते हैं और संकट के दिनों के लिए रखी बचत अचानक समाप्त हो जाती है। वे तो राज्यपाल की घोषणा के बाद दिन गिनने लग गए होंगे कि कब मेरे बच्चों की बारी आएगी।  

हम मानते हैं कि यह वादा पूरा होगा और हजारों नौजवानों को एक रास्ता मिल जाएगा अपने जीवन को सही दिशा देने का। यह तय है कि इससे जम्मू-कश्मीर में बेरोजगारी की समस्या हल नहीं होगी, क्योंकि यह समस्या पिछले सात दशकों में विराट रूप धारण कर चुकी है और इसके लिए हमें एक स्थाई हल निकालने की आवश्यकता होगी। वह हल बहुआयामी ही हो सकता है। ठहरे हुए उद्योगों को चलाना होगा। जहां नहीं हैं, वहां नए खोलने होंगे। ऐसी परियोजनाओं को आरंभ करना होगा, जिनका लाभ विकास का ढांचा बनाने में तो हो ही, उनसे रोजगार के स्थाई अवसर भी विकसित हों। पढ़े-लिखे नौजवानों के लिए उपयुक्त संस्थानों का निर्माण करना होगा, जहां उनके योग्य काम तो हो ही, नए रोजगार पैदा होने का एक माहौल भी बन सके। दरअसल, जम्मू-कश्मीर को अब नए दौर की तैयारी करनी होगी। इस विकास का केंद्र केवल नगर नहीं, अपितु देहात को भी बनाना होगा, क्योंकि अब तक जो अन्याय हुआ है, उसकी सबसे अधिक मार जम्मू-कश्मीर के देहात पर ही पड़ी है। पंचायतों को शक्ति देनी होगी, यही पंचायतें जनता तक विकास की योजनाओं को पहुंचाएंगी। 

पंचायतों के माध्यम से सरकार और आम जनता के बीच संवाद भी पैदा होगा, जो सही लोकतंत्र के विकास के लिए सबसे कारगर साधन है। पंचायतों के चुनाव हो चुके हैं, लेकिन अभी तक इन संस्थाओं को न तो वे अधिकार प्राप्त हुए हैं और न ही वह वातावरण, जिसमें वे अपनी उपयोगिता सिद्ध कर सकें। फिर भी, राज्यपाल की घोषणा से राज्य में एक माहौल पैदा होगा कि नई संभावनाएं सामने हैं। अंधेरे में रोशनी की किरण दिखाई देने लगेगी। केंद्र सरकार ने आश्वासन दिया है कि नई व्यवस्था में प्रगति के नवीन मार्ग खुलेंगे। इसलिए राज्य सरकार की इस पहल का स्वागत करना चाहिए। 
(ये लेखक के अपने विचार हैं)
 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:hindustan opinion column on 30th august