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1 अप्रैल, 2020|11:41|IST

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खौफ के बीच महामारी से लड़ता चीन

अनिल आजाद पांडेय

चीन के वुहान शहर से शुरू हुआ नोवेल कोरोना वायरस का कहर अमेरिका, ब्रिटेन, भारत और फिलीपींस सहित दुनिया के 31 देशों तक फैल चुका है। यह जानलेवा वायरस अब तक न जाने कितने लोगों को अपना शिकार बना चुका है। हजारों लोग अस्पतालों में अपना इलाज करा रहे हैं, मरने वालों का आंकड़ा भी लगातार बढ़ता जा रहा है। वुहान जो कि मध्य चीन के हुबेई प्रांत की राजधानी है, इस घातक वायरस का केंद्र है। अब तक हुई अधिकतर मौतें व वायरस की जद में आए अधिकांश लोग इसी इलाके से हैं। जो लोग इस प्रांत में गए थे या किसी वजह से स्थानीय लोगों के संपर्क में आ गए, वे भी प्रभावित हुए हैं। यह भी देखने में आया है कि मरने वालों में बहुत से ऐसे लोग हैं, जो पहले से ही किसी बीमारी से जूझ रहे थे या उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता थोड़ी कमजोर थी। इस वायरस के तेजी से प्रसार ने चीन सरकार और अधिकारियों के साथ-साथ विश्व स्वास्थ्य संगठन को भी परेशान कर रखा है। डब्ल्यूएचओ के अधिकारी स्थिति का जायजा लेने चीन पहुंच चुके हैं और संभवत: इसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस महामारी के मुकाबले के लिए प्रयास तेज होंगे। वैसे चीन को विश्व स्वास्थ्य संगठन और संयुक्त राष्ट्र जैसे संगठनों का पूरा साथ मिल रहा है। यहां बता दें कि साल 2018 में वुहान में ही भारतीय प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति के बीच अनौपचारिक शिखर वार्ता हुई थी।

चीन में जब इस वायरस का कहर शुरू हुआ, तब मैं भारत में ही था। वहां खबरें पढ़ने और देखने के बाद मन में तमाम आशंकाएं उठने लगी थीं। ऐसा लगा कि चीन में स्थिति बहुत भयावह है, लोगों ने मुझे वापस न जाने की सलाह दी। लेकिन जब मैं 28 जनवरी की फ्लाइट से वापस बीजिंग पहुंचा, तो देखा कि सड़कें खाली अवश्य हैं, मगर स्थिति वैसी खतरनाक नहीं है, जैसी बताई जा रही थी। चीन में लगभग 10 वषार्ें से रहते हुए कह सकता हूं कि चीन सरकार अपने नागरिकों के स्वास्थ्य का बहुत ख्याल रखती है। इस वायरस ने ऐसे समय में तांडव मचाना शुरू किया, जब चीन में वसंत त्योहार (चीन का नया साल) का जश्न मनाया जाने वाला था। इस फेस्टिवल को यहां बहुत खास माना जाता है, अधिकांश लोग अपने शहर या कस्बे जाकर परिवार के साथ त्योहार मनाते हैं या फिर घूमने निकल जाते हैं। इस तरह बीजिंग, शंघाई जैसे बड़े महानगर लगभग खाली हो जाते हैं। लेकिन इस बार वायरस के प्रकोप के चलते जो लोग जहां गए, वहीं फंसकर रह गए हैं। त्योहार की छुट्टियां खत्म कर लोग एक फरवरी तक लौट आते, इस बीच वायरस की खबर ऐसी फैली कि केंद्र सरकार को आपात कदम उठाने पड़े, ताकि वायरस के प्रसार को और व्यापक होने से रोका जा सके। 

