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कट्टरता का मजबूती से मुकाबला कीजिए

आज नौवें गुरु की शहादत का दिन है। वह चांदनी चौक में शहीद किए गए थे। आज के दिन सिख संगतें और हिंदू, सभी यहां पहुंच रहे हैं। क्या वजह थी उनकी शहादत की? कश्मीरी पंडितों ने अपील की गुरु तेगबहादुर जी...

कट्टरता का मजबूती से मुकाबला कीजिए
Amitesh Pandeyगुरबिंदर कौर ब्रार, कांग्रेस नेता व सांसदFri, 01 Dec 2023 10:39 PM
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आज नौवें गुरु की शहादत का दिन है। वह चांदनी चौक में शहीद किए गए थे। आज के दिन सिख संगतें और हिंदू, सभी यहां पहुंच रहे हैं। क्या वजह थी उनकी शहादत की? कश्मीरी पंडितों ने अपील की गुरु तेगबहादुर जी से कि हमें जुल्म से बचाया जाए और इसके लिए किसी महापुरुष की शहादत की जरूरत है। उस वक्त जो नौवें गुरु के बेटे थे, जो बाद में दसवें गुरु हुए, गुरु गोविंद सिंह जी नौ साल के थे। उन्होंने कहा कि पिताजी, आपसे बढ़कर महापुरुष कौन होगा? क्या यह मिसाल नहीं है हिंदू-सिख एकता की? तब हर हिंदू का पहला बेटा जो होता था, उसे सिख बनाया जाता था। अब भी हमारी रिश्तेदारियां आपस में इतनी हैं कि यह सोचना नामुमकिन है कि खालिस्तान बन जाए। ये तो चंद लोग हैं। 
अभी समर मुखर्जी ने डॉक्टर जगजीत सिंह का नाम लिया था। ...1969 में जब उनकी अकाली हुकूमत गिरी, तो वह बाहर हो गए। उन्होंने खालिस्तान का नारा लगाया। ज्ञानी जैल सिंह जब मुख्यमंत्री थे, तब अक्सर हमारी विधानसभा में उनका नाम आता था, पर उनकी हिम्मत नहीं थी कि वह हिन्दुस्तान में कदम रखते। अभी मेरे एक भाई ने कहा कि जनता राज के वक्त वह खुल्लमखुल्ला पंजाब में आए और सब जगह गए। सच्ची बात बताएं, हमें तो बिल्कुल डर नहीं लगता कि उन्होंने अपनी हुकूमत खुद कायम कर ली कनाडा में। ऐसे तो बहुत से दिमागफिरे होते हैं, जो अपनी हुकूमत कायम करके राष्ट्रपति बन बैठते हैं। हम यहां बैठे-बैठे उनसे डरने लगे, तो काम नहीं चल सकता। हमें इस बात का बिल्कुल डर नहीं है। यह मैं कह सकती हूं कि जन समर्थन उनके साथ बिल्कुल नहीं है। कभी आपने सुना नहीं होगा कि पंजाब के गांवों के लोग ... खालिस्तान की मूवमेंट के पीछे हों। ...चंद लोग हैं, जो कुंठा की वजह से, कुर्सियों की वजह से या हुकूमत की लालच की वजह से खालिस्तान का नारा लगा रहे हैं।
गुरु गोविंद सिंह जी को शहीदों का सरताज कहा जाता है। उन्होंने पिता की कुर्बानी दी, बच्चों की कुर्बानी दी। आप हैरान होंगे, एक छह साल का लड़का, एक दो साल का लड़का, दोनों दीवार में चिनवा दिए गए। ... हर चीज की कुर्बानी दी। मैं एक बात बताना चाहती हूं, ये नौ गुरु तो हिंदू थे, तो सिख कौम कैसे बनी? जिस वक्त गुरु तेगबहादुर जी को शहीद किया गया चांदनी चौक में, तो किसी को हिम्मत नहीं पड़ी कि दिन के वक्त उनकी लाश उठाकर ले जाए। उस वक्त की हुकूमत देखना चाहती थी कि कौन लोग हैं, जो इस लाश को उठाकर ले जाएंगे। यह रकाबगंज गुरुद्वारा, जो हमारे बहुत नजदीक है, वहां कुछ झुग्गियां थीं, वहां के लोग उनका जिस्म उठाकर ले गए। एक हरिजन था, जो उनके शीश को आनन्दपुर साहब ले गया। ...लोगों में इतना हौसला नहीं था कि वे खुलकर उस वक्त की हुकूमत के खिलाफ खड़े हों, तो उन्होंने क्या किया कि सारी झुग्गियों को आग लगा दी और उनका संस्कार किया।... उस वक्त जो हमारे लोग थे, उनमें हौसला नहीं था आगे बढ़ने का। वह मौत से डरते थे, तो गुरु गोविंद सिंह जी ने कहा कि मैं सिख को एक ऐसी शक्ल दूंगा कि वह छिपा न रह सके, जहां भी वह जाए, सिख नजर आए, ताकि उसमें मरने का डर निकल जाए। जो इंसान मौत से नहीं डरता, सब कुछ कर सकता है, अच्छे काम के लिए अपने आपको कुर्बान कर सकता है, तभी यह सिख कौम बनी, पर इसका मतलब यह नहीं था कि कोई खालिस्तान बनाया जाए। इसे तो कोई भी बर्दाश्त नहीं करेगा। अकाली पार्टी ने भी कहा है कि वह खालिस्तान मूवमेंट को सपोर्ट नहीं करती है, लेकिन मैं यह पूछना चाहती हूं कि वे खुलकर सामने क्यों नहीं आते?...
उकसाने के बावजूद हिंदू-मुस्लिम एकता, हिंदू-सिख एकता, हिंदू-ईसाई एकता पूरी तरह कायम है। वे नहीं चाहते हैं कि किसी तरह की कोई गड़बड़ हो। सभी लोग शांतिपूर्वक रहना चाहते हैं, पर एक बात मैं कहने से बिल्कुल गुरेज नहीं करूंगी कि लोगों के मन में वह आत्मविश्वास, वह भरोसा नहीं है, लोग कुछ डरते हैं। मैं चाहती हूं कि सरकार मजबूती के साथ कट्टरपंथियों का मुकाबला करे। जब तक आप मजबूती के साथ और खुलकर बाहर आकर इनकी भर्त्सना नहीं करेंगे, तब तक कोई बात नहीं बनेगी। आखिर लोगों के दिल में डर क्यों पड़ा हुआ है? उनके मन में किस बात का डर है? इसीलिए मैं चाहती हूं कि सरकार इस सिलसिले में कारगर ढंग से काम करे।
    (लोकसभा में दिए गए भाषण से) 

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