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गृहमंत्री और BJP अध्यक्ष अमित शाह ने कहा- जन-अपेक्षाओं पर खरा नेतृत्व

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आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 69वां जन्मदिन है। छोटी उम्र से ही उनका जीवन राष्ट्र-सेवा के लिए समर्पित रहा है। किशोरावस्था से ही समाज के शोषित-वंचित वर्गों के लिए काम करने की तरफ उनका रुझान रहा। एक बेहद गरीब परिवार में पैदा होने के कारण उनका बचपन अभाव और गरीबी के बीच व्यतीत हुआ, इसलिए उनके मन में गरीबों के लिए काम करने और उनके जीवन-स्तर में बदलाव लाने की भावना बचपन से ही दृढ़ रही। 
 

साल 1987 में जब भाजपा ने उन्हें गुजरात प्रदेश का संगठन महामंत्री बनाया, उस समय राज्य में भाजपा के सिर्फ 12 विधायक थे, लेकिन मोदीजी की सांगठनिक क्षमता और कुशल रणनीति का ही परिणाम रहा कि 1990 में 67 सीटों पर भाजपा विजयी हुई। फिर 1995 में वह समय भी आया, जब पार्टी ने 121 सीटों के साथ गुजरात में पूर्ण बहुमत प्राप्त कर सरकार बनाने में सफलता प्राप्त की। तब से अब तक गुजरात में भाजपा पराजित नहीं हुई है। इस अजेयता के पीछे नरेंद्र मोदी द्वारा राज्य में तैयार की गई सांगठनिक आधारशिला और मुख्यमंत्रित्व में किए गए विकास-कार्यों का प्रमुख योगदान है। बाद में राष्ट्रीय महामंत्री के रूप में उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके आधार पर भाजपा आज देश ही नहीं, दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है।
 

नब्बे के दशक में मुझे भी उनके नेतृत्व में संगठन में काम करने का अवसर मिला। तब गुजरात में सदस्यता अभियान चल रहा था। उसमें सदस्यता दिलाने, विचारधारा से लोगों को जोड़ने, सदस्यों से संपर्क बनाने और सदस्यता का अभिलेखन करने यानी डॉक्युमेंटेशन जैसी चीजों का जिस प्रकार से वह नीचे तक क्रियान्वयन करते, वह कार्यकर्ताओं के लिए तो प्रेरणादायक था ही, मुझे भी उससे बहुत कुछ सीखने को मिला।  
 

नरेंद्र मोदी जब 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बने, तब तक उन्होंने कोई भी चुनाव नहीं लड़ा था। उनके नेतृत्व में राज्य के कायाकल्प की शुरुआत हुई और इस दौरान उन्होंने गुजरात के विकास के ऐसे बहुत से कार्य किए, जिन्हें तब तक असंभव माना जाता था। मोदीजी ने जब गुजरात के घर-घर में 24 घंटे बिजली देने का लक्ष्य तय किया, तो यह लोगों को संभव नहीं लगता था, लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति, जनसेवा की भावना और कारगर रणनीति के जरिए उन्होंने इस लक्ष्य को प्राप्त कर यह संदेश दिया कि चाह हो, तो राह निकल ही आती है।  
 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को परिवारवाद, जातिवाद व तुष्टिकरण जैसे तीन नासूरों से मुक्ति दिलाई और सबका साथ, सबका विकास के मूलमंत्र से गरीबों के कल्याण पर आधारित भ्रष्टाचार मुक्त पारदर्शी राजनीति की शुरुआत की। उनके नेतृत्व में देश विकास के पथ पर तो अग्रसर है ही, विश्व पटल पर भी भारत की साख में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। इसका सबसे ज्वलंत प्रमाण अनुच्छेद 370 के मुद्दे पर पाकिस्तान के विरोध को दरकिनार कर विश्व बिरादरी का भारत के पक्ष में खड़ा होना है। इस मुद्दे पर भारत के विरुद्ध समर्थन जुटाने की कोशिश में लगा पाकिस्तान विश्व पटल पर अलग-थलग पड़ गया है। प्रधानमंत्री के प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों द्वारा योग दिवस को विश्व स्तर पर मान्यता देना भी भारत के बढ़ते कद का ही सूचक है।
 

