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28 अक्तूबर, 2020|10:55|IST

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मामूली ठगी या सोशल इंजीनियरिंग

हरजिंदर वरिष्ठ पत्रकार

नुकसान बेशक उतना बड़ा नहीं हुआ, जितना हो सकता था। कल्पना कीजिए, अमेरिका के राष्ट्रपति पद पर पहुंचने की उम्मीद बांध रहे जो बिडेन के ट्विटर अकाउंट में सेंध लगाकर कोई उन्हें राजनीतिक रूप से कितना नुकसान पहुंचा सकता था। यही स्थिति पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ भी हो सकती थी। माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स के अकाउंट में सेंध लगाकर उनके व्यावसायिक हितों और उनकी संस्था द्वारा किए जा रहे सामाजिक कार्यों को भी भारी नुकसान पहुंचाया जा सकता था। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। जिन साइबर सेंधमारों ने अमेरिका की कई सारी नामी-गिरामी हस्तियों के अकाउंट हैक किए, उन्होंने इन हस्तियों के नाम से ट्विटर पर बस यही संदेश डाला कि समाज को पैसे देने का समय आ गया है, आप मेरे अकाउंट में एक हजार डॉलर डालें, मैं दो हजार डॉलर वापस करूंगा।
यह लगभग वही भाषा है, जिसे हमारे देश के कई ठग तांत्रिक के वेष में आकर धनपतियों से बोलते हैं और रातों-रात धन दोगुना कर देने का आश्वासन देते हैं। कुछ लोग, जो उनके झांसे में आ जाते हैं, वे अपनी जमा-पूंजी से हाथ धो बैठते हैं। ऐसे झांसे में आने वाले लोग सिर्फ हमारे देश में नहीं होते, दुनिया भर में होते हैं। इस मामले में भी यही हुआ। जब तक इस हैकिंग का खुलासा हुआ, हैकर्स के खाते में एक लाख दस हजार डॉलर के बिटक्वाइन पहुंच चुके थे। साइबर सेंधमारों ने जिस तरह से बहुत बड़ी हस्तियों को निशाना बनाया, उस लिहाज से यह रकम कोई बहुत बड़ी नहीं है। इसलिए एक आशंका यह भी है कि हैकर्स का असली मकसद शायद पैसे बनाना नहीं था, बल्कि वे इसके जरिए कुछ और संदेश देना चाहते थे। वह संदेश क्या हो सकता है?
ऐसे मौकों पर पहली आशंका यही होती है कि हैकर्स अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन करते हुए यह बताना चाहते थे कि इस साइबर संसार में अब कोई भी निरापद नहीं है। हैकर्स अक्सर नेटवर्क के सुरक्षा इंतजामों को नाकारा साबित करने और अपने कौशल के झंडे गाड़ने के लिए इस तरह के कारनामों को अंजाम देते रहते हैं। लेकिन इस बार की सेंधमारी में एक और एंगल भी देखा जा रहा है। अमेरिका का राष्ट्रपति चुनाव बहुत दूर नहीं है। प्रचार शुरू हो चुका है। यहां इस बात का ध्यान रखना भी जरूरी है कि ज्यादातर विशेषज्ञ यही मानते हैं कि साल 2020 का अमेरिकी चुनाव ट्विटर पर लड़ा जाएगा। इस बार के चुनाव में सोशल मीडिया इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है कि कोविड-19 के कारण लोग शायद उस तरह से अपने घरों से नहीं निकलेंगे, जैसे वे पिछले चुनावों में निकलते आए हैं।
जिन लोगों के अकाउंट हैक हुए हैं, उनमें सभी तो नहीं, लेकिन बहुत सारे लोग ऐसे हैं, जो सक्रिय या निष्क्रिय तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विरोधी खेमे के माने जा सकते हैं। इनमें कुछ  ऐसे हैं, जो राजनीति से सीधा नाता तो नहीं रखते, लेकिन किसी कारण से उनकी छवि ऐसी बना दी गई है। इसलिए एक अनुमान यह लगाया जा रहा है, जो बहुत से लोगों को दूर की कौड़ी  नहीं लगता कि यह किसी ट्रंप समर्थक समूह का कारनामा हो सकता है। यह माना जाता है कि डोनाल्ड ट्रंप के राजनीतिक उभार के साथ ही अमेरिका में एक ऐसा कल्ट तैयार हुआ है, जो किसी भी ट्रंप विरोधी पर कभी भी, कहीं भी अपने आप टूट पड़ता है।
इस मामले में एक और तथ्य ऐसा है, जो बताता है कि बात सिर्फ साधारण ठगी की नहीं, बल्कि उससे आगे की है। खुद ट्विटर ने स्वीकार किया है कि इस मामले में सेंधमारों ने उस साइबर औजार का इस्तेमाल किया है, जो कंपनी के आंतरिक सिस्टम का हिस्सा है। इसका एक अर्थ यह भी लगाया जा रहा है कि कंपनी के भीतर कोई है, जिसने हैकर्स की मदद की है। इसमें कोई हैरत की बात नहीं है। पिछले कुछ समय में अमेरिकी समाज में ऐसा ध्रुवीकरण हुआ है कि कंपनियों में काम करने वाले आम लोग भी कई मौकों पर किसी राजनीतिक धारा के सक्रिय कार्यकर्ता की तरह बर्ताव करते दिखाई दिए। इसका एक उदाहरण 2017 का है, जब ट्विटर के एक कर्मचारी ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का अकाउंट  कुछ  वक्त के लिए डिलीट कर दिया था। इसीलिए इस बार की हैकिंग को ‘सोशल इंजीनिर्यंरग’ का नतीजा भी बताया जा रहा है। हालांकि, हमारे यहां ‘सोशल इंजीनिर्यंरग’ की शब्दावली राजनीति में एक अलग अर्थ में इस्तेमाल होती है, लेकिन अमेरिका में इसका इस्तेमाल साइबर सुरक्षा में किया जाता है। वहां इसका अर्थ होता है, किसी व्यक्ति को वैचारिक या मनोवैज्ञानिक तरीकों से प्रभावित करके सुरक्षा चक्र तोड़ने में उसकी मदद लेना या उसके सहारे हैकिंग करना। इस मामले में भी यही हुआ है। यह बात खुद ट्विटर ने भी घुमा-फिराकर स्वीकार की है।
पूरा सच क्या है, हो सकता है कि यह बहुत जल्द या शायद कभी सामने न आए। पैसा यदि दूसरे तरीकों से एक से दूसरे खाते में जाता है, तो उसे पकड़ने की गुंजाइश कुछ हद तक बनी रहती है। पर बिटक्वाइन के जरिए होने वाले विनिमय का सुराग पाना लगभग असंभव होता है। इस  प्रकरण ने भविष्य की बहुत सारी राजनीतिक दुरभिसंधियों की आशंकाएं पैदा की हैं। इसी के साथ एक अन्य स्तर पर हमें यह संदेश भी दिया है कि सोशल मीडिया पर जब बिल गेट्स जैसे लोग सुरक्षित नहीं, तो हमारे-आपके जैसे आम आदमी की भला क्या बिसात है!
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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  • Web Title:hindustan opinion column 17 july 2020