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1 जनवरी, 2021|10:31|IST

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वैक्सीन के साथ साल का स्वागत

हम साल 2021 में कोविड-19 से निजात पाने के लिए टीकाकरण की दिशा में आगे बढ़ चुके हैं। दस से ज्यादा देशों में टीकाकरण की शुरुआत भी हो चुकी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी साल बीतते-बीतते वैक्सीन को स्वास्थ्य आपातकाल के आधार पर अनुमति दे दी है। दुनिया को इस पल का इंतजार था। विश्व स्वास्थ्य संगठन से मिली मंजूरी के बाद भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में टीकाकरण अभियान में तेजी आ जाएगी। अब दुनिया में कहीं भी जरूरत पड़ने पर वैक्सीन कोवीशील्ड का इस्तेमाल किया जा सकता है। भारत में भी ऑक्सफोर्ड एस्ट्राजेनेका की कोवीशील्ड और कोवैक्सीन के आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी लगभग तय हो गई है। भारत में और भी वैक्सीन को मंजूरी मिल सकती है, वैक्सीन बनाने वाली कंपनियां अपने-अपने ढंग से अपने टीके को कारगर साबित करने में लगी हैं। 
इन दिनों दुनिया के अन्य देशों के साथ-साथ भारत में भी टीकाकरण कार्यक्रम की पूरी तैयारी हो रही है।  देशव्यापी पूर्वाभ्यास चल रहा है। यह टीकाकरण की सभी व्यवस्थाओं के प्रबंधन का पूर्वाभ्यास है। भारत वैक्सीन निर्माताओं के साथ निरंतर संपर्क में है। वैक्सीन बन चुकी है। अपने परीक्षण के प्रारंभिक तीन चरण पूरे कर चुकी है, जिनकेआधार पर विशेषज्ञ स्तर से आपातकालीन मंजूरी मिलनी तय है। वैसे अभी भी कुछ विवरण, जैसे कीमत, खुराक इत्यादि बहुत स्पष्ट नहीं हो सके हैं। भारत सरकार लगातार वैक्सीन अपडेट पर अपनी नजर और संपर्क बनाए हुए है। वैक्सीन ऐसा विषय है, जिसमें तमाम सरकारों को दुनिया भर में चल रहे वैज्ञानिक प्रयासों से जुड़ना होगा। वैक्सीन की गुणवत्ता में विशेष रूप से निगाह रखने की जरूरत रहेगी। 
भारत में वैक्सीन की पूरी हलचल है। पूर्वाभ्यास के जरिए 96,000 के करीब वैक्सीनेटरों को प्रशिक्षित किया गया है। राष्ट्रीय प्रशिक्षण द्वारा 2,360 प्रशिक्षक तैयार किए गए हैं। देश भर के 719 जिलों में जिला-स्तरीय प्रशिक्षण में 57,000 से अधिक प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया गया है। वैक्सीन और सॉफ्टवेयर संबंधित प्रश्नों के लिए राज्य हेल्पलाइन नंबर 104 लाने की तैयारी चल रही है। यह हेल्पलाइन नंबर 1075 के अतिरिक्त होगा। जब टीकाकरण अभियान आगे बढ़ेगा, तब निचले स्तर पर लोगों को जोड़ने के लिए और भी सुविधाएं देने की जरूरत पडे़गी।
सरकारों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के तमाम प्रयासों के बावजूद कोरोना वैक्सीन की चुनौतियां अभी भी कम नहीं हैं। वैक्सीन में भ्रष्टाचार की अटकलों से भारत भी अछूता नहीं है। स्वास्थ्य आपातकाल की इस परिस्थिति में सफल वैक्सीन बाजार में आने वाली है। इसके बाद यह सुनिश्चित करना है कि सही लोगों को सही समय पर सही वैक्सीन मिले, यह एक बड़ी चुनौती है। हम सब जानते हैं, भारत में यह एक बहुत बड़ा काम होगा। 
