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मोबाइल फोन की सुरक्षा में लगातार सेंध

दुनिया में आज इंसानों की आबादी से भी ज्यादा मोबाइल फोन कनेक्शन हैं। उनमें से हर फोन को उसी तरह सुरक्षा कवच की जरूरत होती है, जैसे कोई मजबूत संस्थान या उपक्रम अपने कंप्यूटर और डिजिटल सिस्टम को...

मोबाइल फोन की सुरक्षा में लगातार सेंध
Amitesh Pandeyप्रांजल शर्मा, डिजिटल नीति विशेषज्ञThu, 02 Nov 2023 10:49 PM
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दुनिया में आज इंसानों की आबादी से भी ज्यादा मोबाइल फोन कनेक्शन हैं। उनमें से हर फोन को उसी तरह सुरक्षा कवच की जरूरत होती है, जैसे कोई मजबूत संस्थान या उपक्रम अपने कंप्यूटर और डिजिटल सिस्टम को प्रदान करता है। मोबाइल फोन व डिजिटल तंत्र को पुख्ता सुरक्षा की जरूरत है, पर क्या यह संभव हो पा रहा है? दुनिया में सुरक्षित समझे जाने वाले एप्पल फोन की टेपिंग और सुरक्षा को लेकर विवाद उठा है। दरअसल, अभी कोई ऐसा सिस्टम नहीं है, जिसमें सेंध को पूरी तरह असंभव माना जाए। कुल मिलाकर, एप्पल जैसे विशेष फोन के ग्राहकों तक यह बात पहुंची है कि उनका फोन भी हैकिंग, टेपिंग से सुरक्षित नहीं है।
दरअसल, हम ऐसे विवादों के दौर में जी रहे हैं, जिनमें समय के साथ ऐसे विवाद सामान्य होते चले जाएंगे। डिजिटल विस्तार के साथ ही मोबाइल फोन की दुनिया भी तेजी से बढ़ रही है। जीएसएमए इंटेलिजेंस की नवीनतम सूचना आज दुनिया भर में 5.60 अरब मोबाइल ग्राहकों की ओर इशारा कर रही है, जो कुल जनसंख्या का 69.4 प्रतिशत के बराबर हैं। 14.50 करोड़ नए उपयोगकर्ताओं के जुड़ने के साथ, पिछले वर्ष मोबाइल फोन अपनाने वालों की संख्या में 2.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है। इंटरनेट उपयोगकर्ताओं का आंकड़ा पिछले वर्ष में 3.7 प्रतिशत बढ़ा है और अक्तूबर 2023 तक 5.30 अरब तक पहुंच गया है। यह आंकड़ा दुनिया की आबादी के 65.7 प्रतिशत के बराबर है, हालांकि, ऐसे आंकड़े देर से मिलते हैं, अत: वास्तविक इंटरनेट पहुंच इन आंकड़ों से कहीं अधिक होने की संभावना है।
अगले कुछ वर्षों में मोबाइल उपयोगकर्ताओं की आबादी लगातार बढ़ने वाली है। नए-नए उपयोगकर्ता जुड़ते चले जाएंगे। दुनिया के डिजिटलीकरण को अब थामना मुश्किल है, ऐसे में, डिजिटल उपकरण की सुरक्षा की चिंता भी बढ़ती चली जाएगी। एक विशेषज्ञ को जितनी मोबाइल फोन सुरक्षा की जरूरत है, उतनी ही सुरक्षा की जरूरत एक आम उपभोक्ता को भी है। यह बात छिपी नहीं है कि बहुत अनुभवी मोबाइल उपयोगकर्ताओं को भी धोखा दिया जा सकता है। ऐसी-ऐसी धोखाधड़ी की जाती है कि मोबाइल के नए उपयोगकर्ताओं को सूचित, शिक्षित करने और उनकी सुरक्षा करने की जरूरत वैश्विक अनिवार्यता बन जाती है। जीवन के सामान्य क्रम में लोग अपने वित्त, स्वास्थ्य, निवास, यात्रा और गतिविधि के बारे में बिना जान-समझे भी दूसरों से सूचना साझा करते रहते हैं। मोबाइल फोन इसे रिकॉर्ड करता है और विभिन्न ऐप के साथ साझा करता है, जब तक कि कोई सुरक्षा सेटिंग्स लागू नहीं हो जाती है। वैसे सुरक्षा सेटिंग्स के बावजूद एक मोबाइल उपकरण कई प्रकार के हमलों और हैकिंग के निशाने पर रहता है।
फोन सुरक्षा से जुड़ा मुख्य प्रश्न जवाबदेही को लेकर है। किसी व्यक्ति को डाटा उल्लंघन के लिए किसे जिम्मेदार ठहराना चाहिए? उपकरण निर्माता, सेवा प्रदाता, ऐप निर्माता या सूचना डाटाबेस प्रबंधक? जहां सरकारी सेवाओं के लिए व्यक्तिगत पहचान बैंक, डिजिटल वॉलेट, हवाई अड्डा प्रवेश सेवाओं, कर पोर्टल, स्वास्थ्य बीमा से जुड़ी होती है, वहां सुरक्षा के प्रश्न और बड़े हो जाते हैं।
