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कुदरत के कहने का अनोखा तरीका है वसंत

परिचय दास पूर्व सचिव, हिंदी, मैथिली-भोजपुरी अकादमी, दिल्ली

वसंत एक चमत्कारी अनुभव है। शीत की ठंड के बाद की जीवंतता। इन दिनों दुनिया रंग और हरियाली की खुशबू से भर जाती है। एक तरह से पेड़-पौधे पुनर्जन्म लेते हैं। वसंत हमारे जीवन में कायाकल्प के लिए उत्साह भर देता है, हमें नूतन बनाता है। बर्फ के पिघलने, बौर के आने, मधुमक्खियों के गुंजार तथा चिड़ियों की मीठी चहचहाहट के साथ यह ऋतु आती है। प्रत्येक पक्षी, जो इस वसंत को गाता है, वह हमारे लिए गाता है और हर फूल जो खिलता है, वह हमारे लिए ही अपने इत्र और प्रेम को सहेजता है। इस ऋतु में दिन लंबे हो जाते हैं, नया जीवन उभरता है। 
सुबह या शाम की सैर से तरोताजा होना... रात में झिलमिलाते सितारों से रोमांचित होना; एक पक्षी का घोंसला बनाना- ये सरल जीवन के पुरस्कार हैं, यही तो वसंत है। वसंत दरअसल प्रकृति के कहने का तरीका जैसा है। इस मौसम में हर खिलता फूल हर किसी के          हृदय का राग है। वसंत के संकेतों पर गौर करके देखिए: आकाश लगभग नीला, पेड़ रंगमय, सूरज उज्ज्वल दिखेगा, क्योंकि वसंत फूलों की विस्मित भूमि को चित्रित करता है। यदि आप वसंत पर खिलने-सोचने में कभी रोमांचित नहीं हुए हैं, तो शायद आपकी आत्मा खिल नहीं रही।
यह ऋतु निस्संदेह वर्ष का सबसे प्रिय समय है, जब पूरी दुनिया प्रकृति की सुंदरता से प्रेरित हृदय की लय में बहती है। इस ऋतु में बिना किसी कारण सबके होंठों पर एक मुस्कान तैरती दिखाई देती है। यह चित्त में उभरी नैसर्गिक प्रसन्नता की ही अभिव्यक्ति है। वसंत में आप अपनी सारी चिंताओं और शिकायतों को बहा देते हैं और अपने आस-पास की हर चीज में, प्रत्येक गतिविधि में सुंदरता को और निहारना शुरू कर देते हैं। आप जीवन में बेहतर तत्वों के प्रति संवेदनशील होते हैं। यह दुनिया में सबसे अच्छा एहसास है। जब आप खुशी में होते हैं, तो अपने रूढ़िग्रस्त पुराने विचारों को विसर्जित करते हैं। आप हर वसंत की शुरुआत के साथ खुद को एक नई शुरुआत देते हैं।
वसंत ऋतु कभी घर पर नहीं बैठती। वह धरती की महक से सबको सराबोर करती है, प्रकृति की गोद में सबको विश्रांति देती है। हो सकता है कि किसी पेड़ पर कोई फूल न हो, लेकिन वसंत की हवा से असंख्य फूल निकलते हैं, जब पक्षी गाते और गीत उचारते हैं। सच तो यह है कि वसंत को पुरुषों की तुलना में पौधों द्वारा जल्द पहचाना जाता है। इसके साथ पृथ्वी सौरभमय होती है, हरी घास और कुसुमित वृक्षों के साथ। सूरज की चूमने की ललक, और धूप हवा में खिलती हुई, यानी वसंत ऋतु। इस ऋतु में एक युवा की कल्पना धीरे से प्यारमय अनुभूति में बदल जाती है। वसंत के मेले की रात की चंचल आंखें आराम से पृथ्वी की ओर टकटकी लगाए रखती हैं। किसी विचारक ने कहा है कि संवेदनशीलता के नाते स्त्री के पास वसंत ही वसंत होता है। वसंत से  सुंदर कुछ भी नहीं है।
आप अपने आसपास के वृक्षों को काट सकते हैं, लेकिन वसंत को आने से नहीं रोक सकते। वसंत योजनाओं और परियोजनाओं का समय है। ‘वसंत आ रहा है?’ उन्होंने कहा। ‘यह कैसा है?’ ...‘यह बारिश पर चमकता सूरज और धूप पर पड़ने वाली बारिश।’ वसंत का आना, यानी एक व्यक्ति की मासूमियत को याद करना। ग्रीष्म गुजरता है, और किसी के भलेपन की याद आती है। शरद बीतता है, और किसी की श्रद्धा याद आ जाती है। सर्दी बीत जाती है, तो किसी की दृढ़ता याद आती है। वसंत यानी सूरज का सुगंधित रोशनी में बदल जाना। कहने की जरूरत नहीं कि अगर हमारे पास सर्दी न होती, तो वसंत भी  इतना सुखद न होता। अगर हम कभी प्रतिकूलता का स्वाद न चखते, तो समृद्धि का इतना स्वागत भी नहीं होता। 
वसंत ऋतु एक जागृत भूमि है। फागुन की हवाएं प्यार का हिलोरा हैं। वसंत, यानी धूप में अनुकूलित होना, ऊर्जा से भर जाना, युवा मन से उत्फुल्ल हो उठना, पृथ्वी को नया रूपाकार देना। वसंत प्रकृति का एक तरीका है, जो हमें यह याद दिलाता है कि जीवन का हर दिन उत्सव           के योग्य है। इसे जी भरकर जिएं। 
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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  • Web Title:najariya hindustan column on 9 february