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नीट जैसी परीक्षा पर उठे नए प्रश्न  

आखिर ऐसी क्या हड़बड़ी थी कि बिना पूर्व सूचना के दस दिन पहले ही अचानक मेडिकल प्रवेश परीक्षा के नतीजे घोषित कर दिए गए? कमियों की पूरी जांच होनी चाहिए। जब दिन भर पूरा देश अठारहवीं लोकसभा के चुनावी नतीजों..

नीट जैसी परीक्षा पर उठे नए प्रश्न  
Monika Minalविभूति नारायण राय, पूर्व आईपीएस अधिकारीMon, 10 Jun 2024 10:23 PM
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जब दिन भर पूरा देश अठारहवीं लोकसभा के चुनावी नतीजों में डूब-उतराकर सोने की तैयारी कर ही रहा था, तब 4 जून, 2024 की रात डॉक्टरी की पढ़ाई करने का सपना देखने वाले लाखों छात्रों के लिए किसी दु:स्वप्न की तरह उतरी। दुनिया की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षाओं में से एक नीट या नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट) की 5 मई को परीक्षा देने के बाद ये छात्र बड़ी बेसब्री से 14 जून का इंतजार कर रहे थे, जब उनकी मेहनत का परिणाम आने वाला था। 
परीक्षा लेने वाली संस्था नेशनल टेस्ट एजेंसी (एनटीए) ने सूचना बुलेटिन में यही तारीख घोषित कर रखी थी। इस परीक्षा की एक खासियत यह है कि परीक्षा समाप्त होने के चंद घंटों में ही छात्रों को अपने प्रदर्शन का आभास हो जाता है। एनटीए ली गई परीक्षा के सही उत्तर ऑनलाइन प्रसारित कर देती है और परीक्षार्थी को कमोबेश अपनी मेरिट का अंदाज लग जाता है। परीक्षा परिणाम से इस मेरिट और उसके आधार पर मिलने वाले मेडिकल कॉलेज की पुष्टि हो सकती है। 4 जून की रात अचानक बच्चों व उनके अभिभावकों के सेलफोन की घंटियां बजने लगीं और किसी विस्फोट की तरह यह सूचना साझा की जाने लगी कि एनटीए ने नीट का परीक्षाफल घोषित कर दिया है। इस पर विश्वास करना थोड़ा मुश्किल था, क्योंकि एनटीए ने तो अपने बुलेटिन में 14 जून की तारीख घोषित कर रखी थी और हर साल परीक्षा के नतीजे घोषित करने के घंटों पूर्व सूचना प्रसारित की जाती है कि परिणाम आने वाले हैं। फिर इस बार ऐसी क्या हड़बड़ी थी कि बिना किसी पूर्व सूचना के दस दिन पहले ही अचानक नतीजे घोषित कर दिए गए?
यह तो दूसरे दिन शाम तक स्पष्ट होना शुरू हुआ कि इस परीक्षा में बड़ा घपला हुआ है, जिसका पूरा आकलन करने में विशेषज्ञों की भी अक्ल चकरा जाएगी। क्या यह अनायास था कि परिणाम घोषित करने के लिए ऐसी तारीख चुनी गई, जब पूरे देश का मीडिया चुनावी नतीजों को समझने में व्यस्त था? यह तो भला हो सोशल मीडिया का, जिसने शुरुआती  झटके से उबरते ही शोर मचाना शुरू कर दिया कि हजारों मेधावी छात्रों के साथ घपलेबाजों ने खेल कर दिया है। बिना किसी तैयारी के आए अखबारनवीसों के सामने एक प्रेस कांफ्रेंस में एनटीए के महानिदेशक एक पत्रकार के इस प्रश्न पर लड़खड़ा गए कि परीक्षा के परिणाम तय तिथि से इतने पहले क्यों घोषित हो गए? 
