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खालिस्तान नाम की कोई चिड़िया नहीं

एक मुख्य बात यह कही गई है कि जो अलगाववादी ताकतें हैं, उनको उभरने नहीं देना चाहिए। इसमें सबकी एक राय है और मुख्तलिफ राय यह है कि सरकार इसे मजबूती के साथ नहीं संभाल रही है या उसका ढंग या तरीका ठीक...

खालिस्तान नाम की कोई चिड़िया नहीं
Amitesh Pandeyज्ञानी जैल सिंह, तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्रीFri, 01 Dec 2023 10:44 PM
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एक मुख्य बात यह कही गई है कि जो अलगाववादी ताकतें हैं, उनको उभरने नहीं देना चाहिए। इसमें सबकी एक राय है और मुख्तलिफ राय यह है कि सरकार इसे मजबूती के साथ नहीं संभाल रही है या उसका ढंग या तरीका ठीक नहीं है। तीसरा प्रश्न है, सरकार शायद जान-बूझकर ऐसी ताकतों को उठाती है। चौथा प्रश्न यह आया है कि गृह मंत्री पर भी कुछ लांछन लगा दिए गए हैं, ये थोड़ी सी बातें हैं। 
जहां देश की एकता को खत्म करने का सवाल है, वहां पर हम सब एक हैं, और मैं आशा करता हूं कि हमारी राजनीतिक पार्टियों के नेता, जो ईमानदारी से अपने देश को एक रखने के लिए, इसकी स्वतंत्रता को बचाने के लिए और इसको आर्थिक रूप से उन्नत बनाने के लिए ऐसी समस्याओं पर पार्टी लाइन पर नहीं सोचते हैं। सत्ताधारी पार्टी का पहला धर्म है कि ऐसी बातों का कोई नाजायज फायदा न उठाया जाए। इसलिए मैं अपील करूंगा कि राजनीतिक पार्टियां इस बात के लिए आज नहीं, लेकिन जब हम किसी बैठक में इकट्ठे हों, तो यह कोशिश करें कि ऐसी ताकतों के साथ चुनाव के वक्त हमको गठबंधन नहीं करना चाहिए। ...इस प्रकार की गलतियां कई बार पार्टियों ने की है। 
मैं यह भी यकीन दिलाना चाहता हूं कि कनाडा की सरकार से बात हुई थी, जब उनके एमीग्रेशन मिनिस्टर वहां आए थे, तो वह मुझ से मिले और मैंने उनसे कहा था कि यह क्या तमाशा है कि खालिस्तान का पासपोर्ट लेकर, जिसका कोई वजूद नहीं है, कोई स्टेट नहीं है, कोई हुकूमत नहीं है, आप लोगों ने उनको इसलिए दाखिल कर लिया, यह बात मानकर कि उनको हिन्दुस्तान रखना नहीं चाहता। चूंकि वे खालिस्तान के हिमायती हैं, आपने उनको अपने देश में ठहरने के लिए जगह दे दी। यह बात ऐतराज योग्य है। उन्होंने कहा कि हमारे देश का कानून ही ऐसा है, जो कोई आए, हम उसे रहने के लिए, बैठने के लिए जगह देते हैं, लेकिन हिन्दुस्तान के साथ हमारी ऐसी कोई भावना नहीं है कि हम हिन्दुस्तान की परेशानी को बढ़ाएं। इस प्रकार मैंने उनको कहा कि आपके यहां भी फ्रेंच भाषा बोलने वाले अलग होना चाहते हैं। यदि कोई देश उनको पनाह देगा, तो दोस्ती कैसे निभेगी? उन्होंने कहा, नहीं निभेगी। मैंने कहा, यदि नहीं निभेगी, तो फिर आपको इसका उपाय करना चाहिए। उन्होंने पूछा कि क्या उपाय? मैंने कहा, कानून को बदलो। ये हमारे देश के दुश्मन हैं, ये हिन्दुस्तानी नहीं हैं, शरणार्थी नहीं हैं, इन्हें किसी ने निकाला नहीं है, दुनिया में खालिस्तान नाम की कोई चिड़िया नहीं है। हम यह बरदाश्त नहीं करेंगे। आाखिर उन्होंने यह कर दिया कि यदि कोई इंडियन बगैर इंडियन पासपोर्ट के आएगा, तो उसे अपने देश में रहने के लिए जगह नहीं देंगे...।
कनाडा के प्रधानमंत्री हमारे प्रधानमंत्री से मिले थे और उनसे भी बात हुई थी। वह यह कहते हैं कि खालिस्तान का कोई काउंसिल वहां है, ये सब बनावटी चीजें हैं। ...हम इस पर बिल्कुल सचेत हैं।... 
पहले भी कभी-कभी कोई सिरफिरा आदमी कह देता था, पर उसे गंभीरता से नहीं लिया गया। जब हमारे जनरल बांग्लादेश की फतह के बाद पाकिस्तानी फौजों से हथियार डलवा रहे थे, ... याहिया खान इस जगजीत सिंह को साथ लेकर टेलीविजन पर कह रहे थे कि हमने गुरुद्वारों की चाबियां इनको दे दी हैं, ये खालिस्तान चाहते हैं। आपको शायद याद होगा, जंग के दौरान जगजीत सिंह से भाषण करवाया गया कि पाकिस्तान से पैराशूट के जरिये हम उतरेंगे, सिखों की तरफ से हमारा स्वागत होना चाहिए। जब वे पाकिस्तानी सिखों का भेष धारण करके यहां उतरे, तो उनको उसका जवाब दिया गया, सब पंजाबियों ने मिलकर उनको मारा...। 
मैं सेक्युलरिज्म में विश्वास रखता हूं और उस पर अमल करता हूं। मेरी नजर में दुनिया का हर इंसान एक जैसा है। सिखी से ही मैंने यह बात सीखी है। गुरु गोविंद सिंह और गुरु नानक से सीखी है। ...मैं नहीं मानता कि अकाली सब सिखों के नुमाइंदे हैं। वह एक राजनीतिक पार्टी है। उनसे हमारा विरोध यही है कि राजनीति में मजहब को क्यों घसीटते हो...। कोई आम सिख नाराज नहीं है। ये जो थोड़े से लोग हैं, अगर इनको मिनिस्ट्री मिल जाए पंजाब की सरकार में, तो इनकी कोई मांग नहीं है, फिर चंडीगढ़ भी ठीक है, पानी का मामला भी ठीक है, अमृतसर को जाने वाली ट्रेन भी ठीक है, पंजाबी भाषा भी ठीक है, तब कोई शिकायत नहीं होगी।
    (लोकसभा में दिए गए भाषण से)  

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