चाहे गुजरात हो या देश, उनकी कार्यशैली हमेशा एक सुधार की रही है। आर्थिक सुधारों द्वारा ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’, अर्थव्यवस्था को पांच ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य, तीन तलाक उन्मूलन जैसे कानून से महिला सशक्तीकरण, अनुच्छेद 370 में परिवर्तन द्वारा राष्ट्रीय एकीकरण, स्वच्छ भारत अभियान से स्वच्छता के प्रति जागरूकता, पर्यावरण और जल संवद्र्धन के प्रयास जैसे उन्होंने अनेक ऐसे काम किए हैं। जन-भागीदारी से विकास करने का कौशल नरेंद्र मोदी सरकार की एक प्रमुख विशेषता है। साल 2014 में सत्तारूढ़ होने के तुरंत बाद ही उनके द्वारा शुरू किया गया ‘स्वच्छ भारत अभियान’ शासन में जन-भागीदारी का उत्तम उदाहरण है। इसी तरह, अभी सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्ति को लेकर भी उन्होंने देशवासियों का आह्वान किया है और मुझे विश्वास है कि पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए इसमें भी लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगे। 
 

अपने शासन से सामान्य लोगों को सफलता से जोड़ लेने के पीछे एक प्रमुख कारक उनकी अनूठी संवाद-शैली है। लोगों की संवेदनाओं से जुड़ने में मोदीजी का कोई सानी नहीं है। कठिन विषय को वह सामान्य लोगों की मनोभूमि के अनुरूप ढालकर ऐसे पेश करते हैं कि लोगों का विषय से सहज जुड़ाव हो जाता है। सहज जुड़ाव का एक बड़ा कारण यह भी है कि उनके शब्दों को लोग सुनते ही नहीं, उन पर विश्वास भी करते हैं।
 

लंबे समय तक उनके साथ काम करते हुए मैंने महसूस किया कि उनमें ऐसी कई विशेषताएं हैं, जो उन्हें एक बहुआयामी व्यक्तित्व का स्वामी बनाती हैं। कठिन परिश्रम उनका स्वभाव है। सामान्य जन के जीवन में बदलाव लाने और उनकी समस्याएं दूर करने के लिए वह परिश्रम की पराकाष्ठा कर जाने से भी नहीं हिचकते। यदि किसी लक्ष्य को प्राप्त करने का दृढ़ निश्चय उन्होंने कर लिया, तो फिर चाहे कितनी भी विघ्न-बाधाएं आएं और कितना भी परिश्रम करना पड़े, वह उस लक्ष्य को प्राप्त किए बिना पीछे नहीं हटते। 
 

अपनी टीम की योग्यता और क्षमता को पहचानने की अद्भुत दृष्टि भी उनमें है। वह तुरंत जान लेते हैं कि कौन व्यक्ति किस कार्य के लिए उपयुक्त होगा और उसी के अनुरूप कार्य का विभाजन करते हैं। ये विशेषताएं ही हैं, जिनसे असंभव से लगने वाले अनेक कार्यों को उन्होंने संभव कर दिखाया है। उनकी अन्य प्रमुख विशेषताएं हैं- अभूतपूर्व इच्छाशक्ति, अपूर्व धैर्य, निर्णय लेने की क्षमता, कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की निरंतरता, स्वयं से ऊपर उठकर कार्य करने की कर्मठता, सबके विचारों को सुनना और लोकतांत्रिक तरीके से उन्हें महत्व देना।
 

देश के लिए सौभाग्य की बात है कि उसे एक ऐसा नेता मिला है, जो राष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत को पुनस्र्थापित कर सामान्य जन के जीवन को सुखमय बनाने और भारत को पुन: विश्वगुरु के पद पर प्रतिष्ठित करने के लिए कृत-संकल्पित भाव से जुटा हुआ है।  
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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