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विश्व कप को भुला मौजूदा सीरीज पर ध्यान देना जरूरी 

शिवेंद्र कुमार सिंह वरिष्ठ खेल पत्रकार 

यह सच है कि क्रिकेट का विश्व कप अब चंद महीने दूर रह गया है। उसकी तैयारी में कोई हर्ज भी नहीं है। दुनिया भर की टीमें इस काम में जुट गई हैं। लेकिन भारत के सामने फिलहाल पहली चुनौती है ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एक दिवसीय शृंखला की। टी-20 सीरीज बराबरी पर खत्म हुई थी। टेस्ट सीरीज में भारतीय टीम ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की। अब करीब पचास दिन ऑस्ट्रेलिया में रहने के बाद इस वन डे सीरीज के साथ टीम इंडिया का दौरा खत्म होने वाला है। बेहतर होगा कि इस अंत को भी जीत के साथ पूरा किया जाए। कप्तान विराट कोहली काफी प्रोफेशनल माने जाते हैं। उन्हें टीम मैनेजमेंट का पूरा सहयोग हासिल है। बावजूद इसके उन्हें फिलहाल अपने खिलाड़ियों को यह बताना चाहिए कि वह विश्व कप को छोड़कर मौजूदा सीरीज पर फोकस करें। टीम के उप-कप्तान रोहित शर्मा ने वन डे सीरीज शुरू होने से पहले मीडिया से विश्व कप की तैयारियों को लेकर खासी चर्चा की। वह शायद यह भूल गए कि क्रिकेट किस हद तक अनिश्चितताओं का खेल है। सैकड़ों उदाहरण भरे पड़े हैं, जब विश्व कप की टीम चुने जाने से ऐन पहले किसी मुख्य खिलाड़ी को किसी कारण से अलग होना पड़ा और टीम का पूरा प्लान बदल गया। अनहोनी और हादसों को रोका नहीं जा सकता, लेकिन फिलहाल अपनी सोच पर ब्रेक तो लगाया जा सकता है।
ऑस्ट्रेलिया से ही सबक लिया जा सकता है। विश्व क्रिकेट में जब कंगारुओं की धूम थी, तब वे मैच दर मैच आगे बढ़ते थे। कमजोर से कमजोर टीम को किसी तरह की रियायत नहीं देते थे, बल्कि बड़े अंतर से मैच जीता करते थे। यही वजह थी कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनकी साख ऐसी बनी कि वे मैदान में टॉस के लिए उतरते थे और क्रिकेट फैंस भविष्यवाणी कर देते थे कि आज तो ऑस्ट्रेलिया ही जीतेगा। अब टीम इंडिया काफी हद तक उसी दबदबे के साथ क्रिकेट खेल रही है। क्रिकेट के तीनो फॉर्मेट में टीम इंडिया जबर्दस्त है। ऐसे में, क्यों न विश्व कप के लिए सोच की उड़ान भरने से पहले इस सीरीज में ‘व्हाइट वॉश’ करने की सोची जाए? अगर टीम इंडिया ‘व्हाइट वॉश’ करने में कामयाब रहती है, तो विश्व कप से पहले बाकी टीमों को मजबूत संदेश जाएगा। उन्हें समझ आएगा कि वाकई टीम इंडिया इस वक्त ऐसे बेजोड़ खिलाड़ियों का समूह है, जो किसी पिच पर, किसी भी आक्रमण के सामने जीत हासिल करना जानते हैं। 
कंगारुओं को ‘व्हाइट वॉश’ करना कोई आसमान से तारे तोड़ने जैसी बात नहीं है। टेस्ट सीरीज में क्रिकेट फैंस ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों की हालत देख चुके हैं। ऑस्ट्रेलिया में ग्लेन मैक्सवेल समेत जो वनडे स्पेशलिस्ट बल्लेबाज आए हैं, वे भी भारतीय स्पिनर्स के सामने पिछले साल फीके ही रहे हैं। गेंदबाजी के लिहाज से भी ऑस्ट्रेलिया कोई बहुत दमदार स्थिति में नहीं है। वनडे में रोहित शर्मा, विराट कोहली, शिखर धवन जैसे टॉप के तीन भारतीय बल्लेबाज किसी भी आक्रमण की धज्जियां उतारने में सक्षम हैं। शिखर धवन टी-20 सीरीज में कमाल की फॉर्म में थे। धोनी का अनुभव टीम के लिए उपयोगी है। वह यहां अपनी कप्तानी में 2008 में सीबी सीरीज जीत चुके हैं। यजुवेंद्र चहल और कुलदीप यादव इस बात से जोश में हैं कि ऑस्ट्रेलियाई पिचें उन्हें मदद करेंगी। फ्लाइट करने की हिम्मत उनमें है ही और उनकी गेंद ‘डिप’ भी करेगी। इन पहलुओं को ध्यान में रखकर सोचिए कि अगर टीम इंडिया कंगारुओं को उन्हीं के घर में वनडे सीरीज में धो देती है, तो उसका क्या महत्व होगा। विश्व कप से पहले टीम इंडिया को करीब एक दर्जन वनडे मैच और खेलने हैं। संभव है कि अगले सभी मैचों की रणनीति बनाने में एक किस्म का संतुलन हो। सचिन तेंदुलकर हर बड़ी कामयाबी के बाद एक शब्द का इस्तेमाल करते थे- ‘प्रॉसेस’ यानी प्रक्रिया। उनका कहना था कि प्रक्रिया ठीक रहेगी, तो नतीजा अपने आप सामने आएगा। शतक की भी एक प्रक्रिया होती है। एक-एक रन जोड़कर ही खिलाड़ी वहां तक पहुंचता है। ऐसे में, बुद्धिमानी इसी में है कि टीम इंडिया का यंगिस्तान फिलहाल सिर्फ प्रक्रिया पर ध्यान दे, विश्व कप की तैयारी खुद होती चली जाएगी।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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  • Web Title:najariya hindustan column 12 january