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किसानों को भड़काने का काम न कीजिए

महोदय, बड़ा दर्द है इनके दिल में किसानों के लिए, लेकिन मैं पूछना चाहता हूं कि यही लोग पिछली सरकार में बैठे थे, तब इन्होंने क्या किया किसानों के लिए? कौन सा शोर मचाया और कौन सा सवाल उठाया था? ये ...

किसानों को भड़काने का काम न कीजिए
Monika Minalबीरेंद्र सिंह राव,तत्कालीन केंद्रीय कृषि मंत्री Fri, 23 Feb 2024 10:28 PM
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महोदय, बड़ा दर्द है इनके दिल में किसानों के लिए, लेकिन मैं पूछना चाहता हूं कि यही लोग पिछली सरकार में बैठे थे, तब इन्होंने क्या किया किसानों के लिए? कौन सा शोर मचाया और कौन सा सवाल उठाया था? ये किसानों को मारते रहे और खुश होते रहे और आज ये हमसे सवाल करते हैं? तीन साल के अंदर ही इन्होंने किसानों का सत्यानाश करके रख दिया और आज किसानों के हमदर्द बन रहे हैं?
...मैं सिर्फ किसान हूं और कुछ नहीं और किसान की आमदनी का खाता हूं और मेरी आमदनी किसी दूसरी चीज से नहीं है। न दुकान है, न धंधा है और न किराया मैं खाता हूं। न व्यापार है और न फैक्टरी है और आप लोगों के कई-कई धंधे हैं, इसलिए किसान की बात मैं ज्यादा जानता हूं, आपसे ज्यादा जानता हूं। ...
मैं मानता हूं कि दाम निर्धारण में अभी हम समानता पैदा नहीं कर सके हैं, लेकिन समानता लाने का उसूल भी इसी सरकार ने अपनाया है पहली बार। ...हमने एग्रीकल्चर प्राइसेज कमीशन को हुक्म दिया है कि वह इसका ध्यान रखे। हम कृषि उत्पादन और दूसरे उत्पादनों में कुछ न कुछ समानता पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं, यह काम आपने कभी नहीं किया।... 
महाराष्ट्र में, नासिक में, गुजरात में और दूसरी जगह कितने आदमी मरे या कितने कैद किए गए, यह मेरा काम नहीं है। मेरा काम किसानों की बातों का जवाब देना है। किसान और किसानों के दोस्तों को समझाने की कोशिश करना है, लेकिन मुझे अफसोस जरूर है इस बात का कि जहां हमने किसानों को सबसे ज्यादा फायदा दिया, उनकी सबसे अधिक सेवा की, नासिक के इलाके में, यह विरोध प्रदर्शन वहीं से जोर पकड़ गया। हमने छह करोड़ रुपये नेफेड को दिए प्याज की खरीद के लिए, प्याज सड़ रहा था, उसे कोई पूछता नहीं था, हमने 45 और 60 रुपये के दरमियान प्याज की खरीदी शुरू करवाई और उसका सबसे ज्यादा फायदा नासिक के किसानों को पहुंचा। आज नासिक के वही किसान अगर विरोध प्रदर्शन करें, तो दुख जरूर होता है और अफसोस यह होता है कि वे भड़काने में आ जाते हैं।...
महाराष्ट्र में गन्ने की कीमत के बारे में कोई वजह नहीं है कि कोई आंदोलन हो, पंजाब में कोई आंदोलन नहीं, हरियाणा में नहीं, उत्तर प्रदेश में नहीं, बिहार में नहीं, ... पंजाब में जो आंदोलन हुआ, वह बस भाड़ा के लिए था। आप कहते हैं, यह राजनीति से प्रेरित नहीं है, जॉर्ज फर्नांडिस यहां चलते सत्र के बीच से उठकर क्या कर रहे हैं? क्या यह राजनीति प्रेरित नहीं है? नारायण स्वामी तमिलनाडु से आकर पंजाब का एक हफ्ते का चक्कर लगा गए हैं, वह राजनीति के लिए नहीं आए थे, तो क्या किसान के खेतों में पानी देने के लिए आए थे?...
महाराष्ट्र में गन्ने के मूल्य पर किसानों को असंतोष हो, इसकी कोई वजह नहीं है। वहां गन्ने का प्रति हेक्टेयर उत्पादन देश में सबसे ज्यादा है। ...वहां शूगर की रिकवरी का रेट सारे देश में सबसे ज्यादा है। ...वहां किसानों को गन्ने की सबसे ज्यादा कीमत मिल रही है, ...महाराष्ट्र का किसान कैसे कह सकता है कि वहां गन्ने की मुनासिब कीमत नहीं है? ये सब चीजें भड़काने की वजह से हुई हैं। हम अपने किसानों को समझाएंगे। उनसे हम बात करेंगे। उनकी जो उचित बात होगी, उसको सुनेंगे भी।... प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्रियों को हिदायत दी है कि किसानों के साथ हमदर्दी का सलूक किया जाए, उनसे बातचीत की जाए। यह किसानों की भोली कौम है।  
मैं सदन को आश्वासन देना चाहता हूं कि सरकार किसानों को लाभदायक मूल्य दिलाने के लिए सब कुछ करेगी। ग्रामीण पुनर्निर्माण मंत्रालय की ग्रामीण विकास की सभी योजनाएं कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए ही हैं। किसानों के कल्याण के लिए, बढ़े हुए उत्पादन के लिए प्रोत्साहन की व्यवस्था की गई है। मुझे उम्मीद है, किसान समझ गए होंगे कि यह सरकार बहुत-सी कठिनाइयों एवं बाधाओं के बावजूद उनकी दशा सुधारने के लिए सब कुछ कर रही है तथा उन्हें अच्छे मूल्य, अच्छा प्रोत्साहन तथा उर्वरकों, बीजों, कीटनाशक दवाओं, बिजली, पानी की दरों तथा कई अन्य बातों में अधिक राज-सहायता दी जाएगी। मैं समझता हूं कि किसान यह जानते हैं कि केवल हमारी सरकार उनकी हितैषी है और ये तथाकथित नेता और शोषक ही आंदोलन कर रहे हैं, जो वस्तुत: उनके मित्र नहीं हैं। ये लोग किसानों की भावनाओं से खेलकर उन पर हावी नहीं हो पाएंगे।
    (लोकसभा में दिए गए उद्बोधन से )  

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