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Hindi News ओपिनियन केंद्र सरकार नदी जल विवाद सुलझाएगी 

केंद्र सरकार नदी जल विवाद सुलझाएगी 

दिल्ली में जल का अभाव है और उसके साथ हरियाणा व हिमाचल प्रदेश का विवाद चल रहा है। दरअसल, राज्यों के बीच जल विवाद बहुत पुराने हैं। 29 सितंबर, 1955 को लोकसभा में जल विवाद विधेयक और जल बोर्ड विधेयक पर...

 केंद्र सरकार नदी जल विवाद सुलझाएगी 
Monika Minalगुलजारीलाल नंदा,तत्कालीन केंद्रीय मंत्रीFri, 14 Jun 2024 11:11 PM
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मैं इस विधेयक (जल विवाद विधेयक) का महत्व बता दूं। यह अंतरराज्यिक नदियों और इन नदियों से संबंधित विवादों के विषय में है। हमारे देश की ज्यादातर नदियां अंतरराज्यिक नदियां हैं। हमारे देश की अधिकांश समृद्धि तथा आर्थिक विकास इन जल संसाधनों के विकास पर निर्भर है और यदि नदियों के विकास में कोई चीज आड़े आती है, तो उससे देश की उन्नति में गंभीर रुकावट पड़ जाएगी। अंतरराज्यिक नदियों के जल के काम में लाए जाने के संबंध में पहले भी विवाद हो चुके हैं। ...कुछ जल विवाद  50 वर्ष से चलते चले आ रहे हैं और अभी तक निपटाए नहीं गए हैं। ...यदि किसी महत्वपूर्ण सिंचाई तथा विद्युत परियोजना को लागू करने में एक वर्ष की भी देरी हो जाती है, तो समस्त राष्ट्र को उससे हानि पहुंचती है और करोड़ों रुपये की क्षति हो जाती है।... 
फिलहाल, ऐसे विवाद को निबटाने के लिए योजना आयोग और करार की संभावना के अतिरिक्त अन्य कोई मशीनरी देश में इस समय नहीं है। संविधान बनाते समय यह अनुभव किया गया था कि यह आवश्यकता उत्पन्न होगी और इस प्रयोजन विशेष के लिए अनुच्छेद 262  में उपबन्ध किया गया। संसद को ऐसा विधान पारित करने के लिए शक्ति देने वाला एक विशिष्ट उपबंध किया गया है, जिसके द्वारा अंतरराज्यिक जल-विवाद के निबटारे के लिए एक व्यवस्था बनाई गई है। इसी के अनुसार, इस विधेयक को हमने यहां रखा है।...
यदि किसी राज्य सरकार को इस प्रकार की आशंका हो अथवा जिसको विवाद का सामना करना पड़ रहा हो या जो यह समझती हो कि राज्य या उसके निवासियों के हितों की अंतरराज्यिक नदी घाटी के जल के संबंध में हानि हुई है अथवा होने की संभावना है, तो नए कानून के तहत उसे संबोधित किया जा सकेगा। ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर राज्य सरकार इस मामले को केंद्रीय सरकार के पास भेज सकती है। तत्पश्चात केंद्र सरकार इस प्रश्न का भार अपने ऊपर लेती है। ऐसे विवाद के निबटारे के लिए जिन उपायों की व्यवस्था की गई है, वे बताए जा चुके हैं। ... अब न्यायाधिकरण को नियुक्त करना केंद्रीय सरकार का दायित्व हो जाता है। इस न्यायाधिकरण के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा केवल एक ऐसे व्यक्ति का नाम निर्देशन किया जाएगा, जो उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायालयों का न्यायाधिपति हो या रह चुका हो। इसके अतिरिक्त न्यायाधिकरण को विधिक सहायता देने के लिए यह व्यवस्था की गई है कि सलाहकार नियुक्त किए जा सकते हैं। केंद्र सरकार को इसका दायित्व सौंपा गया है। इस संबंध में सिफारिश करने में केंद्र सरकार द्वारा अपने अधिकार का उपयोग किया जा सकता है। 
हम कुछ ही समय बाद एक अन्य विधेयक(जल बोर्ड विधेयक) पर विचार करने जा रहे हैं। इन दोनों में क्या संबंध है...। ये दोनों विधेयक एक दूसरे के पूरक हैं। वे अलग होते हुए भी एक दूसरे से संबंधित हैं। बहरहाल, यह विधेयक केवल विवादों के प्रश्न से ही संबंधित है। मुझे इस खंड की शब्दावली दुहराने की जरूरत नहीं है। सामान्यत: विवाद जल के बंटवारे और नदियों से विद्युत पैदा करने की क्षमता के आवंटन के संंबंध में उत्पन्न होते हैं। ये विवाद नदी के जल को एक मैदान से दूसरे मैदान में मोड़ने पर भी उत्पन्न होते हैं। विवाद का दूसरा कारण यह है कि परियोजना को लागू करने के लिए अपेक्षित निर्माण किसी अन्य राज्य में करने पड़ते हैंऔर उनसे लाभ दूसरे राज्य के लोगों को होता है। अत: जो राज्य जल या विद्युत आदि से लाभ उठाने का अधिकारी होता है, वह तब तक उससे लाभ नहीं उठा सकता, जब तक कि दूसरा राज्य उससे सहयोग न करे...। विद्युत परियोजना में विभिन्न स्थितियों का प्रश्न भी पैदा हो सकता है। एक स्थिति एक राज्य में हो सकती है और दूसरी दूसरे राज्य में। ऐसी दशा में समायोजन की भी जरूरत होती है ।
    (लोकसभा में दिए गए उद्बोधन से)