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3 दिसंबर, 2020|11:59|IST

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मदद और सम्मान मांगती ईमानदारी 

ऋण चुकाने में ईमानदारी को प्रोत्साहन देने की ऐतिहासिक शुरुआत होने जा रही है। केंद्र सरकार ने संकेत दिया है कि कोविड-19 के कारण लागू मोरेटोरियम के दौरान जिन ऋणधारकों ने अपनी ईएमआई किस्तों का ईमानदारी से भुगतान किया है, उन सभी को दिवाली के पहले कुछ विशेष वित्तीय लाभ दिए जाएंगे। ऋण चुकाने के मोर्चे पर सुधार की दिशा में उठाया जा रहा यह बेहतरीन कदम है, बल्कि इससे कुल ऋण बाजार पर सकारात्मक असर पडे़गा। आम तौर पर देखा यह गया है कि कर्ज न चुकाने वालों को ही रियायत देने के बारे में सोचा जाता है, लेकिन ऋण चुका रहे लोग भुला दिए जाते हैं। 
इन दिनों एक ओर, केंद्र सरकार 2 नवंबर से पहले चक्रवृद्धि ब्याज माफी का लाभ छोटे कर्जदारों को देने के लिए तैयार है, तो वहीं दूसरी ओर, बैंकों ने भी अपने बही-खातों में कर्ज संबंधी अतिरिक्त प्रावधानों को आगे बढ़ाया है। एक ऐसे समय में, जब मोरेटोरियम यानी ऋण स्थगन को अपनाने वाले कर्जधारकों को लाभ दिया जा रहा है, तो जिन कर्जधारकों ने ऋण स्थगन को नहीं अपनाया है, उन्हें भी ईमानदारीपूर्वक नियमित ऋण भुगतान के एवज में लाभ अवश्य दिया जाना चाहिए। ये लाभ ऐसे होने चाहिए, ताकि सबको असर या फायदा दिखे। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि एक-दो किस्त की माफी से इस प्रोत्साहन को ज्यादा बल नहीं मिलने वाला। प्रोत्साहन ऐसा होना चाहिए कि उसका तात्कालिक असर हो और ईमानदारी से ऋण चुकाने वालों की तादाद बढ़े। ऋण क्षेत्र में ईमानदारी के साथ ही केंद्र सरकार को कर भुगतान के क्षेत्र में भी ईमानदारी को प्रोत्साहित करने की कोशिश करनी चाहिए। 
इसमें कोई दो मत नहीं कि सरकार द्वारा ईमानदार करदाताओं के साथ न्यायसंगतता के लिए कुछ कदम उठाए गए हैं, लेकिन इन कदमों का प्रचार होना भी जरूरी है। नवीनतम कानूनों ने कर-प्रणाली में कानूनी बोझ को कम कर दिया है। ‘विवाद से विश्वास’ योजना जैसी पहल ने अधिकांश मामलों को अदालत से बाहर निपटाने का मार्ग प्रशस्त किया है, कर स्लैब को भी मौजूदा सुधारों के एक हिस्से के रूप में युक्तिसंगत बनाया गया है, लेकिन अभी भी करदाताओं के पक्ष में ईमानदार पहल की जरूरत है।
भारत दुनिया के सबसे कम कॉरपोरेट टैक्स वाले देशों में से एक है। उल्लेखनीय यह भी है कि पिछले छह वर्षों में आयकर जांच के मामलों में कोई चार गुना कमी आई है। यह करदाताओं पर सरकार के भरोसे का प्रतिबिंब है।  वर्ष 2012-13 में जांच की संख्या 0.94 प्रतिशत थी, जो घटकर 2018-19 में 0.26 प्रतिशत तक आ गई है। यह भी उल्लेखनीय है कि जीएसटी से देश में ईमानदार और पारदर्शी व्यापारिक व्यवस्था का निर्माण हो रहा है तथा उद्योग-कारोबार जगत के सुझावों से इसमें लगातार सुधार भी किए जा रहे हैं। इसका बड़ा लाभ देश के ईमानदार कारोबारियों को मिल रहा है। इस व्यवस्था से व्यापारियों के लिए पूरे देश में कहीं पर भी व्यापार करना आसान हुआ है और उनकी कठिनाइयां कम हुई हैं।
