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Hindi News ओपिनियनअंतिम निर्णय अदालत को करने दिया जाए

अंतिम निर्णय अदालत को करने दिया जाए

दिल्ली में जल का अभाव है और उसके साथ हरियाणा व हिमाचल प्रदेश का विवाद चल रहा है। दरअसल, राज्यों के बीच जल विवाद बहुत पुराने हैं। 29 सितंबर, 1955 को लोकसभा में जल विवाद विधेयक और जल बोर्ड विधेयक पर खूब

अंतिम निर्णय अदालत को करने दिया जाए
Monika Minalपंडित ठाकुर दास भार्गव, वरिष्ठ राजनेता व सांसदFri, 14 Jun 2024 11:17 PM
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हमारे हिन्दुस्तान में जिस कदर परमात्मा ने बरकतें दी हैं, उसका अंदाजा हम सब लोग लगा सकते हैं। हिन्दुस्तान में बड़े से बड़े दरिया, बड़े से बड़े पहाड़, बड़ी से बड़ी नहरें और बहुत सी दूसरी चीजें ऐसी हैं, जो शायद दूसरे मुल्कों को नसीब नहीं हैं...। परमात्मा की कृपा से हम इतने खुशनसीब हैं कि हमारे मुल्क में हवा, पानी, रोशनी, धूप और ऐसी-ऐसी दूसरी चीजें मौजूद हैं, जो इंसानी जरूरतों के लिए निहायत जरूरी हैं...।
वंदे मातरम् में हम गाया करते हैं, सुजलां, सुफलां, शस्य श्यामलां आदि, आदि, पर यह सब होते हुए भी हम अपने को मुसीबतों में पाते हैं।... पानी ही हमारी आफत बना हुआ है। गरमी के मौसम में हम देखते हैंकि धूप ही हमारी मुसीबत का बायस बनी हुई होती है, पर मुझे यकीन है कि अगर हम इन चीजों का सदुपयोग करें, तो हम अपने देश में इंसान की जरूरत की वे चीजें पैदा कर सकते हैं, जो दूसरे देशों को नसीब नहीं हैं।
बतलाया जाता है कि इस देश में हम अपने पानी का सिर्फ सात फीसदी काम में लाते हैं और 93 फीसदी बगैर इस्तेमाल हुए समुद्र में चला जाता है। हम देखते हैं कि हमारे यहां ऐसे इलाके हैं, जो यहां सदन में रोज झगड़ते हैं कि हमारे यहां पानी नहीं है, इसलिए हम पिछड़ गए हैं। इससे मालूम होता है कि कहीं तो हमारे देश में पानी बहुत ज्यादा है और कहीं पानी बिल्कुल नहीं है । मैं समझता हूं कि यह हर एक हिन्दुस्तानी के लिए चुनौती है कि वह अपने देश की इन नेमतों को इस तरह से इस्तेमाल करे कि ये हमारे लिए फायदेमंद साबित हों। मुझे याद है कि जब सन 1946 में भाखरा डैम बनाया जा रहा था, उस वक्त की पंजाब सरकार ने गवर्नमेंट आफ इंडिया से कहा था कि अगर हमको 70 करोड़ रुपया और आप दें, तो हम हिन्दुस्तान की सारी जरूरत लायक अनाज पैदा कर सकते हैं। अगर पानी का ठीक इंतजाम हो, तो अकेला पंजाब इतना अनाज पैदा कर सकता है कि इस देश में किसी के दिमाग में भी यह बात न आए कि यहां कभी अनाज की कमी हो सकती है। मुझे उम्मीद है कि इस देश में बहुत से ऐसे इलाके हैंकि अगर वहां पानी का ठीक से इंतजाम हो, तो वे इतना गल्ला पैदा कर सकते हैं, जो इस देश की जरूरत से काफी ज्यादा होगा। ...लेकिन जहां उत्तर-पश्चिम पंजाब में पानी का इंतजाम किया गया, वहीं दक्षिण पूर्व पंजाब को पानी से महरूम रखा गया। ...सिंध और पंजाब में भी पानी का झगड़ा चला। इस झगड़े में बहुत अर्से तक गवर्नमेंट आफ इंडिया उलझी रही । सिन्ध वाले कहते थे कि अगर पंजाब में यह डैम बनाया जाएगा, तो उनकी नहरों के पानी का स्तर नीचा हो जाएगा। यह मामला विलायत तक गया और आखिर यह फैसला हुआ कि आरिबिट्रटर मुकर्रर करो, पंजाब इतना रुपया सिन्ध को दे, उसके बाद यह तय होगा कि यह डैम बने या न बने। ...मतलब यह है कि वह दक्षिण पूर्व पंजाब का ऐसा इलाका है, जिस पर 40 साल से न वहां की गवर्नमेंट ने तवज्जो दी, न गवर्नमेंट ऑफ इंडिया ने तवज्जो दी और न सेक्रेटरी ऑफ स्टेट फॉर इंडिया  ने तवज्जो दी। एक गवर्नर साहब ने तो हिसार में आकर यहां तक फरमा दिया कि अगर इस जिले को हम पानी दे देंगे, तो हम को रिक्रूट कहां से मिलेंगे, यहां जो अच्छे मवेशी पैदा होते हैं, ये कैसे पैदा होंगे? इन वजूहात से हिसार जिले को पानी से महरूम रखा गया। ...ये इंटर स्टेट झगड़े बहुत जबरदस्त हैं। ...मामलों को तय नहीं होने दिया जाता। हमारे यहां झगड़ा चल रहा है कि गुड़गांव से होकर नहरें उत्तर प्रदेश को चली जाती हैं, पर हमारे यहां के गांवों को जल से महरूम रखा जाता है। 
...कोई शक्ति होनी चाहिए, जो इन विवादों का समाधान करे। हमने संविधान में लिख दिया है कि इन झगड़ों का फैसला करने का अख्तियार हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट को नहीं होगा। मेरा निवेदन है, अंतिम निर्णय उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश ही करे।... केंद्र सरकार उसके निर्णय को गलत कहकर रद्द नहीं कर सकती। 
    (लोकसभा में दिए गए उद्बोधन से) 

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