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आर्थिक विकास का औजार भी है टीकाकरण

क्रिस्टोफर एलिस बिल ऐंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन

इसमें कोई संदेह नहीं कि टीके जीवन की रक्षा करते हैं और स्वास्थ्य को दुरुस्त करने में आश्चर्यजनक रूप से महत्वपूर्ण साबित होते हैं। 1990 से, दुनिया भर में ऐसे बच्चों की तादाद घटकर आधी से भी कम रह गई है, जिन्हें अपना पांचवां जन्मदिन भी मनाना नसीब नहीं होता था। काफी हद तक इसका श्रेय संक्रामक रोगों से रोकथाम के लिए चलने वाले नियमित टीकाकरण या वैक्सीनेशन कार्यक्रम को जाता है। लेकिन एक और क्षेत्र है, जिसमें इस टीकाकरण की भूमिका पर अभी तक बहुत ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया है। टीकाकरण से होने वाले आर्थिक लाभ तथा विकासशील देशों में अमीर और गरीब परिवारों के स्वास्थ्य सेवा से जुड़े फासलों को मिटाने में टीकों द्वारा निभाई जाने वाली महत्वपूर्ण भूमिका का आकलन करने के लिए अभी तक बहुत कम शोध हुए हैं। हाल-फिलहाल में कुछ ऐसे अध्ययन सामने आए हैं, जिनमें इस ओर इशारा किया गया है।
हेल्थ अफेयर्स में प्रकाशित एक दिलचस्प नए अध्ययन में यह बताया गया है कि टीके लाखों परिवारों को गरीबी के चंगुल में पड़ने से बचाने में भी मदद कर सकते हैं। इस अध्ययन में यह भी दर्शाया गया है कि आर्थिक पिरामिड के निचले स्तर पर रहने वालों के बीच मृत्यु और शारीरिक कमजोरी की रोकथाम पर इन टीकों का बेहद सकारात्मक प्रभाव है। हार्वर्ड के टीएच चान स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के साथ ही द बिल ऐंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन और गवि द वैक्सीन एलायंस के शोधकर्ताओं ने टीकों से होने वाले स्वास्थ्य संबंधी लाभ का विश्लेषण किया। इस दौरान उन्होंने 2016 से 2030 की अवधि के दौरान 41 अल्प और मध्यम आय वाले देशों में 10 संक्रामक रोगों के लिए वित्तीय जोखिम, संरक्षण लाभ, दोनों के बारे में अपना आकलन पेश किया है। इस अध्ययन में वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि टीकाकरण से न केवल तीन करोड़ 60 लाख मौतों को टाला जा सकेगा, बल्कि यह 2.4 करोड़ लोगों को भीषण गरीबी के चंगुल में जाने से भी बचाएगा। यहां हमने गरीबी की जो परिभाषा ली है, उसके अनुसार गरीब वे हैं, जो प्रतिदिन 1.90 डॉलर से भी कम राशि में अपना जीवनयापन करते हैं। हम यह बखूबी जानते हैं कि किसी बीमारी या हादसे के कारण एकाएक सामने आने वाला चिकित्सा खर्च दुनिया की पूरी आबादी के लगभग दो प्रतिशत के समतुल्य लोगों को हर साल बेहद गरीबी के चंगुल में धकेल देता है। यानी व्याधि से मुक्ति पाने की कोशिश में वे गरीबी के शिकार बन जाते हैं। यहीं पर टीकों की भूमिका आती है, हम जानते हैं कि टीके हर साल लाखों परिवारों को भयावह मेडिकल बिलों का भुगतान करने से बचाते हैं।
अध्ययन में पाया गया कि हेपेटाइटिस-बी के टीके ऐसी मेडिकल दरिद्रता के ज्यादातर मामलों, यानी लगभग 1.4 करोड़ मामलों में लोगों को गरीब होने से बचाएंगे। मोटे तौर पर इसलिए, क्योंकि हेपेटाइटिस-बी में ही 
यकृत यानी लिवर के कैंसर और सिरोसिस जैसी खतरनाक बीमारी का बहुत बड़ा छिपा हुआ कारण है। खसरे और मेनिनजाइटिस-ए के कारण होने वाली गरीबी के लगभग 3.5 करोड़ मामलों तक में टीके कमी लाते हैं। इतना ही नहीं, शोधकर्ताओं ने पाया कि टीकों द्वारा दुनिया के 41 देशों में एक-चौथाई से ज्यादा मौतों और विकलांगताओं को भी टाला जा सकता है, जिसका सबसे ज्यादा लाभ आबादी के निर्धनतम 20 प्रतिशत लोगों को ही मिलेगा। यह इस बात की ओर संकेत करता है कि टीकों में किया गया निवेश संपूर्ण स्वास्थ्य कवरेज के सतत विकास लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
   ये जिस अध्ययन के निष्कर्ष हैं, वह 2016 में किया गया था। बाद में इसके नतीजों को प्रतिष्ठित स्वास्थ्य पत्रिका हेल्थ अफेयर्स  में भी प्रकाशित किया गया। इस अध्ययन ने जो सबसे महत्वपूर्ण नतीजा निकाला, वह यह था कि व्यापक टीकाकरण कार्यक्रम पर किए गए हर एक डॉलर के निवेश से स्वास्थ्य और आर्थिक उपलब्धि के क्षेत्र में 44 डॉलर का लाभ होता है। यह बताता है कि टीकाकरण अभी भी जनस्वास्थ्य कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण और सबसे फलदायी अंग है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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