हाल ही के महीनों में आयकर व्यवस्था के तहत कई ऐतिहासिक सुधारों को अमलीजामा पहनाया गया है, इनमें करदाता चार्टर, पहचान रहित अपील और पहचान रहित समीक्षा जैसे बड़े सुधार शामिल हैं। अब करदाता चार्टर के लागू होने से आयकर विभाग अपने दायित्वों के लिए पूरी तरह जवाबदेह है और विभाग के काम से संतुष्ट नहीं होने पर करदाता प्रत्येक क्षेत्र में गठित किए गए विशेष प्रकोष्ठ में अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
अब ईमानदार करदाताओं के मद्देनजर कुछ बातों पर ध्यान देना जरूरी है। यह पाया गया है कि बहुत सारे लोगों द्वारा अच्छी आमदनी के बावजूद आयकर का भुगतान नहीं किया जाता है। ऐसे में, उनके कर नहीं देने का भार ईमानदार करदाताओं पर पड़ता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुताबिक, देश की 130 करोड़ की आबादी में से सिर्फ 1.5 करोड़ लोग ही टैक्स देते हैं, यह संख्या बहुत कम है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि 2018 में बजट भाषण देते हुए तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस बात को रेखांकित किया था कि वेतनभोगी लोगों द्वारा दिया जाने वाला आयकर व्यक्तिगत कारोबारी करदाताओं द्वारा चुकाए गए आयकर का करीब तीन गुना होता है। 
चूंकि वेतनभोगी वर्ग नियमानुसार अपने वेतन पर आयकर चुकाता है और आमदनी को कम बताने की गुंजाइश नगण्य होती है। ऐसे में, वेतनभोगी वर्ग के लाखों आयकरदाता यह कहते दिखाई देते हैं कि वे तो अपनी आमदनी पर ईमानदारी से आयकर का भुगतान कर रहे हैं, लेकिन अब उन लोगों पर भी सख्ती जरूर की जानी चाहिए, जो अच्छी कमाई के बाद भी टैक्स नहीं दे रहे या फिर हेराफेरी करके कम टैक्स दे रहे हैं। यदि सरकार उपयुक्त रूप से करदाताओं की संख्या बढ़ाएगी, तो इसका लाभ अधिक कर बोझ का सामना कर रहे ईमानदार करदाताओं को अवश्य मिल पाएगा। इससे ईमानदार करदाताओं की संख्या भी बढ़ेगी।
कर क्षेत्र में ईमानदारी बढ़ाने के लिए सरकार को संबंधित व्यावहारिक पहलुओं पर विशेष ध्यान देना होगा। आयकर विभाग के ऑनलाइन सिस्टम को बहुत सरल व मजबूत बनाना होगा। हर स्तर पर ईमानदार करदाताओं को कर चुकाने में सुविधा देने के साथ-साथ सम्मान भी देना होगा। टैक्स सरलीकरण से भी ईमानदारी बढ़ेगी। जहां देश के ईमानदार करदाता लाभान्वित होंगे, वहीं इससे देश की अर्थव्यवस्था भी गतिशील होगी। हम उम्मीद करें कि जब सरकार प्रत्यक्ष कर सरलीकरण की डगर पर आगे बढ़ रही है, तब यदि लोग ईमानदारी से कर चुकाते हुए न दिखाई दें, तो सरकार टैक्स वसूली की अपील से ज्यादा टैक्स वसूली की सख्ती की डगर पर आगे बढ़ेगी। निस्संदेह, ऐसा किए जाने से ईमानदार करदाताओं को कर के अधिक बोझ से बचाया जा सकेगा और अर्थव्यवस्था के लिए अधिक धन जुटाया जा सकेगा।
उम्मीद है कि सरकार एक ऐसी महत्वाकांक्षी नई नीति तैयार करेगी, जिसके तहत लगातार ईमानदारी से पूरा कर और ऋण चुकाने वालों को ‘सम्मानित’ व प्रोत्साहित किया जाए। ऐसी नीति से पूरे देश में यही संदेश जाएगा कि अब ईमानदार करदाताओं का उपहास नहीं होगा, उन्हें अपनी ईमानदारी के लिए पछताना नहीं पडे़गा, बल्कि उन्हें सम्मान मिलेगा और हार्दिक संतोष भी। 
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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  • Web Title:hindustan opinion column 21 october 2020