DA Image
6 मार्च, 2021|3:50|IST

अगली स्टोरी

गणतंत्र की मजबूती

default image

अपनी तमाम विषमताओं और अनगिन विविधताओं के बावजूद भारतीय गणतंत्र विश्व में केवल प्रशंसनीय, बल्कि अनुकरणीय भी है। भारतीय गणतंत्र की जब नींव पड़ रही थी, तब बहुत से लोगों ने इस आशंका का इजहार किया था कि भारतीय आपसी झगड़ों की वजह से एकजुट नहीं रह पाएंगे, लेकिन धीरे-धीरे भारतीय गणतंत्र ने यह सिद्ध कर दिया कि तमाम बाधाओं के बावजूद गणतंत्र ही भारत के लिए सबसे माकूल शासन व्यवस्था है। आजादी मिलने के बाद भारत को एकजुट रखने में गणतंत्र की भूमिका अतुलनीय है। तमाम संप्रदायों, जातियों, जनजातियों के बीच गणतंत्र की रोशनी देश के तमाम अंधेरे कोनों तक पहुंच चुकी है। लोगों में यह विश्वास है कि वे सरकार बना या गिरा सकते हैं। आज हम गणतंत्र दिवस मना रहे हैं, तो गौरव का एहसास होना बहुत स्वाभाविक है। उन महापुरुषों और राजनेताओं को जरूर याद कर लेना चाहिए, जिनकी वजह से इस देश में सामंती माहौल के बावजूद गणतंत्र स्थाई हुआ था। आज हम कमियां गिनाने बैठेंगे, तो हमें पता लगेगा कि हमारी आगे की यात्रा अभी बहुत लंबी है, मगर जब हम पीछे पलटकर देखेंगे, तब पाएंगे कि हमने ऐसा बहुत कुछ किया है, जिस पर हम गर्व कर सकते हैं। क्या इतना विशाल, इतना विविध, इतनी भाषाओं वाला कोई दूसरा गणतंत्र है? आज गणतंत्र के प्रति उसी समर्पण भाव की जरूरत है, जिसकी वजह से हम बड़ी बाधाओं को भी पार कर जाते हैं। आज भारतीय गणतंत्र एक बड़े निर्णायक मोड़ पर है। राष्ट्रीय राजधानी की सीमाओं पर एक आंदोलन ने डेरा डाल रखा है। आंदोलन में शामिल किसान भी परेड निकालेंगे। बेशक, उन्हें हक है, वे पुलिस की मंजूरी के साथ परेड निकाल रहे हैं। अनुशासन, संयम के साथ गणतंत्र का यह दिन अगर हम शांतिपूर्वक बिता पाए, तो यह हमारी बड़ी कामयाबी होगी। दुनिया में अनेक कथित गणतंत्र या तंत्र हैं, जहां सरकार से परे कोई ऐसे आयोजन की हिमाकत नहीं कर सकता। लोक के प्रति तंत्र की सहिष्णुता और तंत्र के प्रति लोक की समझदारी समय की मांग है। इस बुनियादी ज्ञान को दामन से लगाए रखना होगा कि तंत्र वास्तव में लोक की सेवा के लिए ही है। आर्थिक आपदा की वजह से लोक में उपजी गरीबी, बेरोजगारी वास्तव में तंत्र के लिए प्राथमिकता होनी चाहिए। लोक के दर्द और उसके भाव प्राथमिक हैं। लोक से परे जाते, लोक का उल्लंघन करते हुए कोई तंत्र कामयाब नहीं हो सकता। गणतंत्र दिवस मनाते हुए हमें एक बार अपने चारों ओर निगाह फेर लेनी चाहिए। क्या हमारे यहां पेश चुनौतियों की वजह से आस-पास पड़ोस के देशों को फन फैलाने का मौका नहीं मिल रहा है? क्या हमारे घरेलू संघर्ष दुश्मन के काम रहे हैं? क्या हमारे गणतंत्र पर लोगों को कभी-कभी शक नहीं होने लगता है? जब हम ऐसे सवालों के जवाब खोजेंगे, तब पता चलेगा कि अपने गणतंत्र की कमियों को दूर करना कितना जरूरी है। हमारा लोक मजबूत होगा, तभी तंत्र को मजबूती मिलेगी और जब तंत्र मजबूत होगा, तब देश सशक्त होगा। भारत की तेज विकासशीलता वापस लौटनी चाहिए। यह ईमानदारी से विचार का वक्त है। आज यह गलत सवाल आगे बढ़ने लगा है कि देश या तंत्र ने हमारे लिए क्या किया, जबकि हमें यह सोचना चाहिए कि हमने तंत्र या देश के लिए क्या किया? हमारी ऐसी सोच से ही गणतंत्र मजबूत होगा।

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:hindustan editorial column 26 january 2021