वैक्सीनेशन की सुविधा का समान रूप से राष्ट्रीय स्तर पर वितरण हो, यह सुनिश्चित करने के लिए प्रारूप तैयार किया गया है। अभी तक भारत में अधिकांश राष्ट्रीय टीका वितरण प्रणाली का प्रारूप बच्चों के पूर्ण टीकाकरण के उद्देश्य से ही रहा है। अभी तक इतने बड़े पैमाने पर वयस्क टीकाकरण के लिए ऐसी व्यवस्था नहीं है, तो यह भी एक नई चुनौती होगी। भारत में खासकर स्वास्थ्य प्रशासन के लिए यह परीक्षा की घड़ी होगी। 
प्रशासन में विभिन्न स्तर पर कोरोना वायरस प्रतिरोधी टीकाकरण अभियान की तैयारियां जोरों पर हैं, लेकिन भारत के विभिन्न क्षेत्रों में इस महामारी के संक्रमण की गति और प्रभाव में बड़ा अंतर देखने को मिला है। इस आधार पर टीकाकरण को लेकर लोगों में वैक्सीन की जरूरत और उसके असर की विश्वसनीयता को लेकर संशय है। जनता के बीच वैक्सीन की मांग और स्वीकार्यता को लेकर सोच-समझ में भारी अंतर है।
कई तरह की अफवाहें और फर्जीवाड़े भी लोगों के विचार पर असर डाल रहे हैं। वैक्सीन के रखरखाव और उसे प्रभावी बनाए रखने की व्यवस्था को लेकर भी नकारात्मक चर्चाओं से लोगों में असमंजस की स्थिति बनी है। प्रशासन को लोगों के बीच ज्यादा मुस्तैदी के साथ जागरूकता के लिए काम करना पड़ सकता है। लोगों को वैक्सीन के लिए तैयार करने में मुश्किल आ सकती है। यह अच्छी बात है कि लोग वैक्सीन की चर्चा कर रहे हैं। जगह-जगह कोल्ड चेन सिस्टम, कोल्ड स्टोरेज को आखिरी स्वरूप दिया जा रहा है। सिरिंज, बिजली व्यवस्था, सोलर पावर कोल्ड स्टोरेज को भी बेहतर करने पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है। इन तैयारियों से भी देश में वैक्सीन के प्रति स्वीकार का भाव बन रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने वक्तव्य में देशवासियों को आश्वस्त किया है कि हमारे लिए सुरक्षा महत्वपूर्ण है, जितनी भी वैक्सीन भारत अपने नागरिकों को देगा, वे सभी वैज्ञानिक मानकों पर सुरक्षित होंगी। 
उधर, अमेरिका में पहले ही कोविड-19 टीकाकरण शुरू कर दिया गया है। इजरायल में अभी तक सात प्रतिशत नागरिकों को टीका लगाया जा चुका है। बेंजामिन नेतन्याहू ने भी वैक्सीन लगवाई है और लोगों को जागरूक और प्रेरित करने के लिए उनके टीकाकरण का सीधा प्रसारण किया गया है। दुनिया में बडे़-बड़े नेता आगे आकर टीका लगवा रहे हैं, ताकि अन्य लोगों को प्रेरणा मिले। भारत में भी इसकी जरूरत पड़ सकती है। अमेरिका के अलावा स्विट्जरलैंड, इजरायल, मलेशिया, ब्रिटेन, बहरीन, कनाडा, मैक्सिको, रूस और चीन में भी टीकाकरण चल रहा है।
कई देशों में अनेक टीके इस्तेमाल किए जा रहे हैं, लेकिन उनका सभी मानव समूहों पर समग्र प्रभाव परखना अभी बाकी है। टीका व्यक्ति के बीमार पड़ने और उसे फिर अस्पताल में भर्ती होने के खतरे से बचाएगा, लेकिन यह भी संभव है कि वैक्सीन लिया हुआ व्यक्ति वायरस का वाहक हो, वह दूसरों के लिए संक्रामक हो सकता है। इसलिए टीकाकरण के बाद भी लोगों को मास्क पहनने के साथ-साथ शारीरिक दूरी बनाए रखने जैसे एहतियात बरतने होंगे। विश्व स्वास्थ्य संगठन का भी यह कहना है कि टीका संक्रमण को रोककर वायरस के प्रसार को रोक सकता है, लेकिन अभी और प्रमाण की जरूरत है। साथ ही, टीकाकरण से हर्ड इम्यूनिटी प्राप्त करने के लिए बड़ी संख्या में लोगों को वैक्सीन लगाने की जरूरत पड़ सकती है और इसमें समय लगेगा। 
(ये लेखिका के अपने विचार हैं)

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  • Web Title:hindustan opinion column 02 january 2021