सारा विवाद सिर्फ सोलह सौ बच्चों से संबंधित है, लेकिन जानकारों के मुताबिक पचास हजार के लगभग अभ्यर्थियों की मेरिट पर इसका असर पड़ेगा। 720 अंकों की इस परीक्षा में पिछले वर्षों तक अधिकतम दो, तीन परीक्षार्थियों को ही पूर्णांक मिलते रहे हैं। इस वर्ष इतने अंक पाने वालों की संख्या 67 हो गई। प्रतिभा के इस विस्फोट का जो कारण एनटीए अधिकारियों ने बताया, उसमें इतने झोल हैं कि आसानी से किसी विशेषज्ञ के गले नहीं उतरेंगे। घपलों की शुरुआत फॉर्म भरने के साथ ही हो गई। फॉर्म भरने की निर्धारित तिथि 9 फरवरी से 9 मार्च थी। बहुत से बच्चों ने अंतिम दिनों में फॉर्म भरने की कोशिश की, पर नीट की वेबसाइट क्रैश हो जाने के कारण कई तरह की दिक्कतें आईं और अभिभावकों की मांग पर फॉर्म भरने की अंतिम तारीख एक सप्ताह के लिए बढ़ा दी गई। बाद में बड़े रहस्यमय ढंग से फॉर्म भरने के लिए नीट की वेबसाइट दो दिनों (9 अप्रैल से 10 अप्रैल) के लिए फिर खोली गई। यह जांच का विषय होना चाहिए कि किन परिस्थितियों में इन दो दिनों में फिर से फॉर्म भरे गए और नए शामिल अभ्यर्थियों में से कितने सफल हुए?
एनटीए द्वारा जारी नीट टॉपरों की मेरिट लिस्ट में आठ छात्रों के क्रमांक एक ही सीरीज (62 से 69) में होने पर भी संदेह व्यक्त किया गया है। इनमें से छह छात्रों ने रैंक 1 प्राप्त की है और ये सभी हरियाणा के बहादुरगढ़ स्थित एक ही परीक्षा केंद्र के हैं। इन आठ में से सात छात्रों के सरनेम लिस्ट में नहीं दिए गए हैं, जिससे संदेह और बढ़ गया है। इन छात्रों के नीट रोल नंबर, नाम, अंक और रैंक का स्नैपशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इन आठ में से छह छात्रों ने 720 में से 720 अंक प्राप्त किए हैं, जबकि अन्य दो ने 719 और 718 अंक प्राप्त किए हैं। यह भी जांच का विषय हो सकता है कि इन छात्रों ने बाद में खोली गई वेबसाइट के जरिये तो प्रवेश नहीं लिया था?
एनटीए ने इस पर सफाई देते हुए कहा है कि हरियाणा के परीक्षा केंद्र पर छात्रों का समय बर्बाद हुआ था, जिसके चलते उन्हें मुआवजे के तौर पर ‘ग्रेस मार्क्स’ दिए गए थे। इन उदार अंकों का तिलिस्म भी बड़ा रहस्यमय है। शक इससे भी गहराया कि कई राज्यों में परीक्षार्थियों के समय का नुकसान हुआ था और ‘ग्रेस मार्क’ हरियाणा वाले केंद्र पर ही क्यों दिया गया? फिर फॉर्म भरते समय जारी सूचना पुस्तिका में ग्रेस मार्क का उल्लेख क्यों नहीं किया गया? यह तो खेल शुरू होने के बाद नियम बदलने जैसा है।
यह भी उल्लेखनीय है कि बिहार और उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में परीक्षा शुरू होने के पहले ही पेपर आउट होने की अफवाहें गश्त करने लगी थीं और दोनों प्रांतों में पुलिस ने कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया था। कुछ लोगों ने एनटीए को मेल भेजकर आउट हुए परचे की जानकारी भी दी थी।
पिछले कुछ वर्षों से देश के नौनिहालों के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं के रूप में छल हो रहा है। शायद ही कोई प्रतियोगी परीक्षा ऐसी हुई हो, जिसकी शुचिता को लेकर छात्रों के मन में संदेह न उठा हो। हर बार आरोप लगते ही परीक्षा कराने वाली एजेंसी के अधिकारी सब कुछ ठीक-ठाक होने की दुहाई देने लगते हैं, बाद में अदालत या शासन के स्तर पर उनकी कलई खुलती है और परीक्षा पुन: करानी पड़ती है। इस पूरी प्रक्रिया में धन और समय की बर्बादी तो होती ही है, हमारी नई पीढ़ी के मन में देश की संस्थाओं और कानून कायदों से विश्वास भी खत्म होता जाता है। इस स्थिति से बचने के लिए जरूरत है कि नीट की इस परीक्षा की पूरी जांच कराई जाए और एनटीए के दोषी अधिकारियों को ऐसा दंड दिया जाए, जो भविष्य के लिए सबक बने।
    (ये लेखक के अपने विचार हैं)