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हाल के दौरे ने बढ़ाई विश्व क्रिकेट में हमारी साख

शिवेंद्र कुमार सिंह

करीब तीन महीने के लंबे दौरे में पहली बार टीम इंडिया को किसी सीरीज में हार का मुंह देखना पड़ा। न्यूजीलैंड ने आखिरी ट्वंटी-20 मैच में चार रनों से टीम इंडिया को शिकस्त देकर तीन मैचों की यह सीरीज 2-1 से अपने नाम कर ली। बावजूद इस हार के कोई हो-हल्ला नहीं है। टीम के प्रदर्शन पर कोई प्रश्न नहीं खडे़ कर रहा। किसी खिलाड़ी को टीम से निकालने की मांग नहीं हो रही। मुश्किल से हार पचाने वाले भारतीय क्रिकेट प्रशंसक आखिर निश्चिंत क्यों हैं? दरअसल, यह बदलाव इसलिए आया है, क्योंकि अव्वल तो वे यह बात अच्छी तरह समझ रहे हैं कि टीम इंडिया में विश्व कप से पहले कुछ खिलाड़ियों को आजमाने का दौर चल रहा है। दूसरा, तीन महीने लंबे इस दौरे में टीम इंडिया ने अपने प्रशंसकों को वह सब कुछ दिया है, जिसकी बदौलत एक हार का गम न के बराबर है। 
नवंबर से ही शुरू यह दौरा रविवार को संपन्न हुआ। इस दौरान टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया से ट्वंटी-20 सीरीज ड्रॉ की, टेस्ट सीरीज में ऐतिहासिक जीत दर्ज की, और फिर वनडे शृंखला में कंगारुओं को हराया। न्यूजीलैंड में भी जीत का सिलसिला रुका नहीं। एकदिवसीय शृख्ांला में कीवियों को 4-1 के बडे़ अंतर से हराया, वहीं ट्वंटी-20 सीरीज में भी मुकाबला तीसरे मैच तक पहुंचा। बल्कि तीसरे मैच में भी आखिरी ओवर तक पहुंचा। टीम इंडिया इसमें जीत की दहलीज तक पहुंचकर चूक गई। पिछले तीन महीनों के भारतीय टीम के प्रदर्शन की चर्चा इस वक्त दुनिया की हर क्रिकेट टीम में हो रही है। यह स्वाभाविक भी है, क्योंकि चंद महीनों के बाद दुनिया भर की टीमों को विश्व कप के लिए आपस में भिड़ना है। 
नवंबर के मध्य में जब भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया के लिए रवाना हुई थी, तब बहुत कुछ दांव पर था। सबसे ज्यादा कोच रवि शास्त्री का वह दावा दांव पर था कि मौजूदा टीम इंडिया विदेशी दौरे पर जाने वाली भारतीय क्रिकेट इतिहास की सर्वश्रेष्ठ टीम है। साल 2018 में शानदार प्रदर्शन के बाद भी टीम इंडिया को छोटी-छोटी गलतियों की वजह से दक्षिण अफ्रीका और इंग्लैंड में टेस्ट सीरीज गंवानी पड़ी थी। लिहाजा हार के वे मामूली अंतर प्रशंसकों को और चुभ रहे थे। हार के अंतर से ज्यादा पराजय की वजहों पर चर्चा हो रही थी। चर्चाओं के ऐसे दौर में कंगारुओं के खिलाफ मैदान में टीम इंडिया को उतरना था। विराट की अगुवाई में टीम इंडिया न सिर्फ मैदान में उतरी, बल्कि उसने मैदान भी मारा। पूरी टेस्ट सीरीज में दो-चार सेशन छोड़ दिए जाएं, तो ऑस्टे्रलियाई टीम ज्यादातर समय बैकफुट पर रही। ट्वंटी-20 से लेकर वनडे सीरीज तक टीम इंडिया का दबदबा रहा। ऑस्ट्रेलिया में मिली सफलता के बाद अगला इम्तिहान न्यूजीलैंड में था। न्यूजीलैंड की टीम को उसी की जमीन पर वनडे क्रिकेट में हराना कहीं से आसान नहीं है। उनकी टीम में संतुलन था, अनुभव था, आक्रामकता भी थी। लेकिन टीम इंडिया ने इन तीनों कसौटियों पर खुद को बीस साबित किया। यह दबदबा आईसीसी की रैंकिंग में भी दिखता रहा, जहां टीम इंडिया टेस्ट रैंकिंग में शीर्ष पर है। वनडे और टी-20 में वह दूसरे पायदान पर है।   
आधुनिक क्रिकेट में तकनीक का जमकर इस्तेमाल होता है। किसी भी टीम के खिलाड़ियों की ताकत और कमजोरी का अंदाज लगाने के लिए हर टीम में ‘वीडियो-ऐनलिस्ट’ होते हैं। इंग्लैंड में होने वाले विश्व कप से पहले दुनिया भर की टीमें भारतीय टीम की ताकत और कमजोरी का आकलन करने में लगी हैं। उनकी मुसीबत यह है कि भारतीय बल्लेबाजों के खिलाफ तो रणनीति फिर भी बनाई जा सकती है, लेकिन भारतीय गेंदबाजों की काट अभी खोजना उनके लिए मुश्किल हो रहा है। सबसे घातक आक्रमण के तौर पर उभरी टीम इंडिया की गेंदबाजी इकाई ने विश्व की सभी टीमों को हैरान कर दिया है। बड़ी से बड़ी टीम के नामी-गिरामी बल्लेबाजों के पास फिलहाल टीम इंडिया की सीम, स्विंग और स्पिन गेंदबाजी का कोई तोड़ नहीं दिख रहा है। टीम इंडिया की इसी ताकत का नतीजा है कि भारतीय क्रिकेट फैंस भी अब ‘एक हार सब कुछ बेकार’ की सोच से बाहर निकल चुके हैं।
    (ये लेखक के अपने विचार हैं)

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  • Web Title:najariya hindustan column on 12 february