DA Image
हिंदी न्यूज़   ›   ओपिनियन  ›  नजरिया  ›  बिग डाटा में चीन की लंबी छलांग और हमारे कदम
नजरिया

बिग डाटा में चीन की लंबी छलांग और हमारे कदम

रंजीत कुमार वरिष्ठ पत्रकारPublished By: Gunateet
Sun, 02 Jun 2019 11:52 PM
बिग डाटा में चीन की लंबी छलांग और हमारे कदम

आधुनिक अर्थव्यवस्था के नए सुपरफास्ट ड्राइवर के तौर पर विकसित हो रही बिग डाटा तकनीक के क्षेत्र में जो क्रांति हो रही है, उसने आर्थिक खेल के नियम बदलने शुरू कर दिए हैं। चीन ने इस तकनीक में लंबी छलांग लगानी शुरू कर दी है। इसकी बदौलत वह न केवल अपनी चमक खोती अर्थव्यवस्था में चार चांद लगाने की उम्मीद कर रहा है, बल्कि अपने मुल्क के आम लोगों को भी बिग डाटा तकनीक से भारी लाभ मिलने का भरोसा दे रहा है। करीब पांच साल पहले इस बिग डाटा तकनीक का चीन में व्यापक इस्तेमाल करने का फैसला किया गया था और अब एक राष्ट्रीय संकल्प के तौर पर पूरा देश इसमें जुट गया है।
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बिग डाटा तकनीक के व्यापक इस्तेमाल की राष्ट्रीय नीति घोषित की है और चीन के पूरे सूचना तकनीक तंत्र को इसमें झोंकने में जुटे हैं। दिलचस्प बात यह है कि चीन को अपने बिग डाटा उद्योग के तेज विकास और कुछ ही वर्षों के भीतर इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारतीय सॉफ्टवेयर विशेषज्ञों की मदद मांगने में कोई झिझक नहीं हो रही। वास्तव में, भारतीय सूचना तकनीक विशेषज्ञ चीन के बिग डाटा उद्योग की रीढ़ के तौर पर देखे जा रहे हैं। चीन की  डिजिटल वैली माने जाने वाले कुईयांग में इसी इरादे से पांचवां बिग डाटा एक्सपो 26 से 29 मई तक आयोजित किया गया, जिसमें 30 से अधिक अग्रणी विकसित देशों की दो दर्जन से अधिक भारतीय कंपनियों सहित 300 से ज्यादा कंपनियों ने भाग लिया।
सम्मेलन में भाग ले रहे प्रसिद्ध क्रिप्टोलॉजिस्ट ह्विटफील्ड दिफे के मुताबिक, वास्तव में आज का इंटरनेट समाज तीन मुख्य कारकों पर अपनी बुनियाद मजबूत कर रहा है। ये हैं- बिग डाटा, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, यानी कृत्रिम बौद्धिकता और साइबर सुरक्षा। बिग डाटा की कोई आकार सीमा नहीं होती। आज हम करोड़ों आंकड़ों का क्षण भर में विश्लेषण करने लगे हैं। कंप्यूटरों का आविष्कार आंकड़ों के त्वरित विश्लेषण और प्रबंध के लिए ही किया गया था। इसके जरिए करोड़ों आंकड़ों, इनकी विभिन्न प्रणालियों, भिन्न भाषाओं और गति को हम दिन के बदले घंटों या सेकंडों में हासिल कर ले रहे हैं। वास्तव में, बिग डाटा की सभी विशेषताएं आज से 75 साल पहले भी मौजूद थीं, लेकिन आज हम जिस बड़े पैमाने पर उनका संग्रहण और विश्लेषण कर सकते हैं, पहले नहीं कर सकते थे। इंटरनेट ने श्रेष्ठ स्तर का डाटा इकट्ठा करके हमें इसके विश्लेषण करने की क्षमता दी है। इससे सरकारें अपना प्रशासन सक्षम बना सकती हैं। अर्थव्यवस्था को अधिक सक्रिय कर सकती हैं। इससे खुलापन और पारदर्शिता आती है।
लेकिन बिग डाटा को हम एक दोधारी तलवार भी कह सकते हैं। यह परमाणु तकनीक जैसी है, जो विनाश भी कर सकती है और क्रांतिकारी विकास भी। बिग डाटा के जरिए हम किसी व्यक्ति या समाज के भीतर भी झांकने की अनुमति जाने-अनजाने दे देते हैं। इससे हमारी निजी या सामाजिक प्रतिष्ठा या आजादी में सेंध लगाई जा सकती  है। हम इसके जरिए किसी देश के प्रशासन में भी घुसपैठ कर सकते हैं। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी यह स्वीकार किया है कि साइबर सुरक्षा के बिना राष्ट्रीय सुरक्षा नहीं हो सकती। 
पिछले कुछ समय में हमारी कंप्यूटर विश्लेषण क्षमता दस लाख गुना बढ़ चुकी है और सूचनाओं के भंडारण की क्षमता भी दस लाख गुना अधिक हो चुकी है। चीन इस क्षमता का दोहन अपनी अर्थव्यवस्था को उछाल देने में कर रहा है। यही वजह है कि वह बिग डाटा उद्योग में दुनिया का अग्रणी देश बन चुका है। करीब 42 अरब डॉलर के इस उद्योग में चीन का हिस्सा 60 प्रतिशत और अमेरिका का 23 प्रतिशत है। जहां तक भारत का सवाल है, तो सिर्फ कुछ छोटे कदम उठाए जा सके हैं, क्योंकि बिग डाटा उद्योग को खड़ा करने के लिए जो ढांचागत सुविधा चाहिए, वह हमारे पास अभी नहीं है। बिग डाटा तकनीक से लाभ उठाने के लिए भारत के पास मानव संसाधन तो है, लेकिन तकनीकी ढांचागत सुविधाएं नहीं हैं। यह क्रांति किसी भी देश के आर्थिक विकास को भारी गति देने की क्षमता रखती है, इसलिए बिग डाटा तकनीक के समुचित दोहन के लिए भारत में राष्ट्रीय नीति की तुरंत ही जरूरत है।
    (ये लेखक के अपने विचार हैं)

संबंधित खबरें