इससे पहले जनवरी के आखिरी सप्ताह में वुहान और हुबेई प्रांत के कुछ शहरों से बाहर जाने पर पाबंदी लगा दी गईथी, जो अभी भी जारी है। अन्य प्रभावित इलाकों के लिए भी ट्रेन, बस आदि सेवा भी बंद है, जबकि हर एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, मेट्रो स्टेशन, बस स्टेशनों आदि पर भी पूरी सावधानी बरती जा रही है। साथ ही, सभी लोग मास्क पहनकर ही घर से बाहर निकल रहे हैं। सार्वजनिक स्थलों पर बिना मास्क के घूमने वालों के खिलाफ सरकार ने कार्रवाई के निर्देश भी दिए हैं। इतना ही नहीं, शहरों में मोहल्लों व कॉलोनियों में भी आने-जाने वालों पर पूरी निगरानी रखी जा रही है। उधर, देश भर की अधिकांश कंपनियों में 10 फरवरी तक छुट्टियां कर दी गई थीं। उनमें अब काम शुरू होने लगा है, हालांकि कुछ कंपनियां अपने कर्मचारियों से घर से काम करवा रही हैं। जो लोग ऑफिस जा रहे हैं, उनकी ऑफिस पहुंचने से पहले गेट पर थर्मल स्क्रीनिंग की जा रही है। खतरे को देखते हुए स्कूल-कॉलेज सब बंद हैं। पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए शिक्षकों द्वारा लगातार ऑनलाइन कक्षाएं ली जा रही हैं।

शहरों के अधिकांश बाजार भी नहीं खुल रहे, जो बड़े सुपर मार्केट खुले हैं, उनमें प्रवेश करने से पहले हर ग्राहक के शरीर का तापमान लिया जाता है। इस महामारी की शुरुआत में चीन के बाजारों में सामान की किल्लत होने और कीमतें बढ़ने की अफवाह भी फैली। लेकिन यहां जरूरत का लगभग हर सामान उपलब्ध है, उसके दाम भी पहले जैसे ही हैं। पर मास्क की जरूर कमी महसूस की जा रही है, इसके लिए कई देशों से मास्क और सुरक्षात्मक कपड़े चीन में पहुंचाए जा रहे हैं। जाहिर है, पिछले कई दिनों से जारी लॉकआउट से चीन को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है, लेकिन चीन सरकार का कहना है कि महामारी की रोकथाम और नागरिकों की रक्षा करना उसकी प्राथमिकता है। इसके चलते ही सरकार ने बड़े पैमाने पर पाबंदी लगाई है। इसका असर भी देखने को मिल रहा है। बीजिंग, शंघाई, क्वांगचो आदि बड़े शहरों में संक्रमित मरीजों की तादाद बहुत कम है। पर अफवाहों का बाजार हर जगह गरम है।

जानकार कह रहे हैं कि चीन ने 2002 की सार्स महामारी की तुलना में इस बार कहीं अधिक पारदर्शिता और सक्रियता दिखाई है। चीन सरकार इस बाबत कितनी गंभीर है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चीनी प्रधानमंत्री इस पूरे मिशन का नेतृत्व कर रहे हैं। राष्ट्रपति भी लगातार निगरानी रखे हुए हैं। हालांकि हुबेई प्रांत में स्थिति अब तक चिंताजनक बनी हुई है। महामारी के विकराल रूप के लिए हुबेई की स्थानीय सरकार को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। शुरुआत में सरकार ने इस महामारी को गंभीरता से नहीं लिया था। हालांकि स्थानीय डॉक्टरों ने सार्स जैसी किसी महामारी के फैलने की आशंका जाहिर कर दी थी। इस खतरे का खुलासा करने वाले 34 वर्षीय डॉक्टर की मरीजों से संक्रमित होने के बाद पिछले दिनों मौत हो गई। इस युवा डॉक्टर को चीन में बहुत सम्मान दिया जा रहा है। यह समय चीन पर सवाल उठाने, उसके साथ भेदभाव करने या अफवाह फैलाने का नहीं है। यह वक्त चीनी नागरिकों और दुनिया को इस खतरनाक वायरस से बचाने के लिए एकजुट होने का है। संक्रामक वायरस या महामारी भौगोलिक सीमाओं को नहीं देखती।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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  • Web Title:Hindustan Opinion Column 17th February 2020