भारत डाटा सुरक्षा कानून लागू कर रहा है, पर सुरक्षा प्रदान करने की चुनौतियां कानून से परे हैं। भारत को उपभोक्ताओं और नागरिकों की सुरक्षा के लिए लगातार विकसित हो रही साइबर सुरक्षा तकनीक की जरूरत होगी। विभिन्न संस्थानों में रखे जाने वाले हर श्रेणी के डाटा के लिए स्पष्ट जवाबदेही तय करनी पड़ेगी।
2023 में विश्व आर्थिक मंच ने पहली बार साइबर अपराध और साइबर सुरक्षा को दो वर्ष और 10 वर्ष की अवधि में शीर्ष दस वैश्विक जोखिमों में से एक के रूप में स्थान दिया है। स्टेटिस्टा के साइबर सुरक्षा आउटलुक के अनुमान के अनुसार, साइबर अपराध की वैश्विक लागत अगले पांच वर्षों में बहुत बढ़ जाएगी। साल 2022 के 8.44 ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर साल 2027 तक 23.84 ट्रिलियन डॉलर तक हो जाएगी। मतलब, भारतीय मुद्रा में देखें, तो दुनिया में 1992 लाख करोड़ रुपये साइबर अपराध की भेंट चढ़ जाएंगे।
आखिर बचने का उपाय क्या है? मोबाइल उद्योग निकाय जीएसएमए का कहना है कि 5जी नेटवर्क अधिक सुरक्षित है। 5जी ने आज के 4जी/3जी/2जी नेटवर्क में आने वाले कई खतरों से निपटने के लिए सुरक्षा नियंत्रण डिजाइन किया है। 5जी में उन्नत ग्राहक पहचान सुरक्षा और अतिरिक्त सुरक्षा तंत्र शामिल हैं। जीएसएमए के आकलन में कहा गया है कि 5जी मोबाइल उद्योग को नेटवर्क और सेवा सुरक्षा स्तर को ऊपर उठाने का एक अभूतपूर्व अवसर प्रदान करता है। हालांकि, यह आकलन भी इस बात से सहमत है कि कई चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। 5जी ज्ञात खतरों के प्रभाव को सीमित करने के उपाय करता है, पर नई नेटवर्कप्रौद्योगिकियों को अपनाने से उद्योग के प्रबंधन के लिए संभावित नए खतरे सामने आते हैं।
भारत और विश्व स्तर पर एप्पल फोन को हैक करने के प्रयासों की हालिया रिपोर्टें हर किसी के लिए अपनी व्यक्तिगत मोबाइल फोन सुरक्षा में सुधार करने की याद दिलाती हैं। कोई भी मोबाइल निर्माता यह नहीं कह सकता कि उसका उपकरण पूरी तरह सुरक्षित है। कुछ हद तक जिम्मेदारी लोगों पर भी है। उन्हें उन ऐप के बारे में सावधान रहना होगा, जिन्हें वे डाउनलोड करते हैं और जिन लिंक पर वे क्लिक करते हैं। जागरूकता बढ़ने के बावजूद ओटीपी या पासवर्ड साझा करना अभी भी एक बड़ी समस्या है। आमतौर पर यदि लोगों के एप्पल फोन को निशाना बनाया जा रहा है, एप्पल उन्हें अलर्ट भेजने का प्रयास करता है। भारत में ताजा मामले में कई अलर्ट भेजे गए। साइबर सुरक्षा के लिए सरकारी एजेंसी (सीईआरटी-इन) ने भी अक्तूबर में अलर्ट भेजा था। अब सीईआरटी-इन ने अपने दिशा-निर्देशों में कहा है कि एप्पल उत्पादों में कई कमजोरियां हैं, जो एक हमलावर को संवेदनशील जानकारी तक पहुंचने, मनमाना कोड बनाने, सुरक्षा उपायों को पार करने की अनुमति दे सकती हैं।
नियामक दृष्टिकोण से नीति निर्माताओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि लोगों की सूचनाओं को सुरक्षित रूप से सहेजा जाए। निजी क्षेत्र की जो कंपनियां हार्डवेयर बनाती हैं या जो ऐप आधारित या ऑनलाइन सेवाएं देती हैं, वे भी हमारा डाटा संग्रहीत करती हैं। उन्हें डाटा सुरक्षा के लिए जवाबदेह बनाना होगा। यह हैकर्स और अपराधियों के खिलाफ एक सतत लड़ाई है। अब कोई भी इसके बारे में लापरवाही नहीं बरत सकता। 
(ये लेखक के अपने विचार हैं) 

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