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प्रजातंत्र नहीं, तो आप चुनकर कैसे आए 

पूरा देश चुनावमय है। विचारों की भरमार है। निष्पक्षता, चंदा और आयोग पर रह-रहकर बहस हो रही है। 25 अप्रैल, 1986 को लोकसभा में चुनाव सुधार पर बहस हुई थी और तब भी चुनावी तंत्र को लेकर नेताओं की जो...

प्रजातंत्र नहीं, तो आप चुनकर कैसे आए 
Monika Minalममता बनर्जी, वरिष्ठ नेता व तत्कालीन सांसदFri, 12 Apr 2024 11:08 PM
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महोदय, जो बिल सदन में लाया गया है, मैं उसका समर्थन नहीं कर सकती हूं। सदन में मैंने डी एन रेड्डी और जयपाल रेड्डी का भाषण सुना है। उन्होंने यह कहा है, यदि यह बिल लीगलाइज हो गया, तब देश में ‘डेमोक्रेसी’ आएगी, अभी तक ऐसा नहीं है। जब डेमोक्रेसी नहीं है, तो... जयपाल जी इधर कैसे आए? हम लोग जो इधर आए हैं, डेमोक्रेसी के चलते आए हैं। यदि आप सारे देश की स्थिति देखें, तो आंध्र प्रदेश में तेलुगु देशम का राज है, कर्नाटक में हेगडे़ जी का राज है, पंजाब में अकाली का राज है, वहां बरनाला जी हैं, असम में एजीपी का राज है और त्रिपुरा में नितेन चक्रवर्ती, सीपीएम का राज है। हमारे राज्य पश्चिम बंगाल में मार्क्सवादी पूंजीवादी सीपीएम का राज है। फिर भी आप कहते हैं कि डेमोक्रेसी नहीं है, क्लीन डेमोक्रेसी नहीं है, चुनाव के नियम ठीक नहीं हैं, तो भारतवर्ष में विपक्षी दल कैसे चुनकर आ रहे हैं? 
मार्क्सवादियों का गणतंत्र को खत्म करने का जो षड्यंत्र है, इसको अगर देखना है, तो पश्चिम बंगाल में आकर देखिए। पश्चिम बंगाल में जो इलेक्टोरल रोल्स है, उनको पूरी तरह से बदलना चाहिए। पश्चिम बंगाल में मतदातओं के नाम मतदाता सूची से काट दिए जाते हैं और मतदाता सूचियों के साथ गड़बड़ी की जाती है। वहां भारत के विधि मंत्री अशोक सेन का नाम मतदाता सूची में नहीं है। एक पूर्व मुख्यमंत्री प्रफुल्ल चंद्र सेन का नाम मतदाता सूची में नहीं हैं। हजारों नाम मतदाता सूची से काट दिए गए हैं और अगर कुछ दिन और ये सत्ता में रह जाते हैं, तो मतदाता सूची में मार्क्सवादी कॉमरेड का नाम ही आएगा और दूसरे किसी आदमी का नाम नहीं आएगा। यह कितनी शर्म की बात है कि विधि मंत्री का नाम मतदाता सूची में नहीं है? जो देश के लिए कानून बनाता है, उसका नाम मतदाता सूची से काट दिया गया? यह कितनी शर्म की बात है और ये लोग सदन में हम लोगों के खिलाफ बोलते हैं? 
मेरा कहना यह भी है कि आप पहचान पत्र मतदाताओं को दीजिए। पश्चिम बंगाल में जो इलेक्टोरल रोल्स हैं, उनमें छोटे-छोटे बच्चों का भी नाम है और किसी मार्क्सवादी के पिता अगर मर जाते हैं, तो उनका भी नाम मतदाता सूची में रहता है। जब चुनाव होता है, तो उनके नाम पर भी वोट पड़ जाता है। यह कैसे होता है? मतदाता सूची में फर्जी नाम भी होते हैं और उनके नाम से वोट समय से पड़ जाता है। इसलिए मैं कहना चाहूंगी कि सब मतदाताओं को पहचान पत्र दिए जाएं। अगर ऐसा किया गया, तो स्थिति नियंत्रण में आ जाएगी। ...चुनाव से पहले ये लोग गांव में जाते हैं और रास्ते पर सड़क बनाने के लिए ईंटें गिराते हैं और गांव वालों को गेहूं देते हैं, चावल देते हैं और साड़ियां देते हैं और उनसे कहते हैं कि हम लोगों को वोट दीजिए, हम सब गरीबों के दोस्त हैं। केंद्र सरकार जो रुपये देती है, ...वे रुपये राज्य सरकार खर्च नहीं करती और चुनाव के समय खर्च किया जाता है। ...प्रशासन में भी मनमानी करके ये अपने लोगों को मतदान के काम में लगाते हैं। ... सीपीएम के कॉडर का सुपरवाइजर घर-घर में जाता है और कांग्रेस के वोट काट देता है।...
हमारी कांग्रेस पार्टी के कोषाध्यक्ष हैं सीताराम केसरी। कोष वही संभालते हैं। ...मार्क्सवादी पार्टी में कोषाध्यक्ष क्यों नहीं होता? क्योंकि कोषाध्यक्ष होने से सबको मालूम हो जाएगा कि आपके पास कितने रुपये हैं और वे रुपये आपके पास कहां से आते हैं? इसीलिए आप लोग अपनी पार्टी में कोषाध्यक्ष नहीं रखते हैं। पहले आपकी पार्टी का दफ्तर मिट्टी के मकान में था, लेकिन अब आठ वर्ष पहले जब से आप सत्ता में आए हैं, उसके बाद से आपकी पार्टी के पास बहुत बड़ा भवन हो गया है। आज पांच मंजिली इमारत में आपकी पार्टी का दफ्तर है। ये रुपये आपके पास कहां से आए? ये सारे रुपये, करोड़ों रुपये, आपने सत्ता में आने के बाद पार्टी के लिए इकट्ठा किए। अगर आपकी पार्टी में कोषाध्यक्ष होगा, तो यह सारा सबको मालूम हो जाएगा, इसीलिए आप लोग अपनी पार्टी में कोषाध्यक्ष नहीं रखते हैं।
पश्चिम बंगाल में बूथ कैप्चरिंग होती हैं, बोगस वोटिंग होती है। वहां पुलिस के पास न ढाल है, न तलवार है, न कोई हथियार है। बूथों पर पुलिस के लोगों को लाठी लेकर खड़ा कर दिया जाता है। इससे पुलिस के लोग कैसे बूथ कैप्चरिंग या बोगस वोटिंग को रोक सकते हैं? यह जो वहां चल रहा है, उसको रोका जाना चाहिए।
    (लोकसभा में दिए गए उद्बोधन से)