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सबसे अच्छी रैंकिंग और सबसे खराब हार

शिवेंद्र कुमार सिंह वरिष्ठ खेल पत्रकार

कहां तो इस टेस्ट सीरीज में टीम इंडिया की जीत का आकलन था, और कहां एक टेस्ट मैच रहते ही भारत बाजी हार गया। इंग्लैंड ने चौथे टेस्ट मैच में भारत को 60 रनों से हराकर टेस्ट सीरीज में 3-1 की अजेय बढ़त हासिल कर ली। अब सीरीज के पांचवें टेस्ट मैच का असर सीरीज पर तो नहीं, लेकिन भारत की साख पर जरूर होगा। इंग्लैंड ने अगर आखिरी टेस्ट मैच भी जीत लिया, तो सीरीज एकतरफा मानी जाएगी और अगर भारत जीत हासिल करता है, तो उसके लिए वह जीत सांत्वना का काम करेगी। फिलहाल बात चौथे टेस्ट मैच की, जिसमें जीत हासिल करके भारत के पास 2-2 से बराबरी का सुनहरा मौका था। जीत के लिए 245 रनों की जरूरत थी। लेकिन भारतीय टीम 184 रनों पर सिमट गई। जिस टीम इंडिया के बल्लेबाजों को स्पिन गेंदबाजी के सामने बहुत परिपक्व माना जाता है, उसकी दुर्गति एक बार फिर स्पिन गेंदबाज ने ही की। मोईन अली ने टेस्ट मैच में नौ विकेट लेकर बाजी पलट दी। 

यहां बड़ा सवाल यह है कि यह हार ज्यादा चुभने वाली क्यों है? जवाब बहुत सीधा है। साल 2018 में विराट कोहली की टीम की यह तीसरी हार है, जब उसके सामने ढाई सौ से भी कम रनों का लक्ष्य था और वह लड़खड़ा गई। यह बताने की जरूरत नहीं है कि अगर टीम इंडिया के बल्लेबाजों ने यह लक्ष्य हासिल कर लिया होता, तो सीरीज का रुख कितना अलग होता। 

चौथी पारी में छोटे लक्ष्य को हासिल न कर पाने की शुरुआत इस साल केपटाउन टेस्ट मैच से हुई थी। यह वही दौरा है, जिसके बाद से विश्व क्रिकेट में भारतीय गेंदबाजों की साख में जबरदस्त इजाफा हुआ है। भारतीय तेज गेंदबाजों की घातक गेंदबाजी के चलते दक्षिण अफ्रीका ने भारत के सामने महज 208 रनों का लक्ष्य रखा था। इस छोटे लक्ष्य को पाने में भारतीय बल्लेबाज चूक गए। नामी-गिरामी बल्लेबाजों से सजी टीम इंडिया चौथी पारी में 135 रनों पर सिमट गई और दक्षिण अफ्रीका ने 72 रनों से टेस्ट मैच जीत लिया। इसके बाद इंग्लैंड के खिलाफ इसी दौरे में पहले टेस्ट मैच में भारतीय गेंदबाजों ने कमाल का प्रदर्शन किया। 

0एक बार फिर भारतीय टीम के पास सीरीज में जीत से शुरुआत करने का मौका था। बर्मिंघम टेस्ट मैच में इंग्लैंड की टीम ने काफी मशक्कत करने के बाद चौथी पारी में भारत के सामने सिर्फ 194 रनों का लक्ष्य रखा। जीत काफी करीब दिख रही थी, लेकिन चौथी पारी में बल्लेबाजी का दबाव टीम इंडिया एक बार फिर उठाने में नाकाम रही। इस बार उसके दिग्गज बल्लेबाज मिलकर 162 रन ही जोड़ पाए। नतीजा इंग्लैंड को 31 रनों से जीत मिली। ढाई सौ रनों के भीतर के लक्ष्य को हासिल करने में टीम इंडिया की यह दूसरी नाकामी थी। जिस नाकामी को इसी साल तीसरी बार रविवार को टीम इंडिया ने दोहराया, जब वह 245 रनों का लक्ष्य हासिल करने से चूक गई। 

यह सच है कि चौथी पारी में बल्लेबाजी करने का दबाव अलग होता है। छोटे और मामूली लक्ष्य मुश्किल हो जाते हैं। लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि टीम इंडिया दुनिया की नंबर एक टेस्ट टीम है। दुनिया के टॉप 10 टेस्ट बल्लेबाजों में भारत के दो बल्लेबाज हैं। टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली इस लिस्ट में टॉप पर हैं, जबकि चेतेश्वर पुजारा भी इसमें शामिल हैं। 

इस सीरीज में विराट कोहली के प्रदर्शन को कुछ देर के लिए अलग कर देते हैं, क्योंकि इसमें अभी तक उन्होंने अपनी साख के मुताबिक प्रदर्शन किया है। अब तक खेले गए चार टेस्ट मैच में वह 544 रन बना चुके हैं। असली परेशानी उस खौफ की है, जो टीम इंडिया के बाकी बल्लेबाजों के सिर पर चढ़ चुका है। असली परेशानी उस ‘मेंटल टफनेस’ की है, जो टीम इंडिया के बल्लेबाजों ने नहीं दिखाई। इसी की वजह से दक्षिण अफ्रीका और इंग्लैंड में टेस्ट सीरीज जीतने का ऐतिहासिक मौका भारत के हाथ से चला गया। अब यह इतिहास में दर्ज हो जाएगा कि दुनिया की नंबर एक टेस्ट टीम ने साल में तीन टेस्ट मैच ऐसे गंवा दिए, जो उसे जीतने चाहिए थे। यह महज एक मैच की हार नहीं है, बल्कि यह सीरीज की हार में भी तब्दील हुई है। (ये लेखक के अपने विचार हैं)

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  • Web Title:Senior Sports Journalist Shivendra Kumar Singh article in Hindustan on 04 september