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विश्व कप की दावेदारी को कमजोर करने वाली हार

शिवेंद्र कुमार सिंह, वरिष्ठ खेल पत्रकार

कंगारुओं ने 2009 के बाद पहली बार भारत को उसी के घर में हरा दिया। फिरोजशाह कोटला मैदान में 273 रनों के लक्ष्य को हासिल करने में टीम इंडिया 237 पर ही सिमट गई। इस तरह ऑस्ट्रेलिया ने 35 रनों की जीत हासिल की। 2009 के बाद पहली बार ऐसा हुआ कि ऑस्ट्रेलिया ने भारत को लगातार तीन वनडे मैचों में मात दी। कोहली की कप्तानी में पहली बार ऐसा हुआ कि उन्हें तीन मैचों में लगातार हार का सामना करना पड़ा। ऑस्ट्रेलिया ने करीब दो साल बाद कोई वनडे सीरीज जीती। जिस ऑस्ट्रेलियाई टीम का 2018 के बाद से वनडे मैचों में जीत का प्रतिशत 20 फीसदी से भी कम पर पहुंच गया था, वह लगातार मैच जीत गई। ऑस्ट्रेलिया ने रांची, मोहाली और दिल्ली में जो तीन वनडे मैच जीते, तीनों में उसकी जीत बहुत प्रभावी थी। उन्होंने भारतीय पिचों को ज्यादा बेहतर ढंग से समझा। उनके स्पिन गेंदबाजों को भारतीय स्पिनर्स के मुकाबले ज्यादा सफलता मिली। यह सब तब हुआ, जब आईसीसी की वनडे रैंकिंग में भारत ऑस्ट्रेलिया के मुकाबले कहीं बेहतर स्थिति में था। हाल ही में उसने ऑस्ट्रेलिया को उसी के घर में वनडे और टेस्ट सीरीज में हराया था। 
इस सीरीज के पहले टीम इंडिया कागज और मैदान, दोनों पर ऑस्ट्रेलिया से कहीं बेहतर दिख रही थी। विश्व कप की तैयारियों के मद्देनजर भी भारत का दावा सबसे ज्यादा मजबूत था। ऑस्ट्रेलिया के मुकाबले तो कहीं ज्यादा मजबूत, क्योंकि ऑस्ट्रेलियाई टीम पिछले दो साल में न्यूजीलैंड, इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वनडे सीरीज गंवाकर ‘बैकफुट’ पर थी। वनडे सीरीज के पहले मैच में कंगारुओं ने सिर्फ 236 रन बनाए। इसके बाद अगले मैच में ऑस्ट्रेलियाई टीम सिर्फ 251 रनों के लक्ष्य का पीछा नहीं कर पाई। इससे उलट अपनी पूरी ताकत के साथ मैदान में न उतरने के बाद भी भारतीय टीम को जीत मिली। बाजी पलटी तीसरे वनडे से। सीरीज में पहली बार ऑस्ट्रेलियाई टीम 300 रन के आंकड़े को पार करने में कामयाब हुई। इसके बाद तो भारतीय बल्लेबाजी की कमजोरी परत-दर-परत दिखने लगी। ऑस्ट्रेलिया ने वह मैच 32 रनों से जीता। अगले मैच में जब भारतीय टीम को पहले बल्लेबाजी करते हुए 400 रनों के आस-पास पहुंचने का मौका मिला, तो वह 358 ही बना पाई। ऑस्ट्रेलिया ने यह लक्ष्य 13 गेंद पहले ही हासिल कर लिया। आखिरी मैच में भी भारतीय बल्लेबाजी का बुरा प्रदर्शन दिखाई दिया। लिहाजा पांच मैचों की सीरीज के खत्म होते-होते ऑस्ट्रेलियाई टीम भारतीय टीम के मुकाबले ज्यादा संतुलित दिखी। उसने यह संदेश भी दे दिया कि विश्व कप के लिए उसका दावा कमजोर न समझा जाए। विश्व कप के 11 संस्करणों में ऑस्ट्रेलियाई टीम ही पांच बार विजेता रही है। 
आखिर कैसे टीम इंडिया एक के बाद एक तीन मैच हार गई? इसके कई कारण हैं। इन कारणों में ही टीम इंडिया के लिए सबक भी छिपा हुआ है। अव्वल कारण है टीम का संतुलन। विश्व कप की तैयारियों के मद्देनजर कई खिलाड़ियों को आजमाने की कोशिश में टीम का संतुलन लगातार बनता-बिगड़ता रहा। टीम के करिश्माई स्पिनर्स की जोड़ी के तौर पर यजुवेंद्र चहल और कुलदीप यादव बेरंग दिखे। एक को छोड़कर बाकी चार मैचों में टीम इंडिया के टॉप ऑर्डर ने लगातार निराश किया। नंबर चार के बल्लेबाज की परेशानी बनी रही। भारतीय बल्लेबाज ऑस्ट्रेलियाई स्पिनर एडम जैंपा के खिलाफ बहुत असहज दिखाई दिए, जिसमें दुनिया के सबसे शानदार बल्लेबाज भारतीय कप्तान विराट कोहली भी शामिल हैं। टी-20 और वनडे सीरीज में उन्होंने तीन बार विराट कोहली को आउट किया। एडम जैंपा ने वनडे सीरीज में 11 विकेट लिए। इसके अलावा बड़ा सवाल यह भी है कि आखिरी दो वनडे मैचों में धौनी समेत पूरी सीरीज में जिन खिलाड़ियों को आराम दिया गया, वह नीति भी क्या दुरुस्त थी? अगले कुछ दिनों में ये खिलाड़ी आईपीएल में व्यस्त हो जाएंगे। आईपीएल के बाद टीम विश्व कप के लिए इंग्लैंड रवाना हो जाएगी। लेकिन भूलिएगा मत, कुछ समय पहले तक विश्व कप पर भारतीय टीम का जो दावा बहुत मजबूत दिख रहा था, उसे इस सीरीज के नतीजे ने कमजोर किया है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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  • Web Title:najariya hindustan column 15 march