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16 नबम्बर, 2019|4:08|IST

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अरेंज्ड मैरिज की नींव पर टिकी राष्ट्र की खुशी

बीजू डॉमीनिक

वैश्विक खुशहाली इंडेक्स में भारत का स्थान काफी नीचे है। वर्ल्ड हैपीनेस रिपोर्ट 2018 के अनुसार, 156 देशों की सूची में भारत को 133वां स्थान मिला है। परेशानी वाली बात यह है कि भारत 2017 की तुलना में 11 सीढ़ी नीचे गिरा है। आर्थिक और विकास सूचकांक में सकारात्मक दौड़ के बावजूद अपने अंतिम लक्ष्य यानी खुशहाली में इसका तेजी से लुढ़कना चिंता की बात है। यह गिरावट रोकने के लिए भारत क्या करे? हमें लैटिन अमेरिका से सीखना चाहिए। कमजोर राजनीतिक जमीन, घोर भ्रष्टाचार, हिंसा व अपराध की भरमार, आय के अत्यंत असमान वितरण व गरीबी में फंसे होने के बावजूद खुशी की रेटिंग में वे कहीं ज्यादा ऊपर हैं। वर्ल्ड हैपीनेस रिपोर्ट इसे उनके मजबूत पारिवारिक ताने-बाने के नतीजे के तौर पर व्याख्यायित करती है।
परिवार मूल इकाई और आधार है, जिस पर समाज का निर्माण होता है। यही उसके टिकाऊ होने का भी आधार होता है। यानी समाज के कार्यव्यवहार और प्रकृति में परिवार की बड़ी भूमिका होती है। जेएच लार्सन और टीबी होल्मन ने शादी को सबसे महत्वपूर्ण और मौलिक रिश्ता माना है, क्योंकि यह परिवार की स्थापना और अगली पीढ़ी को बुनियादी ढांचा देता है। हार्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रौढ़ विकास अध्ययन ने भी माना है कि ‘रिश्तों और इनके निर्वहन में हमारी खुशी का सेहत पर प्रभावी असर होता है।’ इसके अनुसार अपने शरीर की चिंता करना जरूरी है, लेकिन रिश्तों को संभालना भी खुद की चिंता करने का ही दूसरा रूप है। यही इस शोध का असल निष्कर्ष है। 
जाति व्यवस्था और खाप पंचायतों की बुराइयों के खात्मे के लिए आधुनिक समाज व सरकारें अंतरजातीय विवाहों को प्रोत्साहित करते हैं। इसके सकारात्मक प्रभाव तो हैं, पर एक दोष भी है। यह माता-पिता की रजामंदी से हुए विवाहों की अवधारणा यानी सामूहिक निर्णय लेने की व्यवस्था पर प्रेम करने वाले के व्यक्तिगत निर्णय को प्रोत्साहित करता है। इसमें बड़े-बुजुर्गों की राय के लिए स्थान नहीं है। कोलंबिया बिजनेस स्कूल की प्रोफेसर और द आर्ट ऑफ चूजिंग  की लेखिका शीना आयंगर, व्हार्टन बिजनेस स्कूल की प्रोफेसर कैसी मॉगिलनर और स्टैनफोर्ड बिजनेस स्कूल के प्रोफेसर बाबा शिव ने प्रेम विवाह और अरेंज्ड मैरिज में निर्णय लेने की मानसिक प्रक्रिया पर अध्ययन किया, जो उनके अनुसार दो तरह की होती है। एक क्रमिक, दूसरी साथ-साथ। क्रमिक वह प्रक्रिया है, जहां सिर्फ एक विकल्प पर विचार किया जाता है। ऐसा अक्सर तब होता है, जब गलत विकल्प चुनने के खतरे बहुत सीमित व गलत फैसलों के नतीजे खराब होने की आशंका कम होती है। इसके विपरीत जब निर्णय की कीमत यानी खतरे बहुत ज्यादा हों, तो हम क्रमिक फैसलों की ओर जाते हैं। एक ऐसी प्रक्रिया, जहां कई विकल्पों पर विचार की गुंजाइश होती है, जिसमें सर्वोत्कृष्ट का चयन होता है। 

प्रेम विवाह में क्रमिक निर्णय प्रक्रिया काम करती है, जबकि अरेंज्ड मैरिज में साथ-साथ यानी सामूहिक निर्णय प्रक्रिया चलती है। शोध बताते हैं कि क्रमिक की अपेक्षा साथ-साथ या सामूहिक रूप से लिए गए निर्णय के नतीजे बेहतर साबित हुए हैं। अरेंज्ड मैरिज में सूचना के सूत्र से लेकर फैसले तक सामूहिकता होती है, जिसमें परिवार ही नहीं समाज भी शामिल रहता है, जबकि प्रेम विवाह में सूचना का आधार व उत्तरदायित्व महज एक व्यक्ति होता है। संज्ञानात्मक असहमति का सिद्धांत बताता है कि वह वही सूचना लाता है, जो उसके मौजूदा सोच से मेल खाती है। यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन का 2004 का अध्ययन शेक्सपियर की उस बात की पुष्टि करता है, जिसमें वह कहते हैं, ‘प्यार अंधा होता है और प्रेमी देख नहीं सकते’। प्यार की अनुभूति दिमाग के उन कोनों पर परदा डाल देती है, जिन पर महत्वपूर्ण फैसले लेने की जिम्मेदारी होती है। यह सही है कि अरेंज्ड मैरिज प्रक्रिया में बदलाव की जरूरत है, जो शादी करने वाले जोड़ों को एक-दूसरे को और अधिक समझने का वक्त दे। पर स्थिर विवाह देने में अरेंज्ड मैरिज की श्रेष्ठता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह ज्यादा खुशहाल समाज का निर्माण करता है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं) 

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