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शून्यता का एहसास

लंबे समय तक भारतीय राजनीति को अपने आभामंडल से रोशन करने वाली अद्वितीय राजनेत्री सुषमा स्वराज का देहावसान शून्यता का एहसास करा गया। वाणी की दरिद्रता के इस दौर में वह संयम और मर्यादा के साथ एक धारदार अभिव्यक्ति थीं। बहुभाषाविद होने के साथ-साथ वह मानवीय संवेदना और सहयोग की वैश्विक चेहरा भी थीं। जब-जब उनकी पार्टी को घेरा जाता था, तब-तब वह अप्रतिम वीरांगना के रूप में उतरकर पार्टी को उबार लेती थीं। और जब देश की अस्मिता व संप्रभुता पर आंच आने जैसी कोई बात होती, तो वह अजेय प्रवक्ता की भूमिका बखूबी निभा जातीं। वेश-भूषा व रहन-सहन में खांटी देसीपन का ऐसा आत्मविश्वास कि गरिमा भी गौरवान्वित हो जाए। पुरातन के प्रति आदर और नूतन के प्रति सम्मान प्रदर्शित कर वह भूत व वर्तमान के बीच प्रगति के रेशे को खूबसूरती से जोड़ देती थीं। राजनीति के गिरते स्तर के बीच वह शुचिता, समर्पण और सेवा-भाव के लिए स्थापित जगत-प्रसिद्ध जननेत्री के रूप में हमेशा याद रखी जाएंगी।

धीरज पाठक, शास्त्रीनगर, चैनपुर


हताश विपक्ष

आज जहां पूरा राष्ट्र जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन और अनुच्छेद 370 के खात्मे का जश्न मना रहा है, वहीं विपक्ष के कुछ नेता इसे पचा नहीं पा रहे हैं और बेमतलब बयानों से जनता की भावना को आहत कर रहे हैं। छोटे-मोटे दलों की बात तो छोड़िए, देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस के कुछ नेतागण ऐसी-ऐसी बयानबाजी कर रहे हैं कि सिर शर्म से झुक जाता है, जबकि उन्हें जनता की भावनाओं का सम्मान करते हुए इस फैसले का दिल से स्वागत करना चाहिए था। जनता से कटने की वजह से ही लगता है कि कांग्रेस का आज यह हश्र हुआ है। लोग ऐसी संकीर्ण और गलत सोच रखने वाले नेताओं को उचित जवाब देंगे।
जसबीर सिंह सिसोदिया


सब कुछ बिकाऊ

कहते हैं, अगर धंधा मंदा चल रहा हो, तो राजनीति में प्रवेश कर जाएं, बहुत उपाय दिखेंगे। आपके चुनाव जीतने से पहले ही आपको खरीदने की बोली शुरू हो जाती है। कहा जाता है कि राजनीति में जो जितना पुराना है, उसकी उतनी ही कीमत बढ़ जाती है। यहां कुछ भी एक्सपायर नहीं होता। राजनीति की कोई जाति नहीं होती। यही वजह है कि लोकसभा चुनाव के समय तृणमूल कांग्रेस के 40 विधायकों के भाजपा के संपर्क में होने की खबरें आई थीं, और बाद में कर्नाटक का घमासान भी हमने देखा। साफ है, राजनीति में सब कुछ बिक जाता है, फर्क इतना है कि कभी इंसान बिक जाता है, तो कभी इंसान का सब कुछ बिक जाता है।
हिमांशु बोध


वोट देना सफल

मौजूदा संसद ने अभूतपूर्व समर्पण दिखाते हुए चालू सत्र में 30 से अधिक विधेयक पास किए। भारत के इतिहास में यह पहली बार है, जब इतने विधेयक एक ही सत्र में पारित हुए। इससे पहले का रिकॉर्ड पहली लोकसभा के पहले सत्र के नाम दर्ज था। संसद का महत्वपूर्ण कार्य भी यही है, आवश्यक विधेयक पर चर्चा करके उन्हें कानूनी रूप देना। इस बार, जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाना और उसे केंद्रशासित क्षेत्र बनाना एक महत्वपूर्ण विधेयक था, क्योंकि इस एक वार से ही अलगाववादी राजनीति, पाकिस्तानी मनसूबे और अमेरिकी षड्यंत्र, सब के सब नाकाम हो गए। इसके अलावा, बच्चियों से अपराध के कानून में संशोधन करना, सूचना के अधिकार में संशोधन करना और एक साथ तीन तलाक पर रोक जैसे फैसले भी प्रशंसनीय माने जाएंगे। हां, इन विधेयकों पर विपक्ष को भी साथ देना चाहिए था। कुल मिलाकर, संसद में सरकार ने जो काम पिछले एक महीने में किया, उससे जनता का यह विश्वास मजबूत हुआ है कि उनका वोट देना सफल रहा।
मंगलेश सोनी, धार
 

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  • Web Title:Hindustan Mail Box Column on 9th August